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26 अगस्त 2026

टेक फॉग' ऐप के जरिए सोशल मीडिया पर हेट स्पीच, दुष्प्रचार और झूठ फैलाती है भाजपा : 'टेक फॉग' पर खुलासे के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार मोदी सरकार में एक ना एक वाकया ऐसा होता जा रहा है, जो कहीं ना कहीं लोकतंत्र को क्षीण कर…

टेक फॉग' ऐप के जरिए सोशल मीडिया पर हेट स्पीच, दुष्प्रचार और झूठ फैलाती है भाजपा : 'टेक फॉग' पर खुलासे के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की
टेक फॉग' ऐप के जरिए सोशल मीडिया पर हेट स्पीच, दुष्प्रचार और झूठ फैलाती है भाजपा : 'टेक फॉग' पर खुलासे के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार मोदी सरकार में एक ना एक वाकया ऐसा होता जा रहा है, जो कहीं ना कहीं लोकतंत्र को क्षीण करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है, चाहे वो स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही का मामला हो, जो निडर होकर अपना काम करते हैं, फर्जी केस हों, देशद्रोह के आरोप हों या जो पेगासस के माध्यम से पता चला कि किस तरह से आम जनता की, कॉन्स्टिट्यूशनल पोजिशन पर बैठे लोगों की, निर्वाचित सदस्यों की, जजेस की, उनसे संबंधित लोगों की, चुनाव आयोग के लोगों की किस तरह से जासूसी की जा रही थी, वो एक मामला है, जो कि लोकतंत्र को किसी भी तरह से क्षीण करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। ‘दा वायर' एजेंसी के माध्यम से एक रिपोर्ट कल सामने आई, जिसमें बताया गया कि कैसे (Tek Fog) टेक फॉग नामक एप से दुष्प्रचार किया जा रहा है, हेट स्पीच फैलाई जा रही है। वो थोड़ी टेक्निकल है। मैं उसको थोड़ा सा सामान्य करके आपके व्यूअर के लिए, आपके पाठकों के लिए जरुर बताना चाहूंगी, जो भी अब मैं कोट करुंगी, वो वायर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के माध्यम से कर रही हूं।



 कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''वायर ने कल एक सनसनीखेज खुलासा किया कि टेक फॉग नामक एक एप है, जिससे कि भाजपा की आईटी सेल, उससे संबंधित लोग, भाजपा के नेता, उनका युवा मोर्चा और तमाम भाजपा के शीर्ष नेता मिलकर दुष्प्रचार, झूठ तो फैलाते ही हैं, साथ ही साथ वो लोगों को टारगेट करने का, हेट स्पीच का भी काम करते हैं और विशेषत: ये स्पीच, या तो समुदाय विशेष के खिलाफ होती है या महिलाओं के खिलाफ है और इसमें सबसे ज्यादा उनके रडार पर महिला जर्नलिस्ट, महिला पत्रकार आती हैं। 



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''''तो मैं दो मिनट में तो पहले ये बता दूं कि ये टेक फॉग नामक बला है क्या - टेक फॉग एक एप है, जिसके माध्यम से बहुत सारे ऑटो सिस्टम जनरेटेड या एप जनरेटेड ट्विटर हैंडल, फेसबुक पेज, शेयर चैट अकाउंट, वॉट्सएप अकाउंट एक्सेस किए जा सकते हैं।ट्वीट के माध्यम से वो ऐसे एकदम से अकाउंट को क्रियेट कर सकते हैं। इसकी कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट नहीं रहती है और इन्होंने तमामों ट्रेंड को चलाने में बड़ी कारगार भूमिका निभाई है। तो स्वत: ये आप हैंडल क्रियेट कर सकते हैं, ये सिस्टम जनरेटेड होते हैं, इसमें ओटीपी तक की जरुरत नहीं होती है और इसलिए ये बहुत खतरनाक एक वाकया है। ये सिस्टम जनरेटेड हैंडल फिर भाजपा की मदद करते हैं कोई भी ट्रेंड चलाने में। वो ट्रेंड जैसे मैंने आपसे कहा कि वो कुछ महिला पत्रकारों के खिलाफ हो सकता है, महिला समुदाय के खिलाफ हो सकता है, किसी धर्म समुदाय के खिलाफ हो सकता है, वो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ हो सकता है, वो जो मनचाहा झूठ परोसना चाहें, उसका नेरेटिव बनाने में ये जो टेक फॉग नामक बला है, ये मदद करती है। ये जबरदस्त तरीके से हेट स्पीच फैलाती है।




 कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,मैं इसके तीन वाकया आपके सामने रखना चाहती हूं। आप सबको याद होगा कि कैसे चिलचिलाती हुई धूप में पैरों में छाले लिए हुए इस देश में चुनी सरकार ने पिछले साल श्रमिकों को अपने घर चलने को मजबूर किया। जब सोनिया गांधी जी ने, जो कांग्रेस की अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा कि हम इनका खर्चा वहन करेंगे, उस दिन इस टैक फोग की मदद से एक ट्रेंड चलाया गया था हैश टैग करके Congress against labourers और ये सारी डिजिटिल फुट प्रिंट आपको बयां करती है।




सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'''रात को तीन बजे उत्तर प्रदेश में झूठ परोसने के लिए 'कर्म योगी' चलने लगता है। जब कोरोना हो रहा था, तब तबलीगी जमात को बदनाम करने के लिए और एक दुष्प्रचार एक समुदाय विशेष के खिलाफ करने के लिए फिर टेक फॉग का इस्तेमाल हुआ था। तमाम वुमैन जर्नलिस्ट को गंदी-गंदी गालियां, भद्दी गालियां देने के लिए टेक फॉग का प्रयोग होता है। कई बार अगर एक ट्वीट करते हैं और अगर आप सरकार के खिलाफ थोड़ा बोल दीजिए तो आपके रिप्लाई में, आपको रिस्पोंस में तमाम अनर्गल, अनर्थक बातें, अभद्र टिप्पणियां, आपको जान की धमकी, सेक्सुअल कोनोटेशन ये सारे काम टेक फॉग जो बला है, वो करती है, जिसको भाजपा की आईटी सेल, भाजपा के नेता संरक्षण देकर चलवाते हैं।




 कांग्रेस प्रवक्ता श्रीनेत ने कहा कि,अब यहाँ पर ये बताना जरुरी है कि भाजपा का इससे क्या लेना-देना है। इस टेक फॉग के मैनेजर देवांग दवे नाम के एक सज्जन है। देवांग दवे नाम के वही सज्जन फडणवीस के ऑफिस में काम करते थे, वो भाजपा की आईटी सेल में थे। अभी थोड़े दिनों पहले तक वो भाजपा के युवा मोर्चा के नेशनल सोशल एंड मीडिया हैड थे। वो 'आई सपोर्ट नरेन्द्र मोदी' भी चलाते हैं, लेकिन ज्यादा दिक्कत की बात ये है कि चुनाव आयोग ने उनको कुछ वर्क सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दिया हुआ है। तो एक व्यक्ति जो भाजपा की आईटी सेल में रहकर इस तरह का दुष्प्रचार, इस तरह की नफरत, इस तरह की अश्लीलता, इस तरह की गालियां, इस तरह का नरेन्द्र मोदी जी का समर्थन करता है, उसको चुनाव आयोग किस तरह से काम दे सकता है, ये अपने आपमें एक दूसरा सवाल है, लेकिन देवांग दवे जी का इसमें बहुत ज्यादा टेक फॉग में योगदान है। 




श्रीनेत ने कहा कि,'टेक फॉग की गड़बड़ी क्या है, टेक फॉग की सबसे बड़ी गड़बड़ी ये है कि आपको पता ही नहीं चलता कि उनका सर्वर कहाँ है। क्योंकि इसको जियो एप्लिकेटर सर्वर बोलते हैं, वो कभी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर ट्रांसफर होता है, बहुत सारे लोग इस इन्फोर्मेशन को एक्सेस करते हैं। इस इन्फोर्मेशन को एक्सेस करने वाले लोगों में भारतीय जनता पार्टी है, उसका युवा मोर्चा है, भाजपा के तमाम नेता हैं, पर सबसे ज्यादा शर्म की बात है कि उसको एक्सेस करने वाले हमारे कुछ मीडिया के कुछ चैनल भी हैं, जो रोज शाम को दुकान लगाकर सिर्फ और सिर्फ नफरत परोसते हैं, सिर्फ और सिर्फ दुष्प्रचार करते हैं। उनका नाम लेकर उनको और ख्याति दिलाना मैं सही नहीं समझती हूं, लेकिन वो जानते हैं कि वो कौन हैं।



 कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,इसमें एक और समस्या की बात है और वो समस्या की बात ये है कि ये सिर्फ ट्विटर अकाउंट या फेसबुक तक ही सीमित नहीं है, ये आपके वॉट्सएप पर भी कब्जा कर लेता है। आपके वॉट्सएप पर अगर आपने वॉट्सएप अनइंस्टॉल कर दिया अपने फोन पर, तो इसके पास उसका कब्जा है। जिन लोगों को इंट्रव्यू किया वायर ने तथाकथित तौर से, उन लोगों ने बोला कि उनके पास ऐसे अकाउंट से मैसेज आए, जिन्होंने वॉट्सएप को इंस्टॉल ही नहीं किया था। तो ये वॉट्सएप से आपकी पूरी कॉन्टैक्ट लिस्ट, आपके लोगों को मैसेज भेजने का पूरा काम कर सकता है।




