मुख्य सामग्री पर जाएँ
25 अगस्त 2026

यूपी शिक्षक संघ का दावा- 'पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से 1621 कर्मचारियों की मौत, योगी सरकार ने नकारा, कहा- 'सिर्फ 3 शिक्षकों की हुई मौत'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों संपन्न हुए पंचायत चुनावों में ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों की मौत के आंकड़ों पर प्रदेश सरकार और शिक्षक संगठनों की तरफ से अलग-अलग आंकड़े जारी हुए हैं। शिक्षक संगठनों का…

यूपी शिक्षक संघ का दावा- 'पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से 1621 कर्मचारियों की मौत, योगी सरकार ने नकारा, कहा- 'सिर्फ 3 शिक्षकों की हुई मौत'
यूपी शिक्षक संघ का दावा- 'पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से 1621 कर्मचारियों की मौत, योगी सरकार ने नकारा, कहा- 'सिर्फ 3 शिक्षकों की हुई मौत' | फ़ोटो: TVL News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों संपन्न हुए पंचायत चुनावों में ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों की मौत के आंकड़ों पर प्रदेश सरकार और शिक्षक संगठनों की तरफ से अलग-अलग आंकड़े जारी हुए हैं। शिक्षक संगठनों का दावा है,'पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अन्य विभागीय कर्मियों की कोरोना से मौत हुई है। शिक्षक संगठनों ने सभी के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा राशि और आश्रितों को सरकारी नौकरी की मांग की है। हालांकि यूपी सरकार के मुताबिक यह आंकड़ा महज 3 ही है।




उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ ने दावा किया है कि अब तक 1621 शिक्षकों की मौत हो चुकी है, जिन्होंने पंचायत चुनाव में ड्यूटी की थी। इससे पहले 28 अप्रैल को तीन चरणों के चुनाव के बाद संक्रमित होकर मृत हुए 706 शिक्षकों की सूची संघ ने राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी थी|



संघ ने 16 मई को मुख्यमंत्री को यह सूची भेजते हुए चुनाव ड्यूटी में गुजरे हुए सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों व कर्मचारियों को एक करोड़ की आर्थिक सहायता, उनके परिजनों को नौकरी दिए जाने सहित आठ मांगें की हैं| प्राथमिक शिक्षक संघ ने जो सूची जारी कर दावा किया है, जिसके अनुसार प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,621 शिक्षकों, अनुदेशकों,  शिक्षा मित्रों व कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है. इन सभी लोगों ने पंचायत चुनाव में ड्यूटी की थी| इस सूची में जान गंवाने वाले शिक्षकों के नाम, उनके विद्यालय के नाम, पदनाम, ब्लॉक व जनपद का नाम, मृत्यु की तिथि और दिवंगत शिक्षक के परिजन का मोबाइल नंबर भी दिया गया है|



उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने शिक्षक संगठनों के दावे को गलत ठहराते हुए कहा है कि स्थापित मानकों के हिसाब से देखें तो चुनाव ड्यूटी के दौरान सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत हुई है। वहीं विभाग के सचिव सत्य प्रकाश की तरफ से जारी प्रेस नोट में भी मतगणना में लगे कर्मचारियों के निवास से ड्यूटी स्थल तक पहुंचने और फिर ड्यूटी समाप्त कर वापस घर पहुंचने के दौरान 3 कर्मचारियों की मौत की बात कही गई है। मृतक के परिजन को अनुग्रह राशि का भुगतान किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है।





सरकारी नोटिस





इससे पहले  उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचायत चुनावों ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों और कर्मचारियों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई है। उन्होंने बताया कि पत्र के साथ एक सूची भी संलग्न की गई है जिसके मुताबिक आजमगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 68 शिक्षकों-कर्मचारियों की मृत्यु हुई है। प्रदेश के 23 ऐसे जिले हैं, जहां 25 से अधिक शिक्षकों-कर्मचारियों की संक्रमण से मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप इन सभी मृत शिक्षकों/शिक्षामित्रों तथा अन्य कर्मचारियों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।





'कम से कम 200 शिक्षामित्रों की गई जान'

इस बीच, उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कम से कम 200 शिक्षामित्रों की कोविड-19 से मृत्यु हुई है। इसके अलावा 107 अनुदेशकों और 100 से ज्यादा रसोइयों की भी इस संक्रमण के कारण मौत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर कायदे से पड़ताल कराए तो यह संख्या काफी ज्यादा हो सकती है।





'कोरोना से सिर्फ 3 शिक्षकों की हुई मौत'

राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने बताया कि निर्धारित मानकों के आधार पर जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे केवल तीन शिक्षक ही थे, जिनकी चुनाव ड्यूटी के दौरान मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव कर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत के मामले में उनके परिजन को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति से संबंधित चुनाव आयोग की स्पष्ट नियमावली है। इसके मुताबिक अगर किसी कर्मी की चुनाव ड्यूटी के लिए रवाना होने के बाद से अपनी इस जिम्मेदारी के मुकम्मल होने के बीच मृत्यु होती है तभी उसे चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु माना जाता है।'





सरकार मुआवजा देने में कर रही दांवपेच: दिनेश शर्मा

प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव ड्यूटी करने या उसके कुछ ही दिनों बाद मरने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मियों को मुआवजा देने में दांवपेच कर रही है। उन्होंने इल्जाम लगाया कि सरकार के शासनादेश की भाषा इस तरह लिखी गई है जिससे बहुत बड़ी संख्या में पात्र परिजन इस मुआवजे से महरूम रह जाएंगे। शर्मा ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि कोविड-19 के लक्षण 24 घंटे में ही नजर नहीं आते बल्कि उनके सामने आने में कुछ दिनों का समय लगता है लेकिन सरकार ने अपने शासनादेश में कहा है कि पंचायत चुनाव ड्यूटी करने के 24 घंटे के अंदर जिन कर्मचारियों की मृत्यु होगी उनके परिजन को ही मुआवजा दिया जाएगा। यह सरासर अन्याय है और सरकार को संवेदनशील तरीके से सोच कर निर्णय लेना चाहिए।





tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 19 मई 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।