नई दिल्ली: शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने रविवार को आरोप लगाया कि शिवसेना का नाम और धनुष-बाण (चुनाव चिन्ह) को "खरीदने" के लिए ₹2,000 करोड़ का लेन-देन हुआ है। राउत ने दावा किया कि ₹2,000 करोड़ एक प्रारंभिक आंकड़ा है और यह 100 प्रतिशत सच है। उन्होंने यह भी दावा कि सत्तारूढ़ दल (BJP) के करीबी एक बिल्डर ने उनके साथ यह जानकारी साझा की। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि उनके दावे के समर्थन में सबूत हैं, जिसका खुलासा वह जल्द करेंगे।
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने कहा कि,'शिवसेना और उसका निशान (तीर-कमान) चिह्न छीना गया है और ऐसा करने के लिए इस मामले में अब तक 2,000 करोड़ रुपए की लेनदेन हुई है|
संजय राउत ने कहा, ''मैंने अपने ट्वीट से ही देश को अवगत किया है। जिस तरह से हमारे चुनाव चिह्न और शिवसेना का नाम लिया गया है...| वह न्याय नहीं है , सच नहीं है...| यह एक व्यापारिक सौदा है, जिसके लिए 2000 करोड़ रुपये की लेनदेन हुई है| यह मेरा शुरुआती अनुमान है।''
राउत ने कहा कि ''जो सरकार ...जो नेता...- बेईमान गुट के विधायकों के लिए 50 करोड़, सांसदों के लिए 100 करोड़ और हमारे पार्षदों को खरीदने के लिए 50 लाख से 1 करोड़ की बोली लगाता है। वो हमारा नाम शिवसेना और चुनाव चिह्न लेने के लिए कितनी बोली का लगा सकता है, आप तय करें? मेरी जानकारी 2,000 करोड़ रुपये है।''
अमित शाह के बयान पर संजय राउत ने कहा कि, ''अमित शाह क्या बोलते हैं, वो महाराष्ट्र के लोग ध्यान नहीं देते..जो सत्य को खरीदने का काम करते हैं वो झूठ और सच की क्या बात कर रहे हैं। इसका निर्णय लेने का काम जनता के पास है और समय आने पर वो करेगी...शिवसेना किसकी थी और किसकी होगी ये फैसला महाराष्ट्र के लोग लेंगे|
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कल यानी शनिवार को शिंदे गुट को 'शिवसेना' का नाम और 'चिन्ह' देने के चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया था| चुनाव आयोग के फैसले पर उन्होंने कहा था कि,''शुक्रवार (17 फरवरी 2023 ) को चुनाव आयोग ने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया| शाह ने कहा था कि, ''एकनाथ शिंदे की शिवसेना को असली शिवसेना और धनुष बाण दोनों मिल गए। जो लोग झूठ के आधार पर हुंकार भरते थे उन लोगों को आज मालूम पड़ गया है कि सत्य किसके साथ है?
राउत ने एक ट्वीट में कहा कि मुझे यकीन है... चुनाव चिन्ह और नाम हासिल करने के लिए अब तक 2000 करोड़ के सौदे और लेन-देन हो चुके हैं... यह प्रारंभिक आंकड़ा है और 100 फीसदी सच है.. जल्द ही कई बातों का खुलासा होगा.. देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था.
सांसद संजय राउत ने कहा, "चुनाव आयोग जैसा एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष होना चाहिए और किसी भी प्रभाव से दूर होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से आयोग इस भरोसे को नहीं पैदा करता। बीजेपी तो अपने 2000 करोड़ रुपए (50-50 करोड़ प्रति विधायक) के निवेश को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।"
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी और उसे 'धनुष और तीर' चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश दिया। शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के इस फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया था। वहीं, उद्धव गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को पूर्व नियोजित बताया था।