नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज किसान आंदोलन अपने 100 दिन समाप्त कर चुका है। इन 100 दिनों में 255 मौतें हुई; एक दिन में दो से भी अधिक। आपमें से किसी ने मोदी जी के मुँह से, किसी मंत्री के मुँह से कोई संवेदना का एक शब्द भी अगर सुना हो, तो हम सबको स्मरण करा दीजिए, हमने नहीं सुना, किसानों ने नहीं सुना। उनका अपमान किया गया, ताने कसे गए, उनके आंसूओं तक की हंसी उड़ाई गई। लेकिन इतने किसान बारिश, ओले, सर्दी और अब गर्मी झेलते हुए वहाँ बैठे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि,''दिल्ली के चारों तरफ बॉर्डर्स पर बैठे हैं। लेकिन सरकार के उस फोन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिस फोन का वायदा प्रधानमंत्री जी ने स्वयं किया था। आज तक वो फोन नहीं गया। मीडिया पर क्या दबाव है, ये तो अब हम बखूबी जान चुके हैं! पिछले कुछ दिनों में, कि जो मीडिया देख रहा है, वह अब दिखा पाने की स्थिति में नहीं है।
पवन खेड़ा ने कहा कि,''सबको मालूम है कि क्या हो रहा है, आंदोलन दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है, लेकिन खबरों से आंदोलन गायब है। बार-बार किसान आंदोलन को बदनाम करने के प्रयास किए गए, वो आप सबसे सुने, देखे, महसूस किए। तमाम षडयंत्र रचे गए। भाजपा नेताओं की वो टिप्पणियां आप सबने सुनी, बार-बार उनको दोहराना ठीक नहीं रहेगा। विमर्श के दायरे से कैसे किसानों को, उनके आंदोलन को निकाल बाहर किया जाए, उसके लिए तमाम षडयंत्र रचे गए, हर हथकंडा अपनाया गया। उन हथकंडों के लिए सरकार जानी जाती है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि,'मध्यम वर्ग का ध्यान व समर्थन किसान आंदोलन की तरफ नहीं जा पाता, जाहिर सी बात है, क्योंकि सरकार ने हमें और आपको व्यस्त रखने का तमाम इंतजाम कर रखा है। जब हम और आप अपनी ही उधेड़बुन में लगे रहेंगे, तो हम किसी और की सुध कैसे लेंगे। यह बात सरकार बहुत अच्छी तरह समझती है। इसलिए आज अगर समाज का एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ग, किसानों का वर्ग अगर 100 दिन से आंदोलन कर रहा है, तो हमें उसका समर्थन इसलिए भी करना चाहिए कि वो, वह काम कर रहे हैं, जो हम और आप, जिस आपाधापी में जी रहे हैं, हम नहीं कर पाते।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि,'अगर हम अपने घर की किश्तें भरने में संघर्ष कर रहे हैं, अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, अपनी नौकरी ढूंढने के लिए या बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, एलपीजी गैस, प्याज, खाद्य तेल, तमाम कीमतें बढ़ रही हैं, उससे हम संघर्ष कर रहे हैं। तो एक वर्ग ऐसा है जो आपके और मेरे संघर्ष को सड़क पर लाया है। सिर्फ एक काम हमें करना है कि उस संघर्ष का सम्मान करें, उसका समर्थन कर पाएं। तो इस देश पर और इस लोकतंत्र पर आप सबकी बहुत बड़ी कृपा होगी।
कांग्रेस नेता खेड़ा ने कहा कि,''आज सरकार की नीतियों के खिलाफ कई लोगों के मन में आक्रोश है। अलग-अलग वर्ग हैं, व्यापारी वर्ग है। महिला सुरक्षा को लेकर हम आंदोलित है, लेकिन नहीं कुछ कर पा रहे हैं, क्योंकि जैसा कि मैंने कहा हम आपाधापी में लगे हुए हैं। तो कम से कम संवेदना है आपके मन में, हम सबके मन में, पीड़ा भी हैं। हाँ, अभाव है तो समय का है। तो किसी एक वर्ग ने वो समय निकाला है।
