रायपुर: छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने सोमवार तीसरा बजट पेश किया है| छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में अपनी सरकार का तीसरा बजट पेश किया| बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि,'' ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’’ के मूल मंत्र में समाहित भावनाओं को आगे बढ़ाते हुये आज मैं सदन के समक्ष अपनी सरकार का तीसरा बजट प्रस्तुत कर रहा हूँ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि,अध्यक्ष महोदय, देश-दुनिया समेत छत्तीसगढ़ की सरकार के लिये भी पिछला वर्ष बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा है। कोविड-19 महामारी के संक्रमण से बचाव हेतु लागू लॉकडाउन के कारण राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित रहीं, जिसके कारण राजस्व प्राप्तियों में कमी आयी। महामारी काल में आजीविका के साधनों की कमी के कारण आम जनता को राहत पहुंचाने हेतु कल्याणकारी योजनाओं में अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ी।
भूपेश बघेल ने कहा कि,'' ‘‘हमारी सरकार ने इस दो-तरफा दबाव का दृढ़ता से सामना करते हुए जनता के हित में लगातार कार्य किया और मुझे यह कहते हुये संतोष है कि शासन-प्रशासन की सजगता एवं जनता के प्रयासों से राज्य पर इस आपदा का दुष्प्रभाव कम हुआ। बघेल ने कहा कि,'' ‘मुझे यह कहते हुए गर्व है कि संकट के दौर में भी हमारी सरकार के संवेदनशील और सुसंगत प्रयासों के कारण महात्मा गांधी नरेगा योजना में रोजगार देने तथा मजदूरी भुगतान करने का कीर्तिमान बना। वनोपज खरीदी का राष्ट्रीय कीर्तिमान बना। शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण के लिए किए गए नवाचारों तथा प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी एवं पुनर्वास के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
हमने संक्रमण की रोकथाम तथा उपचार के लिये त्वरित निर्णय लिये। स्वास्थ्य विभाग के लिये 670 करोड़ के अतिरिक्त बजट की तत्काल व्यवस्था की गई। कोरोना संक्रमण की जांच हेतु 6 RT-PCR लैब और 18 TrueNAT लैब की तत्काल स्थापना की गई। मार्च 2020 में शासकीय अस्पतालों में आईसीयू बिस्तर क्षमता केवल 53 थी, जिसकी संख्या बढ़कर 406 बिस्तर हो चुकी है। कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार हेतु 30 कोविड समर्पित अस्पताल तथा 178 कोविड केयर सेन्टर स्थापित किये जाने से मरीजों के उपचार में तेजी आयी व प्रदेश की जनता का मनोबल बढ़ा।
पत्रकारों की दुर्घटनाजन्य आकस्मिक मृत्यु के प्रकरणांे में दी जाने वाली सहायता राशि को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जायेगा।
पत्रकारों को सहायता
● पत्रकारों की दुर्घटनाजन्य आकस्मिक मृत्यु के प्रकरणांे में दी जाने वाली सहायता राशि को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जायेगा।
महिलाओं और बच्चों को पोषण और सुरक्षा
● मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत विगत 1 वर्ष में 99 हजार बच्चे कुपोषण से मुक्त किये जा चुके हैं। वजन त्यौहार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में कुपोषण का स्तर 26.33 प्रतिशत था जो घटकर वर्ष 2019 में 23.37 प्रतिशत हो चुका है।
● लॉकडाउन के दौरान कुपोषित महिलाओं, शिशुवती महिलाओं एवं शाला त्यागी किशोरियों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों के लगभग 24 लाख 38 हजार हितग्राहियों को भी घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट फूड वितरित किया गया।
● महिलाओं के पोषण में सुधार के लिए द्वितीय संतान बालिका के जन्म पर राज्य द्वारा 5 हजार रूपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जायेगी। इसके लिये नवीन कौशल्या मातृत्व योजना प्रारंभ की जायेगी।
● बच्चों की देखरेख सुरक्षा एवं संरक्षण संबंधी कार्याें के लिये एकीकृत बाल संरक्षण योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 47 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● विशेष पोषण आहार योजना में 732 करोड़, आंगनबाड़ियों का सुधार एवं निर्माण योजना में 39 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
बुजुर्गाें एवं दिव्यांगजनों को सहायता
● निराश्रितों एवं बुजुर्गों को मासिक पेंशन हेतु सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में 343 करोड़, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में 190 करोड़ एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजना में 170 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
● इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 70 करोड़ एवं सुखद सहारा पेंशन योजना में 98 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ।
● इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना में 12 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● दिव्यांगजनों हेतु माना स्थित विभिन्न संस्थाओं के जर्जर भवनों के स्थान पर सर्वसुविधा युक्त एकीकृत नवीन भवन के निर्माण हेतु नवीन मद में 2 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के निराकरण हेतु हेल्प लाइन की स्थापना एवं उनके भरण-पोषण हेतु नवीन मद में 75 लाख का प्रावधान रखा गया है।
● सभी पांच संभागीय मुख्यालयों पर आदर्श पुनर्वास केन्द्र की स्थापना हेतु नवीन मद में 1 करोड़ 50 लाख का प्रावधान रखा गया है।
● मानसिक रोग से उपचारित व्यक्तियों के पुनर्वास एवं प्रशिक्षण के लिए रायपुर एवं दुर्ग में ‘हॉफ वे होम’ की स्थापना हेतु 3 करोड़ 13 लाख का प्रावधान किया गया है।
● तृतीय लिंग के व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु आश्रम सह पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जायेगा। इसके लिये बजट में 76 लाख का प्रावधान रखा गया है। यह देश में अपनी तरह का पहला केन्द्र होगा।
शहरों का आधुनिकीकरण
● नगरीय क्षेत्रों में सुशासन की स्थापना एवं आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था हेतु राज्य सरकार द्वारा कई अभिनव पहल की गई है।
● विभिन्न शासकीय सेवाओं की घर पहुंच सेवा के लिये मुख्यमंत्री मितान योजना में 10 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत 14 नगर निगमों में 60 मोबाइल एम्बुलेन्स एवं दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से निःशुल्क परीक्षण, उपचार एवं दवाई वितरण की सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2021-22 के बजट में भी 50 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● यह गौरव का विषय है कि छत्तीसगढ़ को देश का स्वच्छतम राज्य होने का पुरस्कार लगातार दो वर्ष से प्राप्त हो रहा है। इस सफलता का श्रेय स्वच्छता दीदियों को समर्पित करते हुए उनके मानदेय को 5 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रूपये किया गया है।
● एस.एल.आर.एम. सेन्टर्स का उन्नयन करते हुए नगरीय निकायों में 377 गोधन न्याय सह गोबर क्रय केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। इससे आजीविका के अन्य साधन भी उपलब्ध हो सकेंगे।
● शहरी गरीबों को काबिज भूमि का पट्टा देने का निर्णय लिया गया है, इस निर्णय से उनके मकान निर्माण का मार्ग सुगम हुआ है।
● शहरी निर्धन परिवारों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने हेतु ”मोर जमीन-मोर मकान“ तथा ”मोर मकान-मोर चिन्हारी“ योजनाओं में किये गये कार्याें को भारत सरकार द्वारा जनवरी 2021 में पुरस्कृत किया गया है। सबके लिए आवास योजना के तहत 2021-22 में 457 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● अमृत योजना में शामिल 9 शहरों में दिसंबर 2018 तक स्वच्छ पेयजल हेतु 23 हजार 876 नल कनेक्शन दिये गये थे। यह संख्या अब बढ़कर डेढ़ लाख हो चुकी है। अमृत मिशन योजना के लिए इस वर्ष 220 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● नगरीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास कार्यों के लिए 482 करोड़, तथा जल आवर्धन योजनाओं के लिए 120 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में सम्मिलित 17 नवीन ग्रामों में जल प्रदाय व्यवस्था हेतु बजट में प्रावधान किया गया है।
ग्राम विकास: आजीविका एवं मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता
● महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत लॉकडाउन के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करते हुये मई एवं जून 2020 में प्रतिदिन औसतन 24 लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इस वर्ष 2 हजार 590 करोड़ की मजदूरी का भुगतान किया गया। 12 करोड़ 21 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन करके ग्रामीणों को आजीविका प्रदाय किया गया। इस योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 16 सौ 03 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 20 लाख से अधिक गरीब परिवार की महिलाओं को सवा लाख से अधिक स्व सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा गया है। योजना हेतु वर्ष 2021-22 में 4 सौ करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
