कृषि कानूनों के खिलाफ सड़क से संसद तक संग्राम जारी है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी रहने के बीच संसद में विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं| राज्यसभा में शुक्रवार को विपक्ष ने एक बार फिर किसानों के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला और कृषि कानून वापस लेने की मांग की।
भाजपा ने अपने राज्यसभा सांसदों को 8 फरवरी से 12 फरवरी तक सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राज्यसभा में सरकार का पक्ष रख रहे हैं। वे कृषि सुधार कानून और आंदोलन को लेकर आगे के रोडमैप को लेकर सरकार का रुख बता रहे हैं। कृषि मंत्री के बयान को लेकर विपक्ष के हंगामे के आसार हैं। इससे पहले गुरुवार को सत्ता और विपक्ष के बीच किसान आंदोलन को लेकर तीखी बहस देखने को मिली थी।
लाइव अपडेट
लोकसभा की कार्यवाही शाम छह बजे तक के लिए स्थगित
विपक्ष के भारी हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही साम छह बजे तक के लिए स्थगित हो गई है।
कृषि मंत्री ने सदन और देश को गुमराह करने का काम किया
कांग्रेस MP दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा,''आज कृषि मंत्री ने सदन और देश को गुमराह करने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पंजाब का आंदोलन है। परन्तु इस आंदोलन में हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान यहां तक की महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी किसान शामिल है|
क्षत्रिय समुदाय को मिलना चाहिए आरक्षण
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, 'मराठा, जाट, राजपूत और ठाकुर क्रमशः महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और यूपी में आरक्षण चाहते हैं। क्षत्रिय समुदाय की एक बड़ी आबादी है। जैसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, वैसे ही उन्हें भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।'
कांग्रेस MP दिग्विजय सिंह ने कहा,''प्रधानमंत्री जी ने किसानों के साथ बात करने के लिए 2 मंत्री लगाए। नरेंद्र सिंह तोमर जिनके पास खेती ही नहीं तो वो किसानी क्या जानते होंगे। दूसरे पीयूष गोयल जो कॉर्पोरेट सेक्टर के प्रवक्ता हैं:
-राज्यसभा की कार्यवाही 8 फरवरी को सुबह 9:00 बजे तक के लिए स्थगित हुई।
-कुछ लोग कानून में जो चीज नहीं है उसे किसानों के बीच परोसना चाह रहे हैं और इसमें सबसे ज़्यादा भूमिका विपक्षी पार्टियों की है। सदन में भी पार्टियां ऐसे बिंदु बोल रही हैं जिनका कानून से कोई लेना-देना नहीं हैः कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री
राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,''दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। खून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है, भारतीय जनता पार्टी खून से खेती नहीं कर सकती|
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,''भारत सरकार कानूनों में किसी भी संशोधन के लिए तैयार है इसके मायने ये नहीं लगाए जाने चाहिए कि कृषि कानूनों में कोई गलती है। पूरे एक राज्य में लोग गलतफहमी का शिकार हैं। किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन ले जाएंगे|
तोमर ने कहा,''मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा। मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है|
किसान की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के माध्यम से 6,000 रुपये का योगदान दिया। आज हम ये कह सकते हैं कि दस करोड़ 75 लाख किसानों को 1,15,000 करोड़ रुपये डीबीटी से उनके अकाउंट में भेजने का काम किया हैः केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
कुछ लोग मनरेगा को गड्ढों वाली योजना कहते थे। जब तक आपकी सरकार थी उसमें गड्ढे खोदने का ही काम होता था। लेकिन मुझे ये कहते हुए प्रसन्नता और गर्व है कि इस योजना की शुरुआत आपने की लेकिन इसे परिमार्जित हमने कियाः केंद्रीय कृषि मंत्री
कई बार विपक्ष की तरफ से ये बात सामने आती है कि आप कहते हैं कि सब मोदी जी की सरकार ने किया है पिछली सरकारों ने तो कुछ भी नहीं किया। मैं इस मामले में ये कहना चाहता हूं कि इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है| मोदी जी ने सेंट्रल हॉल में अपने पहले भाषण में और 15 अगस्त में भी उन्होंने कहा था कि मेरे पूर्व जितनी भी सरकारे थी उन सबका योगदान देश के विकास में अपने-अपने समय पर रहा है: राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गांव, गरीब और किसान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले कल में भी रहेगी: राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि सुप्रीम कोर्ट लंबे समय तक संवैधानिक मामले को लंबित रखता है। जब संवैधानिक मामले तत्काल सुनवाई और निर्णय की मांग करते हैं, तो न्यायपालिका द्वारा देरी संघर्ष, तनाव और अविश्वास पैदा करती है। मैं इस सदन से अपील करता हूं कि कानूनों की संवैधानिकता चाहे वह सीएए हो या कृषि कानूनों को तुरंत तय किया जाना चाहिए। संसद को इस पर ध्यान देना चाहिए।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा, किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने और न्याय पाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जो स्थिति पैदा हुई है, उसके लिए भारत सरकार जिम्मेदार है। मैं विरोध के दौरान मारे गए 194 किसानों को श्रद्धांजलि देना चाहता हूं। हम 26 जनवरी की हिंसा के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं। किसी को भी उन पर हमला करने का अधिकार नहीं है जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। लाल किले की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में एक मत हो, एक विचार हो ये ना संभव है ना स्वीकार्य है।
-शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि सरकार आंदोलन की एकजुटता तोड़ने में क्यों लगी है। जब किसान मुगलों से लड़े, अंग्रेजों से लड़े और कोरोना काल में लंगर बांट रहा था तो देशप्रेमी था। अब जब अपने हक की लड़ रहा है तो खालिस्तानी हो गया।
-बसपा सांसद ने कहा कि किसानों पर कानून थोपना गलत है। कृषि कानूनों में कई खामियां हैं। आप एमएसपी को कानून में क्यों नहीं डालते। कानूनों को थोपना ठीक नहीं है। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। 26 जनवरी की घटना निंदनीय है। तिरंगे का अपमान करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। देश में लगातार बेरोजगारी बढ़ रही है।
बहुजन समाज पार्टी के सांसद सतीश मिश्रा ने राज्यसभा में कहा, 'किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए आपने (सरकार) कंटीली तारें लगाई हैं। आपने यह उनके लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए किया है। आपने उनके पानी और बिजली की आपूर्ति और यहां तक कि शौचालयों को हटा दिया, यह सोचे बिना कि वहां महिलाएं भी हैं। यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। विरोध स्थलों के पास कीलें लगाई गई हैं। मुझे लगता है कि सरकार ने पाकिस्तान की सीमा पर इस तरह की तैयारी नहीं की होगी जैसा कि वह दिल्ली की सीमाओं पर कर रही है। अन्नादतों को राष्ट्र का शत्रु कहा जा रहा है। मैं आपसे अहंकार को दूर करने और तीन कानूनों को निरस्त करने का आग्रह करता हूं।'
-राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 10 विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने गुरुवार को पत्र लिखकर कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर हालात भारत-पाकिस्तान सीमा जैसे हैं और किसानों की स्थिति जेल के कैदियों जैसी है। शिरोमणि अकाली दल, द्रमुक, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस समेत इन पार्टियों के 15 सांसद को गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों से मिलने गए थे पर वह किसानों से नहीं मिल सके।