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23 अगस्त 2026

भागवत का बयान 'मुँह में राम- बगल में छुरी' वाला: मायावती बोली- संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर

लखनऊ: आरएसएस प्रमुख का कल का ताजा बयान वास्तव में लोगों को न केवल अविश्वसनीय है बल्कि मुँह में राम बगल में छुरी ही ज़्यादा लगत??? है।साथ ही, डरा-धमका कर व लालच आदि देकर किसी का भी धर्म परिवर्तन कराना…

भागवत का बयान 'मुँह में राम- बगल में छुरी' वाला: मायावती बोली- संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर
भागवत का बयान 'मुँह में राम- बगल में छुरी' वाला: मायावती बोली- संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर | फ़ोटो: TVL News

लखनऊ:  आरएसएस प्रमुख का कल का ताजा बयान वास्तव में लोगों को न केवल अविश्वसनीय है बल्कि मुँह में राम बगल में छुरी ही ज़्यादा लगत??? है।साथ ही, डरा-धमका कर व लालच आदि देकर किसी का भी धर्म परिवर्तन कराना अनुचित व अवैध। लेकिन एक सोची-समझी रणनीति व साजिश के तहत् इसकी आड़ में इसे जबरन हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा बनाना तथा पूरे मुस्लिम समाज को शक की नजरों से देखना यह कतई भी उचित नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के बयान कि हिंदू और मुसलमान दोनों का डीएनए एक है पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का बयान 'मुंह में राम बगल में छुरी' जैसा है। संघ और भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। 




मोहन भागवत के बयान 'सभी भारतीयों का डीएनए एक है' पर बसपा की अध्यक्ष मायावती ने कहा,'' आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कल एक कार्यक्रम में भारत में सभी धर्मों के लोगों का डीएनए एक होने की बात किसी के भी गले के नीचे आसानी से नहीं उतरने वाली है। आरएसएस और बीजेपी एंड कंपनी के लोगों तथा इनकी सरकारों की कथनी व करनी में अंतर सभी देख रहे हैं|




प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा,''आरएसएस के सहयोग और समर्थन के बिना बीजेपी का अस्तित्व कुछ भी नहीं है। फिर भी आरएसएस अपनी कही गई बातों को बीजेपी और इनकी सरकारों से लागू क्यों नहीं करवा पा रही है?., मायावती ने कहा,' केंद्र और उत्तर प्रदेश सहित देश के जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें चल रही हैं, वे भारतीय संविधान की सही मानवतावादी मंशा के मुताबिक चलने की बजाए ज़्यादातर आरएसएस के संकीर्ण एजेंडे पर चल रही हैं, ये आम चर्चा है|




बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा,''उत्तर प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा अधिकांश जातिगत, धार्मिक व राजनीतिक द्वेष की भावना से अभी तक जिन मामलों में जिनकी संपत्ति ज़ब्त व ध्वस्त की गई है, उनमें ज़्यादातर मुस्लिम लोग प्रभावित हुए हैं, ऐसा मुस्लिम समाज व आम लोगों का मानना है|




प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा,केन्द्र में व उत्तर प्रदेश सहित देश के जिन भी राज्यों में बीजेपी की सरकारें चल रही हैं वे भारतीय संविधान की सही मानवतवादी मंशा के मुताबिक चलने के बजाय ज्यादातर आर.एस.एस. के संकीर्ण एजेण्डे पर ही चल रही हैं, जिस कारण समाज व देश में तथा आर्थिक क्षेत्र में भी हर तरफ बेचैनी, अराजकता, हिंसा, तनाव एवं अफरातफरी का ही वातावरण व्याप्त है, जो अति-दुःखद व स्पष्ट तौर पर यह जनहित के विरूद्ध भी है।




उन्होंने कहा,''ऐसे में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा कल गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में सभी धर्मों के लोगों का डीएनए एक होने व भीड़ हिंसा हिन्दुत्व के खिलाफ आदि होने की जो बात कही गई है वह किसी के भी गले के नीचे से आसानी से उतरने वाली नहीं है, क्योंकि आरएसएस व बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोगों की तथा इनकी सरकारों की भी कथनी व करनी में अन्तर सभी देख रहे हैं।



उन्होंने कहा,''साथ ही, आरएसएस प्रमुख देश की राजनीति को विभाजनकारी बताकर जो कोस रहे हैं यह ठीक नहीं है, जबकि सच्चाई तो यह है कि खासकर जिस बीजेपी व उनकी सरकारों को, वे लोग, जनहित व देशहित की खास परवाह किये बिना, आँख बन्द करके समर्थन देते चले आ रहे हैं उसी का परिणाम है कि यहाँ जातिवाद, राजनीतिक द्वेष, साम्प्रदायिक हिंसा आदि का जहर सामान्य जनजीवन को त्रस्त किये हुये है।