● उद्यमिता एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिये सभी निर्माण विभागों में स्नातक बेरोजगारों को ‘‘ई-श्रेणी’’ में पंजीयन की सुविधा दी गई है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण आवेदकों को भी ई श्रेणी में पंजीयन हेतु पात्रता दी गई है।
● रूर्बन मिशन योजना में 16 जिलों के 18 क्लस्टर के 118 ग्राम पंचायतों में शहरी सुविधायें उपलब्ध कराते हुये सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु गतिविधियां प्रारंभ की गयी है। भारत सरकार से जारी रूर्बन रैंकिंग के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य प्रथम स्थान पर है।
● राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी के अंतर्गत 1 हजार 385 नालों पर 71 हजार 831 कार्य पंचायत विभाग द्वारा स्वीकृत किये गये थे। इनमें से 51 हजार 742 कार्य पूर्ण भी हो चुके हैं। 9 हजार 133 गोठान स्वीकृत किये गए थे, जिनमें से 5 हजार 14 गोठानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। 4 हजार 908 चारागाह निर्माण स्वीकृत किये गये थे, जिनमें से 2 हजार 904 चारागाह पूर्ण हो चुके हैं।
● कैम्पा मद से वन क्षेत्र में स्थित 01 हजार 796 नालों का चयन कर 07 लाख हेक्टेयर जल ग्रहण क्षेत्र में विभिन्न कार्य वर्ष 2020-21 में स्वीकृत किये गये हैं। 2021-22 में भी 392 करोड़ की लागत से 441 नालों का चयन कर जल संरक्षण कार्य किया जाएगा है।
● प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रारंभ से अब तक 10 लाख 97 हजार स्वीकृत आवासों में से 70 प्रतिशत आवास निर्माण पूर्ण हो चुके हैं। योजना के क्रियान्वयन, कार्य निष्पादन एवं मूल्यांकन की राष्ट्रीय सूचकांक तालिका में छत्तीसगढ़ राज्य द्वितीय स्थान पर है। इस योजना हेतु वर्ष 2021-22 के बजट में 15 सौ करोड़ का प्रावधान किया गया है। ।
● स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के द्वितीय चरण में 1282 ग्रामों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन एवं सामुदायिक शौचालय बनाने का कार्य किया गया है। गोबर.धन योजना के अंतर्गत 199 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की गई है। योजना हेतु इस वर्ष 4 सौ करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
● ओडीएफ प्लस पंचायतों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ राज्य को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्याें के लिये राज्य को 68 करोड़ 42 लाख का परफार्मेंस ग्रांट प्राप्त हुआ है।
● प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 34 हजार 835 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण कर 10 हजार 316 बसाहटों को जोड़ा जा चुका है। आगामी तीन वर्षोें के लिये राज्य को 5 हजार 612 किलोमीटर की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। योजना हेतु इस वर्ष 2 हजार 67 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
● किसानों को खेतों तक आवागमन की सुविधा देने के लिये कच्चे धरसा को पक्के मार्ग में बदलने के लिये मुख्यमंत्री धरसा विकास योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिये बजट में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
आधुनिक प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन
● राज्य के नागरिकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्घ कराने के लिए नई सुसंगत प्रणालियों तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
● सामान्य सेवा केन्द्रांे द्वारा शासकीय सेवाओं के अतिरिक्त टेलीमेडिसिन, टेलीकिसान, बैंक मित्र, टेली-लॉ, ग्रामीण ई-स्टोर, ई-स्टाम्प रजिस्ट्रेशन, रंगीन मतदाता परिचय पत्र, आधार पंजीयन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, पेंशनधारियों का आधार सीडिंग जैसी सेवाएं प्रदान की जा रही है।
● इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के विस्तार के लिये 235 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है।
● खनिजों का अवैध उत्खनन रोकने के लिये आधुनिक स्पेस टेक्नॉलॉजी एवं रिमोट सेंसिंग इमेज के माध्यम से माइनिंग सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया है।