नई दिल्ली: आरबीआई ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेन-देन की सीमा में वृद्धि कर दी है| ग्राहक सुविधा को और मजबूत बनाने तथा अभिदान, बीमा प्रीमियम और उच्च मूल्य के शिक्षा शुल्क जैसे आवर्ती भुगतान की सुविधा के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम आधारित आवर्ती भुगतान के लिए प्रति लेन-देन की सीमा 5000 रुपए से बढ़ाकर 15000 रुपए कर दी गई है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया,'घर की कीमतों में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते शहरी सहकारी बैंकों और ग्रामीण सहकारी बैंकों द्वारा 2011 और 2009 में फिक्स किए गए इंडिविजुअल होम लोन की सीमा को 100% से संशोधित किया जा रहा है|
सहकारी बैंकों को लाभ पहुंचाने के उपाय": -
● सीमाओं में पिछली बार संशोधन किए जाने के बाद से आवासीय मूल्यों में वृद्धि तथा उपभोक्ता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सहकारी बैंकों द्वारा व्यक्तिगत आवासीय ऋणों पर वर्तमान सीमाओं को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसी के अनुसार टीयर I / टीयर II के शहरी सहकारी बैंकों की सीमा क्रमशः 30 लाख रुपए/70 लाख रुपए से 60 लाख रुपए/ 140 लाख रुपए तक संशोधित मानी जाएगी। जहां तक ग्रामीण सहकारी बैंकों का संबंध है मूल्यांकित ग्रामीण सहकारी बैंक के लिए सीमा 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दी जाएगी।
● 100 करोड़ रुपए से कम की कुल संपत्ति; तथा अन्य ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए 30 लाख रुपए से 75 लाख रुपए तक।
● अब शहरी सहकारी बैंक ग्राहकों घर-घर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। इससे बैंक उपभोक्ताओं विशेषकर वरिष्ठ नागरिक तथा दिव्यांगजनों की आवश्यकताएं बेहतर तरीके से पूरी कर सकते हैं।
- अब ग्रामीण सहकारी बैंक कुल संपत्ति के 5 प्रतिशत की वर्तमान कुल आवास वित्त सीमा के अंदर वाणिज्यिक रियल एस्टेट (आवासीय परियोजनाओं के लिए ऋण) के लिए वित्त का विस्तार कर सकते हैं।