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24 अगस्त 2026

भुखमरी के कगार पर, 'टैक्सी' वालों की सुनने को तैयार नहीं केजरीवाल सरकार : सर्वोदय ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन

नई दिल्ली: सर्वोदय ड्राइवर वैलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष सुमेर रंभावत ने संवाददाताओं से कहा कि,'आप सबको पता है कि दिल्ली एनसीआर में एक अच्छी और साफ-सुधरी कैब सेवा शीला दीक्षित जी के समय पर शुरु की गई थी…

भुखमरी के कगार पर, 'टैक्सी' वालों की सुनने को तैयार नहीं केजरीवाल सरकार : सर्वोदय ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन
भुखमरी के कगार पर, 'टैक्सी' वालों की सुनने को तैयार नहीं केजरीवाल सरकार : सर्वोदय ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन | फ़ोटो: TVL News

 नई दिल्ली:  सर्वोदय ड्राइवर वैलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष सुमेर रंभावत ने संवाददाताओं से कहा कि,'आप सबको पता है कि दिल्ली एनसीआर में एक अच्छी और साफ-सुधरी कैब सेवा शीला दीक्षित जी के समय पर शुरु की गई थी, जिसको वनआरटी बोलते थे। आज एग्रीगेटर कंपनियों की वजह से जो हमारे साथी हैं, वो मरने की कगार पर आ गए हैं। लोग कहते है कि क्या करें, बच्चों को कैसे पालें? आप कह देते हैं कि लोग वर्क फ्रॉम होम करें, लेकिन हम अपनी साढ़े चार लाख गाड़ियाँ जो आज हैं, उनको अपने घर पर तो चला नहीं सकते। तो इतना बुरा हाल है कि हमारे पास स्पीड के चालान, हमारे पास जो टैक्सियों में जो मीटर लगे हुए थे, जिनको वनआरटी गाड़ी जिनको बोलते थे, उनके पास न कोई स्टैंड है, न कहीं, सिर्फ एग्जीगेटर कंपनियों के सहारे हमें छोड़ दिया गया है। 



सुमेर रंभावत ने कहा कि,'सरकार का कोई मुद्दा नहीं है, पिछले 7 सालों से हम केजरीवाल जी के घर पर जा-जाकर हम इतनी बार बोल चुके हैं, कि हमारे लिए कुछ करो। हम साढ़े चार लाख जो गाड़ियों वाले हैं, वो बिल्कुल भुखमरी की कगार पर आ गए हैं, लेकिन ये आम आदमी पार्टी की सरकार एक पल भर भी टैक्सी वालों की सुनने के लिए तैयार नहीं है। 


केजरीवाल सरकार ने हमें इतना मजबूर कर दिया कि हमें अपना घर छोड़ना पड़ रहा है

सर्वोदय ड्राइवर वैलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि,''आज ऐसी स्थिति है कि बहुत सारे चालक अपने रोजगार, अपने धंधों को छोड़कर और दूसरी तरफ मूव हो चुके हैं। बहुत से लोगों ने तो अपना दिल्ली शहर छोड़ दिया और ये (CM केजरीवाल ) पंजाब में जाकर, गोवा में जाकर, गुजरात में जाकर बोलते हैं कि हम टैक्सी वालों के लिए करेंगे, लेकिन इन्होंने तो हमें इतना मजबूर कर दिया कि हमें अपना घर छोड़ना पड़ रहा है। अपने बच्चों को यहाँ से ले जाकर गांव में शिफ्ट करना पड़ रहा है। हम लोग वहाँ से आए थे कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे, दिल्ली में आकर, लेकिन हमें यहाँ से छोड़कर जाना पड़ रहा है, क्योंकि हम अपने पेट के सहारे अपनी भूख नहीं मिटा सकते।








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