ई दिल्ली: संसद का बजट सत्र (Budget Session 2021) शुक्रवार से शुरू हो गया है। शुक्रवार को बजट सत्र शुरू होते ही लोकसभा एक फरवरी सोमवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। शुक्रवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है|
दो हिस्सों में चलने वाला यह सत्र 8 अप्रैल तक चलेगा। 15 फरवरी तक चलने वाले इस सत्र के पहले चरण की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने आज संसद में राष्ट्रपति रामनांथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर नारेबाजी की और प्लाकार्ड दिखाया।
कांग्रेस समेत देश के कई विपक्षी दलों ने आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बहिष्कार कर दिया है| कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ,नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, आम आदमी पार्टी, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस(एम) और एआईयूडीएफ ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया है|
बता दें आज सुबह बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सत्र का बहिष्कार करने का एलान किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, 'बीएसपी ने, देश के आंदोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज माननीय राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया। साथ ही, कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केंद्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाएं। इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई है। सरकार ध्यान दे।'
विपक्षी दलों ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने की घोषणा की है। इसपर केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, वे लोकतंत्र की गरिमा को धूमिल कर रहे हैं। संसदीय प्रणाली में, राष्ट्रपति की अपनी गरिमा होती है और उनके संबोधन का बहिष्कार करना उनका अपमान है।
विपक्ष के राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा,राष्ट्रपति का अभिभाषण गैर-राजनीतिक होता है इसमें शामिल होना चाहिए। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि वो इसका बहिष्कार कर रहे हैं
राष्ट्रपति के अभिभाषण का विपक्ष के बहिष्कार पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा,''ये कौन सी परंपरा है? यह आचरण बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ये अहंकार ठीक नहीं है। देश की संसदीय परंपरा का उल्लंघन हुआ है। हम इस पर गंभीर रोष प्रकट करते हैं। यह संसदीय परंपरा का अनादर है और हम इसे बिल्कुल अनुचित मानते हैं|
आप सांसद संजय सिंह ने कहा, 'कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। हमने राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया और किसानों के समर्थन में नारे लगाए। हमें सेंट्रल हॉल के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए हमने इसके गेट पर नारे लगाए। किसानों को देशद्रोही कहा जा रहा है। इसलिए, हमने संबोधन का बहिष्कार किया।'
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने का मतलब उनका अपमान करना नहीं है। हम किसानों के साथ खड़े हैं और मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। अभिभाषण के बहिष्कार के पीछे हमारा सबसे बड़ा कारण यही था। जब संसद में धन्यवाद प्रस्ताव और चर्चा होगी तो हम बहस करेंगे।'