मायावती ने कहा,''इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित है कि बी.एस.पी. को अगर लगता कि बीजेपी सही में आरएसएस के शिकंजे से निकलकर व संवैधानिक सोच के मुताबिक चलकर सर्वसमाज एवं सभी धर्मों के लोगों के हित में काम कर सकती है तो फिर काफी पहले सन् 1995 में ही बी.एस.पी. इनका बाहरी समर्थन करा कर उत्तर प्रदेश की सरकार से इस्तीफा नहीं देती जबकि उस समय सपा की जाति व हिंसावादी राजनीति से तंग आकर कांग्रेस, बीजेपी व अन्य सभी विरोधी पार्टियाँ बीएसपी की सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थीं। और फिर न ही सन् 2003 में इनके गलत इरादों को भॉपकर बी.एस.पी. इनसे अलग होती। इस प्रकार से बी.एस.पी. इनकी गलत व संकीर्ण नीतियों की सर्वधर्म व सर्वसमाज के व्यापक हित में हमेशा ही खुलकर विरोध करती रही है।




उन्होंने कहा,''कहने का तात्पर्य यह है कि कुल मिलाकर आर.एस.एस. के सहयोग व समर्थन के बिना बीजेपी का अस्तित्व कुछ भी नहीं है। फिर भी आरएसएस अपनी कही गई बातों को बीजेपी व इनकी सरकारों से लागू क्यों नहीं करवा पा रही है जो इन्होंने कल कही है, यहाँ यह भी गम्भीरता से सोचने की बात है। इसीलिए इससे यह स्पष्ट होता है कि आरएसएस की कथनी व करनी में काफी जमीन-आसमान का अन्तर है और खासकर जातिवाद, साम्प्रदायिक व धार्मिकता आदि के मामले में ये लोग जो कहते हैं करते ठीक उसका उल्टा हैं, जो यह सभी को मालूम है।




मायावती ने कहा,''संक्षेप में अब मेरा यही कहना है कि आरएसएस प्रमुख का कल दिया गया ताजा बयान वास्तव में लोगों को न केवल अविश्वसनीय लगता हैं बल्कि मुँह में राम बगल में छुरी ही ज्यादा लगता है। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर जब तक आरएसएस-बीजेपी एण्ड कम्पनी व इनकी सरकारों की संकीर्ण सोच व कार्यशैली आदि में सही सर्वसमाज-हितैषी संवैधानिक परिवर्तन नहीं आएगा, तो तब तक इनकी बातों पर खासकर मुस्लिम समाज द्वारा विश्वास करना बहुत मुश्किल लगता है।




उन्होंने कहा,''इसके साथ-साथ यहाँ मैं "धर्म परिवर्तन" के मुद्दे को भी लेकर यह कहना चाहूंगी कि देश में डरा-धमका कर व लालच आदि देकर किसी का भी जबरन धर्म परिवर्तन कराना यह पूरे तौर से अवैध है तथा ऐसे मामलों की सही जाँच कराके इसके दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही होनी चाहिये।




मायावती ने कहा,'' इसके अलावा यदि इसके पीछे कोई भी देश विरोधी साजिश है तो फिर ऐसे लोगों के विरूद्ध तो काफी सख्त कानूनी शिकंजा कसना चाहिये, लेकिन एक सोची-समझी रणनीति व साजिश के तहत् इसकी आड़ में इसे जबरन हिन्दु-मुस्लिम मुद्दा बनाना तथा पूरे मुस्लिम समाज को शक की नजरों से देखना यह कतई भी उचित नहीं है और बी.एस.पी. फिर इसका डटकर विरोध भी करेगी क्योंकि इससे दोनों धर्मों के लोगों में आपसी नफरत पैदा होगी जो यह देशहित में ठीक नहीं है।





उन्होंने कहा,''इसके साथ ही यह कहना है कि धर्म परिवर्तन की आड़ में देश को नुकसान पहुँचाने की यहाँ काफी समय से साजिश चल रही थी तो यहाँ इसको लेकर एक यह भी सवाल पैदा होता है कि इतने लम्बे समय से अपने देश की खुफिया जाँच ऐजेन्सियाँ अभी तक क्या कर रही थी और अब इसको लेकर जो भी कार्यवाही चल रही है यह तो बहुत पहले ही हो जानी चाहिये थी जो नहीं की गयी तो इससे इसके पीछे हमें इनका राजनैतिक स्वार्थ कुछ ज्यादा नजर आ रहा है और ऐसा लगता है कि इसे अब ये देश के कुछ राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव में अपने कमजोरियों पर पर्दा डालने के लिए राजनैतिक रंग देना चाहते है। और इनका यदि ऐसा कोई षड़यन्त्र है तो फिर यह अपने देश के लिए अति दुर्भाग्यपूर्ण व अति-निन्दनीय भी है तथा इस मामले में देश की जनता जरूर सावधान रहे।




मायावती ने कहा,''इसके अलावा, मैं यह भी कहना चाहूँगी कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अधिकाशः जातिगत, धार्मिक व राजनैतिक द्वेष की भावना से अभी तक जिन मामलों में भी जिनकी सम्पत्ति जब्त व ध्वस्त की गयी है उनमें ज्यादातर मुस्लिम समाज के लोग प्रभावित हुये है, ऐसा मुस्लिम समाज व आम लोगों का भी मानना है। इससे इनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, जो ठीक नहीं है। इस सम्बन्ध में बी.एस.पी. का यह भी कहना है कि यदि इसमें ऐसी कुछ भी सच्चाई है तो यह उचित नहीं हो रहा है जो यह सरकार की कार्यशैली पर अनेकों सवाल खड़े करता है तथा बी.एस.पी. इसकी कड़े शब्दों में निन्दा भी करती है





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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 5 जुलाई 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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