नई दिल्ली: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों का समर्थन कर रही है और सरकारी खजाने की कीमत पर उन्हें लाभ दे रही है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार द्वारा अपने क्रोनी कैपिटलिस्ट दोस्तों का समर्थन और सहायता करना जारी है, जो बदले में पीएम के सभी पीआर कृत्यों को वापस लेते हैं और भाजपा के खजाने में बाढ़ लाते हैं।"खेड़ा ने आरोप लगाया कि अब लेन-देन के संबंध का पता चला है। इसमें एक दिवालिया कंपनी, प्रधानमंत्री के पसंदीदा 'बिजनेस बाबा रामदेव' और निश्चित रूप से भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि,''रूचि सोया ने 2017 में दिवालियापन की अर्जी NCLT में दाखिल की थी। उसी साल सितंबर में NCLT ने वह अर्जी स्वीकार कर ली| इस कंपनी ने ₹12,146 करोड़ का ऋण अलग-अलग बैंकों से लिया था, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक था, एसबीआई था व अन्य बैंक थे| जब सेटलमेंट की बात आई, तो सेटलमेंट के नाम पर इस देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई 883 करोड़ रुपए ले पाया। यानि 1816 करोड़ में से सिर्फ 883 करोड़ रुपए ही ले पाया, यानि मात्र 43% ही ले पाया|
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि,''दिवालिया घोषित होने के बाद एक स्टेज आई, जहां पर बोली लगी और दो बिडर्स सामने आये। एक पतंजलि और दूसरे अडानी। अंत में पतंजलि ने 4,350 करोड़ में रूचि सोया को खरीद लिया| रूचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि ने 3,250 करोड़ का ऋण लिया, यह ऋण एसबीआई और बाकी बैंकों से भी लिया|
पवन खेड़ा ने कहा,''आप देखिये कि जो कंपनी इन बैंकों का पैसा लेकर डूब गई, उस कंपनी को जब बेचने की स्थिति आई तो खरीदार ने भी इन्हीं बैंकों से ऋण लिया। इन 3,250 करोड़ में से 1200 करोड़ तो अकेले एसबीआई ने दिये| यही एसबीआई 1816 करोड़ रु में से 883 करोड़ रुपए ही हासिल कर पाया। लगभग 1000 करोड़ का वहां और 1200 करोड़ का यहां; लगभग 2200 करोड़ रूचि के डूबने और उसको खरीदवाने के लिए लगा|
उन्होंने कहा,''ऐसे माहौल में जब NPA के आंकड़े चौंका देते हैं, ऐसे माहौल में एसबीआई जैसा बैंक जिसकी देश में साख है, वो 2100-2200 करोड़ की चपत ले लेता है, सिर्फ पतंजलि के लिए, जिसकी इक्रा रेटिंग न के बराबर है| पहले एसबीआई ने पतंजलि को ऋण देने से मना कर दिया था। पहले इनकार, फिर इकरार; इस कहानी में कोई तीसरा एंगल भी है। इसमें तीसरे व्यक्ति का भी हस्तक्षेप है, जो बहुत अधिक पावरफुल है|
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,यह रामदेव का कौनसा बिजनेस मॉडल है कि 5 महीने में रूचि सोया का शेयर 17 रुपए से बढ़कर 1535 रुपए हो जाता है| जिस कंपनी की 2019 में वैल्यूएशन 4,350 करोड़ रुपए थी। आज उस कंपनी की वैल्यूएशन 35,360 करोड़ रुपए हो गई है। यह सब 2019 के बाद का आंकड़ा है|
उन्होंने कहा,''पीएम मोदी के साथ रामदेव की घनिष्ठता छिपी हुई नहीं है। पहले इक्रा रेटिंग नहीं होने के बावजूद बैंकों से लोन दिलवाया। भारत सरकार ने निर्णय लिया, एक्यूजेशन के बाद पाम ऑयल का एक्सपोर्ट रिस्ट्रिक्ट कर दिया जाये, कंट्रोल कर दिया जाये| भारत सरकार का ये एक निर्णय शेयर की कीमत को 17 रुपए से 1535 रुपए पर ले गया। यह एक कला होती है, यह बिजनेस मॉडल होता है|
अब तमाम तथ्य रखने के बाद कुछ सवाल करना चाहेंगे-
- तमाम बैंकों ने इतना बड़ा नुकसान सहकर रूचि सोया की सेटलमेंट कैसे होने दी?
- एसबीआई पर क्या दवाब था कि मात्र 43.6% की सेटलमेंट पर ही मान गया?
- एसबीआई पर किसका दवाब था कि जिस कंपनी में खुद का पैसा डूबा था, उसको खरीदने के लिए बगैर इक्रा रेटिंग कंपनी को लोन क्यों दिया?
-रूचि सोया पर 12,146 करोड़ का ऋण और 4 हजार करोड़ में खरीदी गई और आज 35,460 करोड़ रुपए उसकी कीमत हो गई। बैंकों को क्या मिला, इसका भी हमें उत्तर चाहिए?
-जिस तरह से शेयर बढ़े और जिस तरह से पाम ऑयल पर निर्णय हुआ, उसकी भी जांच होनी चाहिए। यह बताइये कि यह निर्णय किस परिस्थिति में लिया और किसको लाभ पहुंचाने के लिए लिया?