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24 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ बजट 2021: गोधन न्याय योजना के लिए 175 करोड़ का प्रावधान, मत्स्य पालन को कृषि के समान दर्जा, श्रमिकों को सहायता

रायपुर: छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने सोमवार तीसरा बजट पेश किया है| छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में अपनी सरकार का तीसरा बजट पेश किया| पशुपालकों को न्याय● गोठानों को रोजगारोन्मुख…

छत्तीसगढ़ बजट 2021: गोधन न्याय योजना के लिए 175 करोड़ का प्रावधान, मत्स्य पालन को कृषि के समान दर्जा, श्रमिकों को सहायता
छत्तीसगढ़ बजट 2021: गोधन न्याय योजना के लिए 175 करोड़ का प्रावधान, मत्स्य पालन को कृषि के समान दर्जा, श्रमिकों को सहायता | फ़ोटो: TVL News

रायपुर: छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने सोमवार तीसरा बजट पेश किया है| छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में अपनी सरकार का तीसरा बजट पेश किया| 



पशुपालकों को न्याय

● गोठानों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। गोठान समितियों द्वारा पशुपालकों से 2 रू. किलो की दर से गोबर क्रय हेतु 80 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है

● स्व सहायता समूहों द्वारा गोबर से वर्मी कंपोस्ट एवं अन्य उत्पाद तैयार किया जा रहा है। अब तक 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है।

● वर्तमान में 7 हजार 841 स्व-सहायता समूह गोठान की गतिविधि संचालित कर रहे हैं। इन समूहों के लगभग 60 हजार सदस्यों को वर्मी खाद उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, गोबर दिया निर्माण इत्यादि विभिन्न गतिविधियों से 942 लाख की आय प्राप्त हो चुकी है।

गोठान योजना के लिये वर्ष 2021-22 के बजट में 175 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।




मछुआरों को न्याय

● मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जल क्षेत्रों में से 95 प्रतिशत क्षेत्र को विकसित करके 2 लाख से अधिक मछुआरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।


● स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन की योजना राज्य में काफी लोकप्रिय है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नील क्रांति योजना एवं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत निजी तालाबों का निर्माण करवाया जा रहा है। वर्ष 2021-22 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में 79 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।


● मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु इसे कृषि के समान दर्जा दिये जाने की कार्यवाही की जायेगी। वर्ष 2021-22 के बजट में मत्स्य पालन की गतिविधियों के लिये 171 करोड़ 20 लाख का प्रावधान किया गया है।





परम्परागत कर्मकारों को न्याय

● परम्परागत ग्रामीण व्यवसायिक कौशलों के पुनरूद्धार एवं कर्मकारों को सहयोग प्रदान करने के लिए तेलघानी विकास बोर्ड, चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड, लौह शिल्पकार विकास बोर्ड एवं रजककार विकास बोर्ड की स्थापना की जायेगी।

● कोसा उत्पादन एवं कोसा वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है। वर्तमान में कोसा उत्पादन एवं वस्त्र निर्माण के कार्यों में 50 हजार से अधिक हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा गया है। हाथकरघा वस्त्र बुनाई के माध्यम से 60 हजार परिवारों को रोजगार मिल रहा है।

● लाख पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ब्याज रहित ऋण की सुविधा प्राप्त करने के लिये लाख पालन को भी कृषि के समकक्ष दर्जा प्रदान किया गया है।





श्रमिकों को सहायता

●असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक से संबंधित आंकड़ों के ऑनलाईन संधारण तथा विभिन्न योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचाने की दृष्टि से विभिन्न एप्प निर्माण एवं राज्य स्तरीय हेल्प डेस्क सेन्टर की स्थापना हेतु नवीन मद में प्रावधान रखा गया है|


● असंगठित श्रमिकों, ठेका मजदूरों, सफाई कामगारों एवं घरेलू कामकाजी महिलाओं के कल्याण की योजना में 61 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

● राज्य बीमा अस्पताल योजना में 56 करोड़ तथा कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालयों हेतु 48 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

● राजीव किसान न्याय योजना का दायरा भूमिधारी कृषकों से आगे बढ़ाने के लिये ग्रामीण कृषि भूमिहीन श्रमिकों को सहायता हेतु नवीन न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी।





वन आश्रितों को सहायता

● पूर्व में निरस्त किये गये वन अधिकार मान्यता पत्रों की पुनः समीक्षा की जाकर 24 हजार 827 नये वन अधिकार पत्रों सहित अब तक 4 लाख 36 हजार 619 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया जा चुका है।

● वन अधिकार पत्र धारी वनवासियों को भी किसानों के समान अधिकार देते हुए इस वर्ष किसान न्याय योजना का लाभ दिया गया है।

● राज्य सरकार द्वारा विशेष पहल करते हुए पहली बार 2 हजार 175 सामुदायिक वन संधारण अधिकार ग्राम सभाओं को दिये गये हैं|सामुदायिक वन अधिकार पत्र के रूप में वितरित वन भूमि पर फलदार वृक्षों के रोपण को प्रोत्साहित किया जायेगा।



● राज्य में 52 प्रकार के लघु वनोपज का मूल्य निर्धारित कर संग्रहण किया जा रहा है। चालू सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 112 करोड़ की लागत के 4 लाख 74 हजार क्विंटल लघु वनोपज का संग्रहण किया गया है। ट्राईफेड नई दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज क्रय करने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान है।
राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में कोदो, कुटकी एवं रागी को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अन्य लघु वनोपज की भांति उपार्जित किया जाएगा।

● 12 लाख 50 हजार तेंदू पत्ता संग्राहक परिवारों को आकस्मिक मृत्यु अथवा दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के लिए ”शहीद महेंद्र कर्मा तेंदू पत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’’ प्रारंभ की गई है। वर्ष 2021-22 के बजट में इस हेतु 13 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

● विशेष केन्द्रीय सहायता पोषित स्थानीय विकास कार्यक्रमों हेतु 359 करोड़ तथा आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु 170 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।




tvlnews

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