नई दिल्ली: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजीजू, जनजातीय कार्य राज्यमंत्री रेणुका सिंह सरुता और जनजातीय कार्य एवं जलशक्ति राज्यमंत्री विश्वेश्वर टुडु उपस्थित थे। दिल्ली में राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान के उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि,' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि जब तक आदिवासी पहले पंक्ति में नहीं आएंगे तब तक भारत विकसित नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री का लक्ष्य पिछड़ी जाति और आदिवासी को मुख्यधारा में लाना है|
कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि,''2 दर्जन से भी ज़्यादा जनजातीय अनुसंधान संस्थान अलग-अलग नाम से काम कर रहे हैं लेकिन उसको राष्ट्रीय रूप से जोड़ने वाली कड़ी नहीं है। हमारी जनजातीय समाज में बहुत सारी विविधता है|,''इन विविधताओं को अगर एक कड़ी नहीं जोड़ती है तो समग्र देश के जनजातीय समाज के विकास का सपना अधूरा ही रहता है। आज राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान जो बन रहा है वो एक कड़ी बनने वाला है और हमारी कल्पना का जनजातीय विकास को साकार करने में बड़ी भूमिका निभाने वाला है|
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जल, जंगल, ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला, संस्कृति, भाषा, परंपरा से संबंधित देश में अनेक जनजातीय परंपरागत क़ानून बने हुए हैं जिनपर अनुसंधान की ज़रूरत है। इन क़ानूनों का वर्तमान क़ानून के साथ सामंजस्य किए बिना किसी भी जनजातीय कल्याण के क़ानून पर अमल नहीं हो सकता। इन सभी विषयों पर अनुसंधान राष्ट्रीय स्तर पर ही हो सकता है और उसे राष्ट्रीय मान्यता भी तभी मिलेगी।
शाह ने कहा कि ये संस्थान विभिन्न विषयों पर अनुसंधान और उनका मूल्यांकन करेगा, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और अन्य संस्थानों का क्षमता निर्माण करेगा, डेटा संग्रह भी करेगा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए अच्छी बातों का प्रचार-प्रसार भी करेगा। जनजातीय त्यौहारों को, उनकी मूल भावना को संजोए रखते हुए, आधुनिक स्वरूप देकर लोकप्रिय बनाने का काम भी करेगा। मोदी जी द्वारा कल्पित जनजातीय संग्रहालयों की विविधता, रखरखाव पर भी काम करेगा। एक प्रकार से समग्र जनजातीय समाज के विकास का ख़ाका खींचने का काम ये अनुसंधान संस्थान करेगा। ये अनुसंधान संस्थान आने वाले 25 सालों में जनजातीय विकास की रीढ़ की हड्डी बनने वाला है।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुरूआत से ही अनुसंधान संस्थान और जनशिक्षा पर बहुत बल दिया है। पिछली सरकार के समय वर्ष 2014 में इसके लिए बजट सात करोड़ रूपए था जिसे 2022 के बजट में बढ़ाकर 150 करोड़ रूपए कर दिया गया। किसी भी विकास के लिए नींव ठोस होनी चाहिए और विकास योजनाओं के आधार को मज़बूत उनकी कमियों का अभ्यास करके, नीति बनाकर और उसपर अमल करके ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत ट्राईबल रिसर्च इंस्टिट्यूट की संख्या में भी बहुत बढ़ोतरी करके 27 बनाए गए हैं। 49 प्रतिष्ठान आज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में सर्टिफाइड हैं। जनजातीय जनप्रतिनिधियों, जनजातीय क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ, रिसर्च इंस्टिट्यूट को इनका बहुत अच्छे से उपयोग करना चाहिए कि आदिवासी का स्वास्थ्य कैसे ठीक हो, उनमें न्यूट्रीशन की कमी को कैसे हल किया जाए, परंपरागत रोगों को कैसे दूर किया जाए और कैसे उन्हें सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनाया जाए। इन सारी चीजों को इस संस्थान और सेंटर फॉर एक्सीलेंस से ही आगे बढ़ा सकते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी ने 2014 में महसूस किया कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय नीतियां देश की सभी जनजातियों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। जनजाति संबंधी लीगेसी के मुद्दों पर भी कई विवाद सालों से लंबित हैं जिनका निपटारा भी जरूरी है और जनजातीय मुद्दों पर नॉलेज बैंक भी बनाना चाहिए। इन सभी को ध्यान में रखकर इस संस्थान की कल्पना की गई थी जो लगभग 10 करोड रूपए की लागत से आज पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि यह अनुसंधान संस्थान सरकार को नीतिगत जानकारी देगा, राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में भी काम करेगा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय ज्ञान केंद्र भी यहीं बनाया जाएगा, और, शैक्षणिक, कार्यकारी और विधायी क्षेत्र में जनजातियों की समस्याओं के समाधान के लिए भी काम करेगा।
शाह ने कहा कि जनजातियों के सम्मान के लिए मोदी सरकार ने ढेर सारे काम किए हैं। कई राज्यों में ठुकराए और भुला दिए गए जनजातीय नेताओं को गौरव प्रदान करने का काम नरेंद्र मोदी जी ने किया है। चाहे खासी-गारो आंदोलन हो, मिज़ो आंदोलन हो, मणिपुर का आंदोलन हो, वीर दुर्गावती का शौर्य हो या रानी कमलावती का बलिदान हो, इन सबको गौरव देने का काम मोदी सरकार ने किया है। भगवान बिरसा मुंडा के साथ जोड़कर आदिवासी जनजातीय गौरव दिवस मनाने का भी हमने फैसला किया है। लगभग 200 करोड़ रूपए की लागत से 10 संग्रहालय भी हम बना रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत नॉर्थ-ईस्ट, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और जम्मू कश्मीर में जनजातियों से जुड़ी हुई अनेक समस्याएं लंबित थीं, जो धीरे-धीरे कानून और व्यवस्था की स्थिति में परिवर्तित हो गईं। मोदी जी ने 2019 के बाद नॉर्थईस्ट में एक के बाद एक कई कदम उठाए हैं। कई जनजातियों के साथ हमने समझौते किए हैं कि आज AFSPA को नॉर्थईस्ट के लगभग 66% से ज्यादा क्षेत्र से हमने उठा लिया है और शांति प्रस्थापित की है। वर्ष 2006 से 2014 तक के पिछली सरकार के आठ सालों में छोटी-छोटी घटनाओं को गिनकर पूर्वोत्तर में 8700 घटनाएं हुईं थीं जबकि नरेंद्र मोदी जी के 8 सालों के शासन में इन घटनाओं में लगभग 70% की कमी आई है। पहले 304 सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु हुई थी जिसमें अब 60% की कमी आई है, नागरिकों की मृत्यु का आंकड़ा भी पहले की तुलना में 83% तक कम हुआ है और इन सबसे आप कल्पना कर सकते हैं कि नॉर्थईस्ट में कितना बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में शांति होती है उसी क्षेत्र में विकास होता है फिर चाहे वो वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र हो या नॉर्थईस्ट हो, जहां जनजाति ही रहती है। सुरक्षित पूर्वोत्तर और सुरक्षित मध्य भारत के वामपंथी उग्रवादग्रस्त क्षेत्र जनजातीय कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।