उन्होंने कहा,''शेयर चैट के माध्यम से जिन लोगों ने अपना शेयर चैट अकाउंट कुछ दिनों से यूज नहीं किया था, उन्होंने वायर को बताया कि उनके अकाउंट भी इस लिस्ट में आए। ये शेयर चैट के अकाउंट को भी हैक करके रीजनल लैंग्वेज में भाजपा के द्वारा परोसा हुआ आधा सच, पूरा झूठ टेस्टिंग होती है इसके माध्यम से। लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत तलब बात ये है कि 'पर्सिस्टेंस सिस्टम्स' नाम की जो कंपनी है और जिनके प्रमुख श्री आनंद देशपांडे जी यूआईडीएआई की गवर्निंग बॉडी में हैं, जो कि एक्चुअली भारत के नेशनल हेल्थ डेटा मिशन को डेवलप करने में मदद कर रही है, जिनके पास हेल्थ रिकोर्ड हैं सारे, उसका भी टेक फॉग से लेना देना है और वायर ने अपनी स्टोरी में बताया है कि कैसे उनके पास से कुछ डॉक्यूमेंट ‘पर्सिस्टेंस सिस्टम्स' लोगों के माध्यम से मिले, सूत्रों के माध्यम से जिन्होंने ये बताया कि पर्सिस्टेंस सिस्टम्स जो कि भारत का आधार का काम भी देख रहा है, नेशनल हेल्थ मिशन भी देख रहा है, यूआईडीएआई में उनकी गवर्निंग बॉडी में उनके प्रमुख भी हैं, उनका भी टेक फॉग से काफी लेना - देना है, काफी अंतरंग संबंध हैं।



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'''शेयर चैट का जो इन्वोल्वमेंट है, वो भी अपने आपमें सवाल उठाता है, मैंने दो कॉर्पोरेट का नाम लिया है, एक पर्सिस्टेंस सिस्टम्स', दूसरा शेयर चैट। शेयर चैट एक इंडियन स्टार्टअप है। इस स्टार्टअप का क्या दुरुपयोग किया जा रहा है, क्योंकि ये ट्विटर और स्नैप चैट से फंडेड प्रोमोटर एप है, तो ये भी स्पष्टीकरण आना जरुरी है। मुझे ऐसा लगता है कि जिस तरह से औरतों के खिलाफ दुष्प्रचार और शायद एक औरत होने के नाते मैं इस पब्लिक प्लेटफार्म से उन शब्दों का प्रयोग नहीं करूंगी, जिनके बेसेस पर कॉन्टैक्ट लिस्ट टेक फॉग ने बनाई हुई है। जैसे आप लोग अपने फोन पर कई बार ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाकर लोगों को मैसेज भेजते हैं, वैसे ही टेक फॉग के पास सेग्रिगेटेड लिस्ट बनी हुई है, जिनके माध्यम से वो लोगों तक पहुंच कर अपना मैसेज भेजते हैं। ये सेग्रिगेशन सोशल मीडिया प्लेटफार्म का भी है, वॉट्सअप, शेयर चैट का भी, उसमें तमाम सेग्रिगेशन हैं।




उन्होंने कहा,''तो सरकार की जो संलिप्तता है, वो पूरी तरह से साफ हो चुकी है, क्योंकि भारतीय जनता युवा मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी के सदस्य, उनके आईटी सेल के सदस्य वो सब इसमें संलिप्त हैं। तो हमारी अंत में कुछ मांगे हैं और कुछ सुझाव हैं।



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'''हमारी पहला सवाल तो है कि इतनी बड़ी रिपोर्ट आने के बाद भारत सरकार चुप क्यों है? पेगासस में भी आप चुप रहे, पेगासस में आपने अनरगल बातें करी, आज सुप्रीम कोर्ट उसकी तफ्तीश कर रहा है उसकी कमेटी बनाकर। भारत सरकार ने चुप्पी कब तोड़ने का फैसला किया है? भारत सरकार चुप क्यों हैं, क्योंकि भारत सरकार के आईटी टेलिकॉम के मिनिस्टर मेरी जानकारी के अनुसार कल लखनऊ में थे, बड़ी-बड़ी बातें कहकर चले गए। आज आप क्या कर रहे हैं, जब आपके सिटिजन के खिलाफ ये हो रहा है। तो सच तो यह है कि सरकार बताए कि सरकार क्या एक्शन लेने जा रही है इस पूरे मामले में, हालांकि सरकार की पूरी संलिप्तता है और मुझे ज्यादा आशा नहीं है कि सरकार कुछ ज्यादा करेगी, लेकिन फिर भी एक चुनी हुई सरकार से हम ये सवाल करते हैं और ये मांग करते हैं कि आप तुरंत एक्शन लीजिए इसके खिलाफ। 



