लखनऊ: समाजवादी व्यापार सभा ने सोने के दो लाख रुपए से अधिक की खरीद पर ई-वे बिल अनिवार्यता लागू करने के कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि इससे कई छोटे पैमाने की आभूषण विनिर्माण इकाइयां प्रभावित होंगी और सुनार व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे। समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने कहा कि भाजपा सरकार को छोटे व्यापारियों को दुश्मन मानती है। इसलिए पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट घरानों की मदद करने के लिए तानाशाही निर्णय लिया गया है।
प्रदीप जायसवाल ने कहा कि भविष्य में दो लाख रुपये की सीमा तय करने से सोने के व्यापार क्षेत्र से छोटे व्यापारी खत्म हो जाएंगे और छोटे पैमाने पर सोने के आभूषण विनिर्माण क्षेत्र में श्रमिकों का जीवन दयनीय हो जाएगा। इससे अपराध बढ़ेगा क्योंकि लूट और माल आवागमन की जानकारी सार्वजनिक हो सकती है और व्यापारियों को कई स्तर पर जटिल हिसाब किताब रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे इंस्पेक्टर राज और व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
समाजवादी व्यापार सभा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रवक्ता अभिमन्यु गुप्ता ने कहा कि ₹40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले सोना व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार यदि कोई छूट प्राप्त व्यापारी दो लाख रुपए से अधिक मूल्य का 36 ग्राम सोना लेकर जाता है और पकड़ा जाता है, तो उसे ₹40 लाख के दायरे का लाभ कैसे मिल सकता है? एक सुनार जो न्यूनतम 36 ग्राम सोने को आभूषणों में परिवर्तित करता है, उसे रंग लगाने, काटने, पॉलिश करने आदि के हिस्से के रूप में उत्पाद को विभिन्न इकाइयों में ले जाना पड़ता है।
समाजवादी व्यापार सभा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अजय सूद, प्रदेश उपाध्यक्ष बोट सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्वांचल प्रभारी विजय जायसवाल एवं प्रदेश प्रमुख महासचिव यासिर सिद्दीकी आदि ने केन्द्र की भाजपा सरकार से मांग की है कि इस व्यापारी विरोधी निर्णय को किसी भी हाल में उत्तर प्रदेश में न लागू किया जाए और व्यापारियों का उत्पीड़न बंद करे।