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23 अगस्त 2026

अजित ने कड़े संघर्ष के बाद फिल्मों में बनाई पहचान,

वर्ष 1950 में निर्देशक के. अमरनाथ ने उन्हें सलाह दी कि वह अपना फिल्मी नाम छोटा कर ले। इसके बाद उन्होंने अपना फिल्मी नाम ..हामिद अली खान ..की जगह पर अजित रखा और के.अमरनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बे…

अजित ने कड़े संघर्ष के बाद फिल्मों में बनाई पहचान,
अजित ने कड़े संघर्ष के बाद फिल्मों में बनाई पहचान, | फ़ोटो: TVL News


वर्ष 1950 में निर्देशक के. अमरनाथ ने उन्हें सलाह दी कि वह अपना फिल्मी नाम छोटा कर ले। इसके बाद उन्होंने अपना फिल्मी नाम ..हामिद अली खान ..की जगह पर अजित रखा और के.अमरनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बेकसूर’ में बतौर नायक काम किया।


वर्ष 1957 मे बीर. आर. चोपड़ा की की फिल्म ‘नया दौर’ में वह ग्रामीण की भूमिका मे दिखाई दिये। इस फिल्म में उनकी भूमिका ग्रे शेडस वाली थी।


यह पिल्??? पूरी तरह अभिनेता दिलीप कुमार पर केन्द्रित थी फिर भी वह दिलीप कुमार जैसे अभिनेता की उपस्थिति मे अपने अभिनय की छाप दर्शको के बीच छोड़ने मे कामयाब रहे।


नया दौर की सफलता के बाद अजित ने यह निश्चय किया कि वह खलनायकी में ही अपने अभिनय का जलवा दिखाएंगे।


वर्ष 1960 मे प्रदर्शित फिल्म ‘मुगले आजम’ में एक बार फिर से उनके सामने हिन्दी फिल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे लेकिन अजित ने अपनी छोटी सी भूमिका के जरिये दर्शको की वाहवाही लूट ली।


वर्ष 1973 अजित के सिने कैरियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। उस वर्ष उनकी जंजीर, यादों की बारात, समझौता, कहानी किस्मत की और जुगनू जैसी फिल्में प्रदर्शित हुयी


जिन्होंने बॉक्स आफिस पर सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित किये। इन फिल्मों की सफलता के बाद अजित ने उन उंचाइयों को छू लिया जिसके लिये वह अपने सपनों के शहर मुंबई आये थे।


अजित के पसंद के किरदार की बात करें तो उन्होनें सबसे पहले अपना मनपसंद और कभी भुलाया नहीं जा सकने वाला किरदार निर्माता निर्देशक सुभाष घई की 1976 मे प्रर्दशित फिल्म कालीचरण में निभाया।


फिल्म कालीचरण में उनका निभाया किरदार ..लायन.. तो उनके नाम का पर्याय ही बन गया था। फिल्म में उनका संवाद ..सारा शहर मुझे लायन के नाम से जानता है


.. आज भी बहुत लोकप्रिय है और गाहे बगाहे लोग इसे बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा उनके .. लिली डोंट बी सिली.. और मोना डार्लिग जैसे संवाद भी सिने प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हुये।


फिल्म कालीचरण की कामयाबी के बाद अजित के सिने कैरियर में जबरदस्त परिवर्तन आया और वह खलनायकी की दुनिया के बेताज बादशाह बन गये।


इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और अपने दमदार अभिनय से दर्शको की वाहवाही लूटते रहे। खलनायक की प्रतिभा के निखार में नायक की प्रतिभा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


वर्ष 1950 में निर्देशक के. अमरनाथ ने उन्हें सलाह दी कि वह अपना फिल्मी नाम छोटा कर ले। इसके बाद उन्होंने अपना फिल्मी नाम ..हामिद अली खान ..की जगह पर अजित रखा और के.अमरनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बेकसूर’ में बतौर नायक काम किया।


 वर्ष 1957 मे बीर. आर. चोपड़ा की की फिल्म ‘नया दौर’ में वह ग्रामीण की भूमिका मे दिखाई दिये। इस फिल्म में उनकी भूमिका ग्रे शेडस वाली थी।


 यह पिल्म पूरी तरह अभिनेता दिलीप कुमार पर केन्द्रित थी फिर भी वह दिलीप कुमार जैसे अभिनेता की उपस्थिति मे अपने अभिनय की छाप दर्शको के बीच छोड़ने मे कामयाब रहे।


 नया दौर की सफलता के बाद अजित ने यह निश्चय किया कि वह खलनायकी में ही अपने अभिनय का जलवा दिखाएंगे। 



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यह रिपोर्ट 27 जनवरी 2025 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 10 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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