पटना/नई दिल्ली : बिहार में जाति आधारित गणना के मामले को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया| इस हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि जनगणना का अधिकार राज्य के पास नहीं है। यह केंद्र का अधिकार है। जातीय गणना मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जाति जनगणना की सुनवाई के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा बदल दिया| केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि पैरा पांच अनजाने में शामिल हो गया था|
जाति जनगणना पर केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मंगलवार को कहा,'' ...जहां तक हलफनामे की बात है तो भाजपा के लोगों का असली चेहरा उजागर हो गया है। रातों-रात हलफनामा बदल दिया गया, इससे पता चलता है कि भाजपा डरी हुई है। वे कभी भी जाति-आधारित गणना नहीं चाहते थे...भाजपा किससे डरती है? क्यों हलफनामा दाखिल किया गया?|
बिहार के मंत्री और जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा,''जातीय जनगणना के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो किया है, वह न सिर्फ हास्यास्पद है बल्कि आश्चर्यजनक है, यह बिहार के गरीबों को मिलने वाले लाभ के भी खिलाफ है|''
बता दें कि हाईकोर्ट के एक अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई है। इस मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह राज्य सरकार को डाटा रिलीज नहीं करने का निर्देश दे।
इस मामले में 18 अगस्त को कोर्ट मे सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से बताया गया था कि बिहार में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। आंकड़े भी ऑनलाइन अपलोड किए जा रहे हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने बिहार में हो रही जातीय गणना का ब्योरा रिलीज नहीं करने की मांग कर दी थी।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को भी खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि बिहार सरकार का पक्ष सुने बिना कोई रोक नहीं लगाई जा सकती।
बता दें कि, इससे पहले बिहार सरकार के जाति आधारित सर्वे को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार 1 अगस्त को खारिज कर दिया था। अधिवक्ता दीनू कुमार ने कहा था कि, जज ने ये फैसला सुनाया कि बिहार सरकार के जाति आधारित सर्वे को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं| बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पटना हाईकोर्ट द्वारा बिहार सरकार के जाति आधारित सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के फैसले को ऐतिहासिक बताया था|