श्रीनेत ने कहा कि,'उसके अलावा सुप्रीम कोर्ट क्योंकि पहले ही पेगासस के मामले में एक जांच समिति के द्वारा तफ्तीश हो रही है। सुप्रीम कोर्ट से हम आग्रह करेंगे कि उच्चतम न्यायालय इसका स्वत: संज्ञान ले और जो भी इसके पीछे है, उनको कड़ी से कड़ी सजा मिले, क्योंकि लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने की लगातार किसी को भी इजाजत नहीं मिल सकती, वो चाहे भारतीय जनता पार्टी, उनके दो रुपए के ट्रोल और उनके इस तरह के एप क्यों ना हों, जो टेक्नोलॉजी को भी बायपास करते हैं।


 कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'उसके अलावा जो देवांग दवे नामक सज्जन हैं, उनका स्पष्टीकरण आना जरुर जरुरी है भारतीय जनता पार्टी से, आप सत्ताधीन पार्टी हैं, इस देश की आंतरिक सुरक्षा का मामला है, इस देश में महिलाओं की अस्मिता का मामला है, इस देश में लोकतंत्र का मामला आपके लिए भी उतना ही गहन विषय है, जितना प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी के लिए है। साथ ही साथ जो दो कॉर्पोरेट का मैंने नाम लिया, पर्सिस्टेंस सिस्टम्स, जो आधार भी देता है, नेशनल हेल्थ मिशन भी देख रहा है, जिनकी गवर्निंग बॉडी में आनंद देशपांडे भी है, वो क्लेरिफाइ करे कि आपकी क्या भूमिका है टेक फॉग के साथ और शेयर चैट बिल्कुल स्पष्टीकरण दे कि क्या आपके अकाउंट का दुरुपयोग किया जा रहा है? क्या ये आपकी जानकारी के साथ ये हो रहा है, क्योंकि ऐसा होना, चाहे वो वॉट्सएप हो, चाहे वो शेयर चैट हो, चाहे वो ट्विटर अकाउंट हो, चाहे फेसबुक हो, ये कहीं ना कहीं अभिव्यक्ति की आजादी का हनन तो है ही, ये पूरी तरह से भ्रमित करने का, एक जालसाजी का, एक सरंचना रचकर दुष्प्रचार करने का सबसे बड़ा माध्यम बनता दिखाई दे रहा है।




एक प्रश्न पर कि किस तरह की जांच आप इस पर चाहते हैं, दूसरा द वायर की बात पर यकीन किया जाए, तो ये एक बड़ा नेक्सेस है, क्या कांग्रेस पार्टी इस बात पर विश्वास करती है?  श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सबसे पहले मैं आपके दूसरे सवाल का जवाब दूंगी कि क्या हम इसको ऑन करते हैं या नहीं करते हैं। एक रिसपेक्टेबल मीडिया एजेंसी ने ये खबर छापी है, उसमें उन्होंने सारे तथ्यों का हवाला दिया है, उसमें स्क्रीन शॉट है, उसमें सोर्स बेस्ड जानकारी है, जिसमें उन्होंने डॉक्यूमेंट के माध्यम से पुष्टिकरण किया है। अगर एक रिसपेक्टेबल मीडिया एजेंसी, जिसने पेगासस पर भी काम किया था और दो साल लगभग पूरी इस रिपोर्ट को छापने से पहले इस पर काम किया गया, अगर वो ऐसी एक रिपोर्ट छापती है, तो मैं इसका संज्ञान भी ना लूं और मैं इस पर कुछ ना कहूं, तो शायद गलत होगा। लेकिन चुनी हुई सरकार इस पर चुप्पी क्यों लगाए हुए है, वो अपने आप में ज्यादा प्रश्न उठाता है और प्रत्यक्षं किम् प्रमाणं, मैंने आपको जो तीन उदाहरण बताए, वो तो सिर्फ तीन उदाहरण है, ऐसे तीन हजार, तीन लाख उदाहरण है, जहाँ पर टारगेटिंग होती है। 




