नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की कई सीमाओं पर बैठे किसानों का आंदोलन आज 56-57वां दिन है| पिछले 56 दिनों से जारी किसान आंदोलन को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच 10वें दौर की बातचीत भी आज बेनतीजा रही|
तीन कृषि कानूनों पर किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच दसवें दौर की वार्ता नई दिल्ली के विज्ञान भवन में संपन्न हुई। अब केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच अगली बातचीत 22 जनवरी को होगी|
आज की बैठक में कृषि मंत्री ने किसान यूनियनों से कहा कि सरकार किसानों के मन में किसी भी तरह की शंका को दूर करने के लिए SC में एक हलफनामा देने को तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर दोनों पक्षों को बैठक समाप्त होने से पहले आम सहमति तक पहुंचना चाहिए| उन्होंने कहा कि आखिर कबतक किसान इस आंदोलन के कारण सड़कों पर बैठे रहेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा।
फिलहाल इस बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकला है। केंद्र सरकार ने एक साल तक कृषि कानून को निलंबित रखने का प्रस्ताव दिया था, पर किसानों को यह मंजूर नहीं था। फिलहाल किसान नेताओं ने तय किया कि वे गुरुवार को अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे।
बैठक में एनआईए की नोटिस का किसानों ने विरोध भी जताया तो मंत्री जी ने कहा पता करेंगे। अब तक की बैठक में सरकार ने एक बार फिर कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा तो किसानों कानून वापसी की अपनी मांग पर जोर दिया। एक किसान नेता ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा से सरकार भाग रही है। इस दौरान किसानों ने कहा कि एनआईए प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है। तब सरकार ने उनसे बेगुनाह लोगों की लिस्ट देने को कहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड को लेकर यह सुनिश्चित किया है कि यह अनुशासित परेड होगी। इसमें किसी उपद्रवी को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल किसान इसे लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं कि क्या उन्हें रिंग रोड तक जाने दिया जाएगा या बॉर्डर पर ही परेड करनी होगी।