बस्ती जिले के चर्चित गोसैसीपुर हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने 15 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर 30,97,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें 7 साल 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह घटना 10 फरवरी 2024 को कलवारी क्षेत्र के गोसैसीपुर गांव में हुई थी, जहां भूमि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था।
अभियोजन के अनुसार, गोसैसीपुर गांव में राममिलन चौधरी और अनुसूचित जाति के हरिशंकर उर्फ रावण के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद था। 10 फरवरी 2024 को दोपहर 1 बजे यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। हरिशंकर, सूर्य प्रकाश उर्फ जगलर, रामदास, अंगद, चंदन, मनोज, साजेंद्र उर्फ सचिंद्र, बदरेआलम, वीरेंद्र कुमार, राधेश्याम, सत्यराम, राज, कलावती देवी, रामनरेश और उदयशंकर उर्फ सोनू ने एकजुट होकर राममिलन पर हमला किया। सरसों के खेत में घेरकर लाठी, फरसा और भाले से किए गए इस हमले में राममिलन की मौत हो गई। बचाव में आए उनके बेटे विशाल का पैर काट दिया गया, जिससे वह जीवन भर के लिए दिव्यांग हो गया, और उनकी बहन माला देवी को भी गंभीर चोटें आईं। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की। फास्ट ट्रैक कोर्ट में 15 महीने की सुनवाई के दौरान 110 तारीखें लगीं। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जय गोविंद सिंह और कमलेश चौधरी ने ठोस साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिसके सामने बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं। कोर्ट ने जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी और विशाल की मां गीता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।
रिपोर्ट –
वेदप्रकाश चौधरी