प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अज़ान को लेकर दाखिल अर्जी को ख़ारिज किया। कोर्ट ने कहा कि लाउडस्पीकर से अज़ान देना मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अज़ान इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर से अज़ान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले इरफान ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके मांग की थी कि नूरी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान की अनुमति दी जाए| अब मस्जिद में 'लाउडस्पीकर लगाने' की मांग वाली इस याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है|जस्टिस बीके विडला और जस्टिस विकास की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज की|
मस्जिदों में 'लाउडस्पीकर लगाने' की मांग वाली याचिका को ख़ारिज करते हुए,''इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अजान इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं है|
गौरतलब है कि देश में जारी लाउडस्पीकर विवाद के बाद यूपी सरकार ने मंदिरों और मस्जिदों से करीब 50 हजार लाउडस्पीकर उतरवा दिए है हैं| इसके अलावा कई धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज को कम किया गया है|। 60 हजार धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर्स की आवाज को तय मानक के हिसाब से सेट कर दिया गया है।
'उत्तर प्रदेश के ADG (क़ानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने 30 अप्रैल, 2022 को बताया था,''राज्य भर के विभिन्न धार्मिक स्थलों से अब तक 45,773 लाउडस्पीकरों को हटाया गया है, जबकि 58,861 लाउडस्पीकरों के ध्वनि स्तर को कम करके मानक मानकों के स्तर तक लाया गया है|