प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग को लेकर वाराणसी कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका सुनवाई के लिए शुक्रवार को स्वीकार कर ली है| हाईकोर्ट ने ASI, राज्य सरकार और अंजुमन इंतजामिया को नोटिस जारी किया है| इस मामले में अगली तारीख 21 नवंबर निर्धारित की है|
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा,'याचिका खारिज होने के बाद हमने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राज्य सरकार और अंजुमन इंतजामिया को नोटिस जारी किया है और इस मामले में अगली तारीख
21 नवंबर निर्धारित की है|
उल्लेखनीय है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले कथित शिवलिंग के काल निर्धारण के लिए कार्बन डेटिंग का निर्देश जारी करने की मांग के साथ एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था, जिसमें जीपीआर सर्वे की भी मांग की गई थी| वाराणसी कोर्ट ने 14 अक्टूबर को पारित आदेश में इस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है|
वाराणसी कोर्ट द्वारा कार्बन डेटिंग और शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की याचिका खारिज करने पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने 14 अक्टूबर को कहा था,''हम इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। कोर्ट ने ये कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने उस जगह को सील कर रखा है इसलिए हम इसमें कोई भी ऑर्डर पास नहीं कर सकते|
इस बीच, ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी पूजा मामले की सुनवाई अधिवक्ताओं के अनुरोध पर टल गई है। अदालत ने श्रृंगार गौरी और अन्य देवी देवताओं की पूजा की अनुमति के लिए पांच हिंदू महिलाओं द्वारा दायर वाद की पोषणीयता को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई 22 नवंबर तक के लिए शुक्रवार को टाल दी| अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जे जे मुनीर कर रहे हैं।
इससे पहले गुरुवार को ज्ञानवापी परिसर वाराणसी स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत के फैसले की चुनौती याचिका पर सुनवाई की गई थी। गुरुवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने बहस की थी। उन्होंने गुरुवार को कहा कि ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित पूजा के अधिकार से जुड़े मामले में वाराणसी की जिला अदालत का आदेश कानूनी पहलुओं पर विचार किए बिना दिया गया है। इनका कहना है कि प्लेसेस आप वर्शिप एक्ट 1991 के तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। जिला अदालत ने कानूनी पहलू पर विचार किए बगैर आदेश दिया है।
मालूम हो कि दिल्ली की राखी सिंह व कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना किए जाने की मांग की है। मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन ए इंतजामियां कमेटी ने हिंदू महिलाओं के बाद पर आपत्ति दर्ज की तथा कहा था कि यह वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत सुनवाई लायक नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से उठाई गई आपत्ति की अर्जी खारिज खारिज कर दी थी।