नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद एवं प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि, “आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनके सबसे करीबी रहने वालों में से एक और भाजपा के नेता, दूधसागर डेरी के चेयरमैन एवं जो मोदी जी को गुरू कहते थे और मोदी जी अपने मंच पर बैठाते थे, हर कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित करते थे, ऐसे द्धसागर डेरी क चेयरमैन, विपुल चौधरी के खिलाफ 800 करोड़ के भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज हुई है और विपुल चौधरी आज जेल में हैं। यह साफ है कि गुजरात की को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में करोड़ों का भ्रष्टाचार जब मोदी जी खुद मुख्यमंत्री थे, तब किया जाता था और इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिल रहा था।
(इस पूरे हकीकत का पर्दाफाश करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता और सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने मीडिया के सामने कुछ तस्वीरें दिखाईं, जिसमे विपुल चौधरी को बीजेपी का पट्टा पहनाकर सम्मानित करते हुए मोदी जी और मंच पर अलग-अलग कई कार्यक्रमों में मोदी जी के बगल में तथा मोदी जी के पांव छूते हुए विपुल चौधरी जी की तस्वीरें थीं। यही विपुल चौधरी (गुजरात के पूर्व गृहमंत्री विपुल चौधरी) आज 800 करोड़ के भ्रष्टाचार मे जेल की सलाखों के पीछे हैं।)
'भाजपा और भ्रष्टाचार का साथ है, भाजपा का विकास है,
उपयोग हो जाने के बाद विश्वासघात है, और शासन में बने रहने का भाजपा का प्रयास है।
शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि, विपुल चौधरी दूधसागर डेरी के चेयरमैन, 2005 से 2016 तक तो थे, और उसी लंबे अरसे तक 2005 से 2014 के दौरान मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। आज जो एफआईआर दर्ज हुई है, उसमें मोदी जी के कार्यकाल में विपुल चौधरी जी ने 800 करोड़ का भ्रष्टाचार, 2005 से चेयरैन के तौर पर किया है, यह आक्षेप है। दूधसागर डेरी, गुजरात को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत रजिस्टर है।
गुजरात को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट का कानून बहुत ही स्पष्ट है कि सरकार की सीधी मॉनीटरिंग, रजिस्टर्ड कॉपरेटिव सोसाइटीज में रहती है। रजिस्टर्ड को-ऑपरेटिव सोसाइटीज का हर साल स्पेशल ऑडिट तथा जांच सरकार का सहकारी विभाग करता रहता है। सरकार के प्रतिनिधियों की मीटिंग्स में मौजूदगी रहती है और चाहे मैनिजिंग कमेटी हो या जनरल बोर्ड हो, उनके किसी भी प्रस्ताव को सरकार खारिज कर सकती है, यह सरकार को कानूनन अधिकार है।
कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि, “विपुल चौधरी के खिलाफ जो भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन आरोपों को देखें, तो यह काम अकेला विपुल चौधरी कभी नहीं कर सकता है। सरकार की सीधी मदद और मैनेजिंग कमेटी एवं जनरल बोर्ड के रेजोल्यूशन सरकार ने खारिज नहीं किए इसलिए हुए हैं, इसका मतलब साफ है कि मोदी जी के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके आशीर्वाद से ही सारा भ्रष्टाचार हुआ था।
गोहिल ने कहा कि, “विपुल चौधरी ने अपने चौधरी समाज के संगठन की अर्बुदा सेना का नेतृत्व किया और विपुल चौधरी के समर्थकों ने भाजपा के खिलाफ आवाज उठाई, तो तुरंत गुजरात की भाजपा सरकार ने विपुल चौधरी के खिलाफ 800 करोड़ के भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज करके उनको जेल में डाला। अब सवाल ये है कि अगर 2005 से 800 करोड़ का भ्रष्टाचार हो रहा था और इसी दूधसागर डेरी की हर साल सरकार खुद ऑडिटिंग और मॉनीटरिंग करती थी, वहाँ तुरंत एफआईआर क्यों नहीं की? जब मोदी जी 2005 के बाद सीधे विपुल चौधरी को सम्मानित करते थे, साथ रखते थे और उनके जरिए बड़े-बड़े सम्मेलन करवाते थे, तब यह भ्रष्टाचार क्यों नहीं देखा गया?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि, “मोदी जी कहते थे- मैं खाता नही, खाने देता नहीं, लेकिन ये विपुल चौधरी के मामले से स्पष्ट हो जाता है कि मोदी जी करोड़ों से कम खाते नहीं और कोई विरोधी होता है या सच बोलता है, तो उसे चैन की रोटी खाने देते नहीं।
हमारे कुछ मोदी जी के सामने सवाल हैं:
1. 2005 से 2014 तक मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उसी दौरान जिसको अपने बहुत करीब रखते थे, ऐसे विपुल चौधरी ने 800 करोड़ का भ्रष्टाचार किया और मोदी जी को क्यों पता नहीं चला? क्या उससे फायदा ले रहे थे? या भागीदार थे? या शासन करने की इतनी क्षमता नहीं थी कि अपनी नाक तले चलते भ्रष्टाचार को देख नहीं पाए थे?
2. गुजरात को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत रजिस्टर दूधसागर डेरी का रेग्यूलर ऑडिट एवं मॉनीटरिंग गुजरात सरकार को करना था, तो वो सरकार, जो अपना फर्ज़ अदा नहीं कर पाई, इसके लिए जिम्मेदार कौन?
3. क्या विपुल चौधरी अकेले किसी भी रजिस्टर्ड को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में इतना बड़ा भ्रष्टाचार कर सकते हैं? __ इसके साथ मिले अधिकारी और पदाधिकारियों का एफआईआर में क्यों नाम नहीं है? 4. गुजरात की अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कॉ-ऑपरेटिव बैंक से लेकर दूसरी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में भी हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगेहबानी में सरकार स्पेशल ऑडिट करवाएगी?
शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि, “हम मांग करते हैं:
●800 करोड़ के इस भ्रष्टाचार की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगेहबानी में ही होनी चाहिए।
● गुजरात को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड दूधसागर डेरी में हुए भ्रष्टाचार को रोकने में सरकार के अधिकारी और पदाधिकारियों की जो मिलीभगत थी, उन सभी का नाम एफआईआर में दर्ज हो।
● गुजरात को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में चल रहे ऐसे भ्रष्टाचारों की जांच स्पेशल ऑडिट के जरिए हो और यह ऑडिट हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगेहबानी में सरकार तुरंत करवाए।