नई दिल्ली:मंगलवार देर शाम भारतीय किसान यूनियन के हरिंदर सिंह लखोवाल ने बताया कि,''23 तारीख को हम एक टाइम का खाना नहीं खाएंगे। 26 और 27 तारीख़ को दूतावासों के बाहर हमारे लोग प्रदर्शन करेंगे। 27 तारीख को प्रधानमंत्री ने जो मन की बात का कार्यक्रम रखा है उसका हम थालियां बजाकर विरोध करेंगे|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, कल चौधरी चरण सिंह जी का जन्मदिन है, हम बढ़िया उत्सव मनाएंगे। सरकार की तरफ से अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है|
वो नकली संगठन बनाकर ला रहे हैं, RSS का अपना किसान संगठन है उनसे मीटिंग क्यों नहीं हुई? हमें कोई जल्दी नहीं है पंजाब और हरियाणा में हमारी गिनती बढ़ रही है। देश में आंदोलन फैल रहा है: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की आज किसान संगठनों के साथ हुई बैठक पर कुलवंत सिंह संधू, किसान नेता
आज पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक हुई और उसमें ये फैसला किया गया कि केंद्र सरकार की चिट्ठी पर कल की बैठक में फैसला लिया जाएगा|हरियाणा के किसान 25-27 दिसंबर को हरियाणा के टोल प्लाजा फ्री करेंगे: कुलवंत सिंह संधू, किसान नेता
सरकार से मिले नए पत्र का आंदोलनकारी किसानों ने अब लिखित जवाब देने का फैसला किया है। किसान दिवस पर 23 दिसंबर को सरकार को जवाब सौंपने की तैयारी है। मंगलवार को पंजाब के आंदोलनकारी किसान संगठनों ने घंटों मैराथन मंथन के बाद लिखित जवाब के कई बिंदुओं पर चर्चा की। जवाब का खाका भी तैयार कर लिया।
इस पर संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े देश के अन्य किसान संगठनों से बुधवार को निर्णायक बैठक में अंतिम मंत्रणा होगी। सरकार को भेजे जाने वाले जवाबी पत्र पर मुहर लगते ही किसान दिवस पर 23 दिसंबर को ही सरकार को जवाब सौंपा जा सकता है।
पंजाब के आंदोलनकारी करीब 32 किसान संगठनों की मंगलवार को हुई बैठक में ज्यादातर ने सवाल उठाया कि सरकार के पत्र में कोई नया प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने बातचीत की तारीख भी तय नहीं की है। सरकार की ओर से बातचीत कौन करेगा, यह भी साफ नहीं है। ऐसे में यदि बातचीत होती है तो सरकार की ओर से फैसला कौन लेगा जैसे बिंदुओं पर सवाल उठे। आंदोलनकारी किसान संगठनों की ओर से बातचीत का एजेंडा, नई तारीख, वार्ताकार के अधिकृत नाम आदि सवालों के साथ जवाब भेजकर सरकार के पाले में ही गेंद डालने की रणनीति बनी। किसान दिवस पर सरकार को लिखित जवाब सौंपा जा सकता है। यह जवाब संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से ही भेजा जाएगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा,''केंद्र की एजेंसियां इनकम टैक्स को लेकर हमारे आढ़ती भाईयों के घरों, दफ़्तरों पर रेड कराकर उन्हें डराने-धमकाने का काम कर रही हैं। एक लोकतंत्र में इससे निदंनीय और कुछ नहीं हो सकता|
उत्तर प्रदेश: किसानों ने गौतमबुद्धनगर में कृषि कानूनों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकाली। एक किसान ने कहा, "सरकार ने जो कानून पास किए हैं हम इसके समर्थन में दिल्ली जा रहे हैं। मेरी बॉर्डर पर बैठे किसानों से अपील है कि वे कानूनों को बारीकी से समझें। हमें पुलिस ने रोका है।"
सरकार की तरफ से एक खत आया कि अगर आप कृषि कानून वापस लेने वाली बात से पीछे हटकर संशोधन करने के लिए बात करना चाहते हैं तो समय और तारीख दो। किसान संगठनों पर चक्रव्यूह रचने का प्रयास किया जा रहा है: श्रवण सिंह पंढेर, किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी
उधर,''हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को मंगलवार को अंबाला में किसानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित किसानों को काबू करने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने किसानों को पीछे किया। किसानों ने सीएम के काफिले में शामिल हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रधान सुभाष बराला की गाड़ी को भी निशाना बनाया।
दरअसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अंबाला में भाजपा की मेयर पद की प्रत्याशी डॉ. वंदना शर्मा के समर्थन में मंगलवार को एक जनसभा को संबोधित करना था। सीएम के अंबाला आगमन की सूचना मिलते ही सैकड़ों किसान सिटी के अग्रसेन चौक पर जमा हो गए।किसानों को संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। किसान पहले ही एलान कर चुके हैं कि जहां-जहां भाजपा-जजपा के बड़े नेता आएंगे वहीं पर काले झंडे दिखाकर विरोध व्यक्त किया जाएगा।