लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि, "हमें अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण COVID-19 रोगियों की हो रही मृत्यु को देखकर दु:ख हो रहा है। ऑक्सीजन की आपूर्ति न करना एक आपराधिक कृत्य है और इस तरह से लोगों की जान जाना नरसंहार से कम नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर हमला बोला| प्रियंका गांधी ने कहा कि,''हाईकोर्ट ने सरकार को सही आईना दिखाया है। उप्र सरकार ऑक्सीजन की कमी की बात को लगातार झुठलाती रही। कमी की बात बोलने वालों को धमकी देती रही।जबकि सच्चाई ये है कि ऑक्सीजन की कमी से लगातार मौतें हुई हैं और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इससे पहले प्रियंका गांधी ने कहा था कि,सरकार कहती है कि कोई अभाव नहीं है। लेकिन जमीन पर लोग सरकार के इस बयान की सच्चाई बता रहे हैं। अभाव ही अभाव है। अभाव के चलते ब्लैक मार्केटिंग वाले आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। बस सरकार का कोई अता - पता नहीं है।
बता दें कि,''ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण COVID-19 रोगियों की हो रही मृत्यु के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन की खरीद और आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारी द्वारा अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति न करना आपराधिक कृत्य है।यह नरसंहार से कम नहीं|
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि, "हमें अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण COVID-19 रोगियों की हो रही मृत्यु को देखकर दु:ख हो रहा है। ऑक्सीजन की आपूर्ति न करना एक आपराधिक कृत्य है और इस तरह से लोगों की जान जाना नरसंहार से कम नहीं है। अधिकारियों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की निरंतर खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है।"
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को परेशान किया जा रहा है और जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन दोनों कुछ नहीं कर रहे हैं। लोग अपने निकट और प्रियजनों के जीवन को बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भीख मांग रहे हैं।हम इस तरह से अपने लोगों को कैसे मरने दे सकते हैं जब विज्ञान इतना उन्नत है कि हार्ट ट्रांसप्लांटेशन और ब्रेन सर्जरी भी इन दिनों हो रही है।"
बेंच ने एक न्यूज देखा जिसमें एक व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के लिए सरकार से गुहार लगा रहा है। कोर्ट ने लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट और मेरठ के जिला मजिस्ट्रेट को 48 घंटे के भीतर ऐसी समाचार वस्तुओं के मामले में पूछताछ करने और क्रमशः निर्धारित अगली तारीख पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि वे अगली तारीख पर कोर्ट में ऑनलाइन पेश हों।