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25 अगस्त 2026

केरल के स्कूलों में अब नहीं होंगे 'बैकबेंचर', फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन' से मिली प्रेरणा

फिल्म से मिली प्रेरणा, केरल में शिक्षा प्रणाली में नवाचारअब केरल के स्कूलों में कोई बच्चा ‘बैकबेंचर’ नहीं कहलाएगा, क्योंकि वहां की सरकार और स्कूल प्रबंधन ने क्लासरूम की बैठने की पारंपरिक व्यवस्था को…

केरल के स्कूलों में अब नहीं होंगे 'बैकबेंचर', फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन' से मिली प्रेरणा
केरल के स्कूलों में अब नहीं होंगे 'बैकबेंचर', फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन' से मिली प्रेरणा | फ़ोटो: TVL News

फिल्म से मिली प्रेरणा, केरल में शिक्षा प्रणाली में नवाचार


अब केरल के स्कूलों में कोई बच्चा ‘बैकबेंचर’ नहीं कहलाएगा, क्योंकि वहां की सरकार और स्कूल प्रबंधन ने क्लासरूम की बैठने की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। इस प्रेरणादायक बदलाव का विचार हाल ही में दोबारा रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन’ से आया है, जिसमें एक दृश्य ने शिक्षा व्यवस्था की सोच को नया आयाम दिया।


कैसी है नई व्यवस्था?


इस अभिनव व्यवस्था में कक्षा की चारों दीवारों के साथ एक पंक्ति में सीटें लगाई गई हैं, जिससे हर बच्चा आगे की सीट पर बैठता है। अब हर छात्र शिक्षक के सामने रहेगा, जिससे शिक्षक सभी बच्चों पर नजर रख सकते हैं और बच्चे खुद को क्लास का सक्रिय हिस्सा समझते हैं।


शिक्षा में समानता का संदेश


यह व्यवस्था न केवल बच्चों की पढ़ाई पर बेहतर प्रभाव डालेगी, बल्कि मानसिक रूप से पीछे रहने की भावना को भी खत्म करेगी। अब कोई छात्र यह नहीं कह पाएगा कि वह हमेशा पीछे बैठता है और उसे नजरअंदाज किया गया।


फिल्म निर्देशक विनेश विश्वनाथन ने बताया कि, “यह विचार फिल्म के एक किरदार यानी 7वीं कक्षा के छात्र का था, जो खुद बैकबेंचर कहलाने पर अपमानित महसूस करता था। उसी अनुभव से उसे यह आइडिया आया।”


राष्ट्रीय स्तर पर असर


    अब तक केरल के आठ स्कूलों ने इस नई व्यवस्था को अपनाया है।


    पंजाब के एक स्कूल ने भी इसे लागू कर दिया है।


    फिल्म ‘स्थानार्थी श्रीकुट्टन’ ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी है, और शिक्षकों, छात्रों, और अभिभावकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्लासरूम का फिजिकल स्ट्रक्चर भी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।



शिक्षा मंत्री का सहयोग


केरल सरकार में मंत्री गणेश कुमार ने फिल्म के प्रीव्यू के दौरान ही इस विचार को गंभीरता से लिया और आरएमवीएचएसएस (Ramavilasam Memorial VHSS) स्कूल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू करवाया।


प्रमुख शिक्षक सुनील पी. शेखर ने बताया कि, “जब हमने इसे एक कक्षा में लागू किया, तो हमें बेहद सकारात्मक परिणाम मिले। अब इसे हमने सभी प्राइमरी कक्षाओं में लागू कर दिया है।”



केरल की यह पहल न केवल शैक्षिक समानता को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सिनेमा एक सशक्त सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकता है। यह बदलाव अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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