उन???होंने कहा,''आप मेरी ट्विटर टाइम लाइन पर देख लीजिए, अगर मैं कुछ डालती हूं सरकार के खिलाफ, तो पहली जो टारगेटिंग होती है, वो ऐसे ऑटोमैटिक हैंडल से होती है कि आपको समझ भी नहीं आता कि ये लोग हैं कौन और ये एक ही तरह की भाषा कैसे बोलते हैं, एक ही तरह की बात कैसे करते हैं। तो प्रत्यक्षं किम् प्रमाणं, मुझे तो लगता है कि बिल्कुल ये बात सही है और एक मीडिया एजेंसी ने ये खबर पब्लिक डोमेने में डाली है, तो क्या चुनी हुई सरकार आंख पर पट्टी बांधे रहेगी और डिनायल में ही रहेगी या इस पर अपनी चुप्पी तोड़ेगी? ये मेरा पहला जवाब है आपके दूसरे सवाल का। 



 कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ''जो आपने पहला सवाल पूछा कि हम क्या चाहते हैं। हम चाहते तो हैं कि सरकार इस पर अपनी चुप्पी तोड़े। आईटी और टेलीकॉम मिनिस्टर इस पर बताएं कि क्या हो रहा है, ये कैसे इस देश में हो रहा है? कैसे बिना ओटीपी के एक सॉफ्टवेयर है, जो आपके व्वाट्सएप पर, आपकी शेयर चैट पर, ट्विटर पर एक पूरा कब्जा कर लेता है और दुष्प्रचार फैलाता है, नफरत फैलाता है, औरतों के खिलाफ गंदी-गंदी गालियां देता है, भद्दी बातें करता है? तो ये तो बताना जरुरी है और सरकार क्योंकि नहीं बताएगी क्योंकि भाजपा की इसमें पूरी तरह संलिप्तता दिख रही है। जो वायर की रिपोर्ट है, उसके अनुसार तो भाजपा का ही ये किया धरा है, तो इसलिए हमारी सुप्रीम कोर्ट से मांग है कि इसका स्वत: सज्ञान लीजिए क्योंकि सच तो ये है कि भाजपा तो और सरकार तो पेगासस को भी डिनाइ कर रही थी। जब कोर्ट ने जांच समिति बना दी, तभी जाकर वो लोग भी शांत हुए। तो इसलिए मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट इसका संज्ञान ले, क्योंकि चुनी हुई सरकार से मेरी अपेक्षाएं कम हैं।




एक अन्य प्रश्न पर कि बहुत ही गंभीर मामला है, जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, क्या वहाँ से उम्मीद करें कि वो स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले में लीगल एक्शन लेंगी? श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मैं आपकी बात का थोड़ा सा स्टेप बैक करके, थोड़ा सा पीछे हटकर जवाब दूंगी। जब भी ऐसे गंभीर विषयों को, जब भी ऐसी गंभीर रिपोर्ट को, गंभीर आक्षेपों को पब्लिक डोमेन में लाया जाता है, तो एक यह सजेशन आता है कि सरकार अगर नहीं करेगी, तो आप अपनी राज्यों सरकारों से करा लीजिए। आपके सजेशन से मैं इंकार नहीं कर रही हूं, ना मुझे उससे कुछ आपत्ति है, लेकिन एक चुनी हुई केन्द्र में सरकार है, जिसके पास मेंडेट है, जिसके पास गवर्नेस का मेंडेट है, तो चुनी हुई केन्द्र सरकार क्या मूकदर्शक बनी रहेगी और राज्य सरकारें काम करेंगी? 



उन्होंने कहा,''मुझे ऐसा लगता है कि ये नेशनल सिक्योरिटी तक का मामला है, ये औरतों की अस्मिता का मामला है, यहाँ पर भाजपा की संलिप्तता दिख रही है, तो चुनी हुई सरकार इसमें चुप नहीं बैठ सकती और हम अपने राज्यों में काम कर रहे हैं। ये जो सजेशन आता है, इससे मुझे आपत्ति नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि ये गवर्नेस मॉडल को डिस्ट्रॉट करने वाली बात होती है। दिल्ली में बैठी हुई सरकार आखिर क्या करेगी, अगर सबकुछ ही राज्य सरकारें कर लेंगी? मेरा अपना मानना है कि जिस तरह का डोमेन इसमें चाहिए, वो केन्द्र सरकार के पास है और केन्द्र सरकार को छोड़कर अगर वो किसी के पास है, तो वो सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के पास है, इसलिए मैंने इन दो प्लेटफार्म पर मांग रखी है।




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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 25 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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