नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उघैती इलाके में 50 वर्षीय आंगनबाड़ी सहायिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर कांग्रेस नेता अलका लांबा ने योगी सरकार और पुलिस पर निशाना साधा है| कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा कि,'''हम सबके सामने दावा किया जाता है कि उत्तर प्रदेश में राम राज्य है। हम हाथरस की वीभत्स घटना से, गैंगरेप की वारदात से उभर भी नहीं पाए थे, आज एक औऱ घटना उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से हम सबके सामने आई है। ये घटना 3 जनवरी, रविवार के दिन की है, लेकिन आज 6 तारीख को हम सब तक ये जानकारी पहुंची कि बदायूँ में 50 वर्षीय महिला जो मंदिर में पूजा करने गई थी, वहाँ पर मंदिर के पुजारी और उनके दो और साथियों ने इस हमारी आंगनवाड़ी सहायिका के साथ गैंगरेप, सामूहिक बलात्कार ही नहीं किया गया, बल्कि उसकी निर्मम हत्या भी कर दी गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा कि,'' इस 50 वर्षीय महिला का शव कुंए में पाया जाता है और कोशिश पुलिस प्रशासन की रही कि इसे एक आत्महत्या का मामला बता कर रफा-दफा कर दिया जाए। पीड़िता के परिवार का आऱोप है कि वो थाने गए, लेकिन थाने में जो पुलिस अधिकारी थे, उन्होंने इस पूरी घटना को गंभीरता से नहीं लिया। समय पर घटनास्थल पर पहुंचना चाहिए था, सबूत एकत्र करने चाहिए थे, लेकिन उसमें देरी हुई, जिसका फायदा उठाकर, जो मुख्य आरोपी है, वो अभी तक फरार है।
कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा कि,''हमारा ये मानना है कि हमने उन्नाव की घटना देखी, हमने हाथरस की घटना देखी और वही पैट्रेन यहाँ पर भी हमें देखने को मिल रहा है कि पूरी की पूरी पुलिस, प्रशासन और सरकार न केवल बार-बार फेल हो रही है.. इन घटनाओं को रोकने में, महिलाओं के खिलाफ जिस तरह से जघन्य अपराध हो रहे हैं, उसमें फेल ही नहीं हो रही है, बल्कि ऐसा देखने में आ रहा है कि आरोपियों को संरक्षण देने में, उन्हें बचाने में, उनके खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही में देरी करते हुए उन्हें बचाने की भी कोशिश कर रही है| जो उन्नाव, हाथरस के बाद अब आपको बदायूं की इस घटना में भी देखने को मिल रहा है।
अलका लांबा ने कहा कि,''हमारा ये कहना है, ये अपने आप में बेहद गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बिल्कुल भी महिलाओं के साथ हो रहे जघन्य अपराधों को लेकर गंभीर नहीं है, क्योंकि लगातार ये अपराध बढ़ रहे हैं। अपराधियों में किसी भी तरह का खौफ और डर हमें देखने को नहीं मिल रहा है, वरना हाथरस की घटना अभी बहुत पुरानी नहीं हुई है। सितंबर, 2020 की घटना है, जिसे आज 4 महीने होने जा रहे हैं।
अलका लांबा ने कहा कि,''कहा जाता है, आदरणीय प्रधानमंत्री जी द्वारा कि 7 दिन के अंदर अब तो फांसी और सजाएं होती है। उन्नाव का मामला हो, हाथरस का आरोपी हो, अभी भी हमारे बीच में जिंदा है और अब इस घटना के बाद भी हमें लगता है कि बिल्कुल जांच होनी चाहिए जो मुख्य आरोपी अभी तक नहीं पकड़ा गया, उसके ना पकड़े जाने के पीछे कौन लोग हैं? उन्होंने कहा,'''क्या उन्नाव और हाथरस की घटना की तरह बदायूं में भी भाजपा के नेता इन आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं...? अभी तक 3 दिन बीत चुके हैं, शायद इसीलिए पुलिस मुख्य आरोपी को पकड़ने में कामयाब नहीं हुई है।
