भोपाल: मध्यप्रदेश में 'शिवराज सरकार' रहेगा या कमलनाथ के वापस लौटने की कोई गुंजाइश बनेगी, इसके लिये उपचुनाव के नतीजे बेहद अहम हैं| बीजेपी-कांग्रेस दोनों का दावा है कि वो सारी सीटें बटोर लेंगे हालांकि अगर एग्जिट पोल के नतीजे संकेत हैं तो इससे साफ है कि बीजेपी सरकार बचाने में कामयाब हो जाएगी|
मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतगणना का काम मंगलवार 10 नवंबर को 19 जिला मुख्यालयों में होने वाला है। कोरोना संक्रमण के लिए तय की गई गाइड लाइन का पालन करते हुए मतगणना का कार्य संपादित कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है|
उपचुनाव के मतगणना से पहले सोमवार शाम कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा,'' मध्यप्रदेश में संपन्न 28 उपचुनावो का परिणाम सामने आने वाला है। यह चुनाव जनता का चुनाव था ,जनता ने खुद इसे लड़ा और जीत भी जनता की ही होगी , सच की जीत होगी , इसका हम सभी को पूर्ण विश्वास है।
कमलनाथ ने कहा,''हमें शांतिपूर्ण ढंग से , मुस्तैद रहकर भाजपा की तमाम साज़िशों व षड्यंत्रो का मुखर होकर विरोध करना है ,हमें जनादेश का व जनता के एक-एक वोट का व सम्मान व सुरक्षा क़ायम रखना है। कमलनाथ ने कहा,''हर हाल में कांग्रेस का परचम इन चुनावों के परिणामों में लहराएगा , प्रदेश में सौदेबाजी व बोली की सरकार का अंत होगा ,जनता की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार वापस प्रदेश में क़ाबिज़ होगी।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, बीजेपी के पास फिलहाल 107 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 87| बहुजन समाज पार्टी के पास 2, समाजवादी पार्टी के पास 1 और 4 निर्दलीय. 28 सीटों पर जो उपचुनाव हुए उसमें 22 सिंधिया समर्थकों ने जब कांग्रेस छोड़ी तो कमलनाथ को कुर्सी छोड़नी पड़ी| कांग्रेस विधायकों ने तीन और विधायकों ने शिवराज के कुर्सी संभालने के बाद पार्टी छोड़ी| कांग्रेस के 2 और बीजेपी के एक विधायक के निधन से 3 और सीटें खाली हो गई थीं| दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने उपचुनावों के ऐलान के बाद हाथ को झटका लेकिन फिलहाल वहां चुनाव नहीं हो पाया|