पवन खेड़ा ने कहा कि,''सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही, वो हम सब देख रहे हैं। वो टीकरी बॉर्डर हो, सिंधु बॉर्डर हो, गाजीपुर हो, शाहजहांपुर हो, सब जगह एक वर्ग बैठा है, अडिग है, संघर्ष कर रहा है। उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, उसके खिलाफ क्या षडयंत्र रचे जा रहे हैं, कैसे उसका अपमान करने की चेष्ठा की जा रही है, वो फिर भी वहीं डटा हुआ है। देश उनके साथ भले चुप है, लेकिन खड़ा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि,''आज काला दिन मनाने का किसानों ने आह्वान किया है। ये काला अध्याय है हमारे लोकतंत्र के इतिहास में। आदोंलन पहले भी बहुत हुए, हर सरकार में हुए। जब राजीव गांधी जी की सरकार थी, वोट क्लब पर किसान जमा हो गए थे, लाखों किसान थे। इंदिरा जी की पुण्यतिथि में बहुत बड़ा कार्यक्रम यहीं होना था, वोट क्लब पर। राजीव जी ने वो कार्यक्रम का स्थान बदला, किसानों को नहीं हटाया। सरकारें ऐसे चलती हैं। तो उम्मीद सरकार से तो नहीं है। उम्मीद आप सबसे है, उम्मीद इस पूरे देश से इस किसानों को है कि और कुछ करें या ना करें, अपना समर्थन इन किसानों को जरुर दें। भले ही आप बोलने में सक्षम नहीं हैं, सड़क पर आने में सक्षम नहीं हैं। एक साइलेंट, एक मौन समर्थन भी अगर आप देंगे, तो इस देश का बहुत-बहुत भला होगा।
एक प्रश्न पर कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि अगर किसानों को दिक्कत है, तो हमसे चर्चा करें, भीड़ इक्कट्ठी करने की क्या जरुरत है? इस पर खेड़ा ने कहा कि किसानों को अगर प्रॉब्लम हैं, तो आएं और डिस्कस करें, वो कहाँ जाएं, किससे मिलें, कौन फोन करेगा? प्रधानमंत्री जी ने आज से महीना भर पहले कहा था कि '''He is a phone call away'', वो फोन नंबर तो अभी तक किसी किसान नेता को नहीं मिला और भीड़ की जहाँ तक बात है, तो जब वो भीड़ वोट देती है, तो वो भीड़ महत्वपूर्ण हो जाती है। जब वो भीड़ आपकी किसी नीति के खिलाफ सड़क पर आती है, तो आप कहते हैं कि भीडतंत्र नहीं चलेगा। ये दोहरे मापदंड भी नहीं चलेंगे।
एक अन्य पर कि किसानों के मुद्दे को विपक्ष चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बना पा रही है, इस पर खेड़ा ने कहा कि अभी चुनाव तो शुरु हुए हैं, सरकार चुनाव में 5 साल व्यस्त रहती है, हमेशा व्यस्त रहती है। किसान आंदोलन हर जगह एक मुद्दा है। पॉलिटिकल पार्टी तो खैर जो बनाएंगी, वो आपको सब दिखेगा। वो बनाएं या ना बनाएं, किसान अपने आपमें कृषि कानून एक बहुत बड़ा मुद्दा उभर कर पूरे देश में आ रहा है। 100 दिन हुए हैं, सिविल सोसायटी हो, पॉलिटिक्ल पार्टी हों, तमाम लोगों ने अपनी आवाज इस आंदोलन में जोड़ने का प्रयास किया है और करते रहेंगे।
एक अन्य प्रश्न पर कि किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस आगे क्या कदम उठाएगी? ,'खेड़ा ने कहा कि हम ये बार-बार प्रयास करते रहेंगे कि सरकार संजीदगी से इस मुद्दे को वापस ले और जो किसानों की मांग है कि इन तीनों काले कानूनों को वापस लिया जाए और तत्तपश्चात किसानों से चर्चा, विमर्श करने के बाद जो नया कानून आप लाना चाहते हैं, वो लाएँ। ये बात हम बार-बार दोहराएंगे हर मंच से।