रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित दो आरक्षण संशोधन विधेयकों पर राजभवन और सरकार के बीच टकराव गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा,'''राज्यपाल पहले आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर को तैयार थीं। लेकिन भाजपा वालों ने राज्यपाल पर आरक्षण को 76% तक बढ़ाने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करने का दबाव बना कर रखा है"|
छत्तीसगढ़ में आरक्षण पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा,'' वो (भाजपा) आरक्षण के विरोधी हैं। अजय चंद्राकर ने कहा कि मैं पार्टी से बंधा हुआ हूं नहीं तो मैं आरक्षण का विरोधी हूं। यही हाल भाजपा के हर नेता का है। किसी भी आरक्षण की बात हो, वो (भाजपा) देने के लिए तैयार नहीं है|
मुख्यमंत्री ने कहा,''राज्यपाल ने पहले कहा कि मैं तुरंत हस्ताक्षर करूंगी पर वो अब किंतु-परंतु कर रही हैं, इसका मतलब है कि वो चाहती थी मगर भाजपा वालों ने दबाव बना कर रखा है"
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में 1 दिसंबर को 76 प्रतिशत आरक्षण देने का विधेयक पारित कर दिया गया था। 76 फीसदी तक बढ़ाने वाले आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा था कि,''मैं शासन और विपक्ष के लोगों को SC, ST और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण को 58% से 76% तक बढ़ाने के लिए धन्यवाद देती हूं। मैं इस विधेयक पर सोमवार 5 दिसम्बर 2022 तक (हस्ताक्षर) कर दूंगी|
छत्तीसगढ़ सरकार ने ओबीसी, एससी/एसटी कोटा बढ़ाने के लिए पारित किया विधेयक
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार, 1 दिसंबर 2022 को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने वाले दो नये विधेयक पारित हो गए है| छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के लिए उनकी आबादी के अनुपात के अनुसार प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आरक्षण बढ़ाने वाले दो संशोधन विधेयक पारित किए।
राज्यपाल अनुसुइया उइके ने विधेयक का किया था स्वागत
इन दोनों विधेयकों में आदिवासी वर्ग-ST को 32%, अनुसूचित जाति-SC को 13% और अन्य पिछड़ा वर्ग-OBC को 27% आरक्षण का अनुपात तय हुआ है। सामान्य वर्ग के गरीबों को 4% (4 %- 10% ) आरक्षण देने का भी प्रस्ताव है। इसको मिलाकर छत्तीसगढ़ में 76% आरक्षण हो जाएगा। इसे राज्यपाल को भेजा गया था।