उन्होंने कहा,''पीड़िता के परिवार का आरोप है कि घटनास्थल पर पुलिस समय पर नहीं पहुंची। पीड़िता, जो अब हमारे बीच में नहीं है, उनके परिवार ने कहा कि एफआईआर करने में देरी की गई है। एफआईआर में आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई, दबाव बनाया गया कि आत्महत्या बताया जाए। पोस्टमार्टम करनेमें 48 घंटे की देरी की गई और 48 घंटे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट जब सामने आती है तो इस बात का खुलासा होता है कि पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उसकी निर्मम हत्या भी हुई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि,''कहते हुए हिम्मत जुटानी पड़ रही है कि उसके निजीपार्ट में रॉड घुसाई गई, उसकी पसलियां, उसकी टांगे तोड़ दी गई, उसे बिल्कुल मोहताज कर दिया गया और उसे कुएं के अंदर फेंक दिया गया। पुलिस कोशिश करती रही कि इस मामले को दबा दिया जाए, लेकिन सच्चाई छुपती नहीं है, आज हम सबके सामने है और हम मांग करते हैं कि आज तीसरा दिन है, तो जल्द से जल्द अगले 24 घंटे के अंदर जो मुख्य आरोपी है, उसकी गिरफ्तारी की जाए। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अंदर केस, मुकदमा चलाते हुए जो आरोपी हैं, उन्हें फांसी के तख्तों पर पहुंचाया जाए। ये पूरी की पूरी जो जांच है, इस मामले की, वो हाईकोर्ट के सिटिंग जज के अधीन करवाई जाए। पीड़िता के परिवार को कानूनी मदद के साथ कांग्रेस की मांग है कि 50 लाख रुपए आर्थिक मदद तुरंत पहुंचाई जाए।
अलका लांबा ने कहा कि,'उत्तर प्रदेश राज्य से तब उम्मीद और भी बढ़ जाती है, जब पता चलता है कि वहाँ की राज्यपाल खुद एक महिला हैं। मुझे नहीं मालूम कि उनका बयान अभी तक क्यों नहीं आया है, जबकि वो एक महिला राज्यपाल हैं और एक के बाद एक महिलाओं के साथ जघन्य अपराधों में कमी आने की बजाए, इसमें बढ़ोतरी होती जा रही है।
स्मृति ईरानी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा,' हमारे देश की महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी जी भी इसी राज्य, उत्तर प्रदेश से आती हैं। हाथरस के मामले में खामोश रहीं, उन्नाव के मामले में वो खामोश रही, अब उम्मीद करते हैं कि बदायूं के इस गैंगरेप और हत्या के मामले में वो खामोश नहीं रहेंगी और अगर नव वर्ष की अपनी छुट्टियां मना कर अपने परिवार के साथ वापस लौट आई हों और उन्हें फुर्सत मिल गई हो, तो बिना समय गंवाएं बदायूं के इस पीड़िता के परिवार को जाकर मिलें, उन्हें यकीन और विश्वास दिलाएं कि पुलिस उत्तर प्रदेश की, प्रशासन और योगी सरकार जिस तरह से उन्नाव और हाथरस में आरोपियों को बचाने की कोशिश करती रही, वो कोशिश अब हमें बदायूँ के इस मामले में देखने को नहीं मिलेगी। हम उनसे उम्मीद करते हैं|
मालूम है स्मृति ईरानी जी के लिए बंगाल और असम के चुनावों में जाना, वहाँ पर प्रेस वार्ता करना, मुखर होना उनकी प्राथमिकताओं में है, लेकिन देश की महिला विकास मंत्री होने के नाते हम भी उम्मीद करते हैं कि अपनी प्राथमिकताओं में देश नहीं, कम से कम अपने उत्तर प्रदेश, जहाँ पर आपकी भाजपा की सरकार है, वहाँ को आप प्राथमिकता पर रखते हुए, वहाँ की महिलाओं को न्याय और सुरक्षा दे पाएं । ये सब बात कहते हुए बहुत ही दखु और पीड़ा हो रही है कि कतई भी संवेदनशीलता और गंभीरता हमें उत्तर प्रदेश की भाजपाई योगी आदित्यनाथ की सरकार में देखने को नहीं मिल रही है।
अलका लांबा ने कहा कि,जहाँ तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है, मैं आपके माध्यम से एक बार फिर से बदायूँ की इस पीड़िता के परिवार को विश्वास दिलाना चाहती हूं कि कांग्रेस हमेशा पीड़िता और उनके परिवार के साथ, उनकी न्याय की लड़ाई में खड़ी रही है। इस मामले में भी कांग्रेस अपनी नजर बनाए रखेगी। किसी भी तरह के अन्याय या न्याय में देरी को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी और उसके लिए हमें हाथरस की तरह सड़कों पर एक बार फिर से उतरना पड़ेगा, तो हम उतरेंगे, लेकिन हम कतई भी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को एक बार फिर से आरोपियों के साथ उनके समर्थन में या उनको बचाने की कोशिश को हम कतई भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।