इस्लामाबाद: देश में सियासी संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्र को संब???धित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि,''मैं भाग्यशाली हूं कि भगवान ने मुझे सब कुछ दिया- प्रसिद्धि, धन, सब कुछ। मुझे आज किसी चीज की ज़रूरत नहीं है, उसने मुझे सब कुछ दिया जिसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। पाकिस्तान मुझसे सिर्फ 5 साल बड़ा है, मैं आजादी के बाद पैदा होने वाले देश की पहली पीढ़ी से हूं|
प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि,'''जब मैंने 25 साल पहले राजनीति शुरू की थी तब कहा था कि न मैं किसी के सामने झुकूंगा, न अपनी कौम को किसी के सामने झुकने दूंगा। अपनी कौम को किसी की गुलामी नहीं करने दूंगा| जब मैं राजनीति में आया, तो मेरे तीन उद्देश्य थे - न्याय, मानवता और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना|
खान ने कहा कि,''8 मार्च को एक विदेशी देश से हमें मैसेज आता है जिसमें बहाना दिया जाता है कि वे पाकिस्तान पर क्यों गुस्सा हैं। और अगर इमरान खान को हटा दिया जाता है तो पाकिस्तान को माफ कर दिया जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तान को मुश्किल वक़्त का सामना करना पड़ेगा|
प्रधानमंत्री ने कहा कि,रविवार को वोट(पाकिस्तान नेशनल असेंबली में) डाली जाएगी। इस रविवार को इस मुल्क़ का फैसला होने वाला है कि ये मुल्क़ अब किस तरफ जाएगा। क्या वही गुलाम नीति, भ्रष्ट लोग जिन पर 30 साल से भ्रष्टाचार के आरोप हैं| इमरान खान ने कहा कि,''मुझे किसी ने कहा कि आप इस्तीफा दे दीजिए। जो मेरे साथ क्रिकेट खेलते थे उन्होंने देखा है कि मैं आखिरी गेंद तक मुकाबला करता हूं। मैंने हार कभी ज़िंदगी में नहीं मानी। जो भी नतीजा होगा उससे बाद मैं और ज्यादा ताकतवर होकर सामने आऊंगा, जो भी नतीजा हो|
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पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने कहा कि,''मैं सत्ता में आया तो हमने आजाद फॉरेन पॉलिसी का फैसला किया। सबसे ज्यादा हिंदुस्तान में मैं रहा। क्रिकेट की वजह से वहां मैं बहुत लोकप्रिय था। अमेरिका और यूरोप को भी मैं जानता था। मैंने वॉर इन टेरर पर जनरल मुशर्रफ का विरोध किया। मैंने अमेरिका और इंग्लैंड का भी कभी विरोध नहीं किया। 9/11 में कोई पाकिस्तानी शामिल नहीं था। मुशर्रफ ने गलती ये की कि हम अमेरिका के हिमायती और सोवियत रूस के खिलाफ हो गए।
जैसे ही वो जिहाद खत्म हुई। सोवियत यूनियन हारी। दो साल बाद अमेरिका हम पर पाबंदियां लगा देता है। फिर 9/11 होता है। हमने हिमायत की और बदले में हमें क्या मिला। क्या किया नाटो ने? हमारे 80 हजार लोग मारे गए।
इमरान खान ने कहा कि अमेरिका का हिमायती बनना परवेज मुशर्रफ की सबसे बड़ी गलती थी। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान ने कई कुर्बानियां दी जिसका श्रेय हमारे मुल्क को नहीं मिला। पिछली सरकारों के कार्यकाल में हमारे मुल्क में चार सौ ड्रोन अटैक हुए जिसकी निंदा तक नहीं की गई। जब मैंने इन हमलों के विरोध में धरना दिया तो मुझे तालिबान खान कहा गया। मैं आज ये बातें इसलिए बता रहा हूं ताकि आपको पता चले कि इन लोगों की विदेश नीतियां कैसी रही हैं।