नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि,'' एक गंभीर मामला सामने आया है और उस पूरे मामले ने कहीं ना कहीं सरकार की बखियां उधेड़ कर रख दी है। जो सरकार और प्रधानमंत्री, 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' की बड़ी-बड़ी बातें करते थे, आज वो एक बार फिर पूरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''हां, मैं स्कैनिया (Scania) के घोटाले की बात कर रही हूं। स्कैनडिनवियन (Scandinavian) रिपोर्ट ने ये साबित किया है कि केन्द्र सरकार को और कुछ प्रांत की सरकारों को घूस दी गई थी, बस के कॉन्ट्रैक्ट के लिए लिए मैं मानती हं कि ये घोटालों की सरकार है। क्योंकि जब कोई घोटाला सामने आता है, तो पूरी तरह से चुप्पी आ जाती है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''मैं बार-बार कहती हं, pin drop silence, सई बटे सन्नाटा और ये बड़ा मामला है। हम जानना चाहते हैं कि ये किस केन्द्रीय मंत्री की बात हो रही है, क्योंकि एक केन्द्रीय मंत्री (नितिन गड़करी) के ऑफिस से एक अदना सा स्टेटमेंट रिलीज हुआ है? लेकिन साक्ष्य दिखाते हैं कि जो भ्रष्टाचा?? है, वो पूरी तरह से व्यापक था, पूरी तरह से व्याप्त था।
जो-जो लोग उस कंपनी से मिल रहे थे, उसकी अभी हम आपके साथ तस्वीरें साझा करेंगे, क्योंकि बताना जरुरी है कि जो जग जाहिर था भ्रष्टाचार, उसमें कौन-कौन लिप्त था? कौन सी वो प्रांतीय सरकारें थी, केन्द्र सरकार ने उस पर क्या एक्शन लेने की कोशिश की? क्यों चुप हैं आज मोदी जी? आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे कि 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा'। आपने तो कुछ खाने से छोड़ा ही नहीं है।
ये एक सत्य है। और ये भी सत्य है कि सरकार को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए, इसलिए क्योंकि जिसने रिश्वत दी, वो स्वीकार कर रहा है। रिपोर्ट उस कंट्री की स्वीकार कर रही है कि रिश्वत दी गई। जिसने रिश्वत ली, वो मुँह में दही जमाए बैठा है, वो एक शब्द नहीं कहना चाहता है। तो ऐसा चलेगा नहीं, क्योंकि यहाँ पर पब्लिक मनी, पब्लिक एकाउंटेबिलिटी ये सब चीजें शामिल हैं और सरकार को अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ेगी। मैं आपके साथ कुछ साक्ष्य और कुछ तस्वीरें जरुर साझा करना चाहती हूं।
कुछ तस्वीरें हैं, इसमें आपको सरकार के तमाम मंत्री, अगर आप लोग जूम इन कर लें, तो मैं अनुगृहित रहूंगी। सरकार के तमाम मंत्री, उस कंपनी के साथ सांझा हो रहे हैं। (तस्वीर दिखाते हुए श्रीनेत ने कहा ) ये प्रधानमंत्री महोदय जी हैं, गले लग रहे हैं, हाथ मिला रहे हैं, जैसे कि उनकी शैली रहती है। ये स्कैनिया के सीईओ हैं, जिनके साथ प्रधानमंत्री महोदय जी की तस्वीरें हैं। यहाँ पर आपको राजस्थान की पूर्व चीफ मिनिस्टर दिख रही हैं।
यहाँ पर आपको रोड़ एंड सरफेस ट्रांसपोर्ट के मंत्री नितिन गड़करी जी दिख रहे हैं। अगर आप और आगे बढ़िएगा, तो फिर से प्रधानमंत्री जी हैं। यहाँ पर आपको कानून मंत्री, रविशंकर प्रसाद जी दिख रहे हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, बड़बोले हैं, जरा इसके कुछ बताएंगे कि रिश्वत किसने ली है? और जब कंपनी कहती है कि रिश्वत दी गई है, तो क्या एकाउंटेबिलिटी होनी चाहिए सरकार की? रिश्वत किसने ली है, इसके बारे में कौन बताएगा हमें? ये तस्वीर नितिन गड़करी जी की है।
मैं वापस जाना चाहूंगी, जो तस्वीरें खुलकर सामने आई हैं, मोदी जी की, प्रांतीय सरकारों की, सरफेस ट्रांसपोर्ट मंत्री की, जिस तरह का दोषारोपण हुआ है। ये एक गंभीर मामला है और गंभीर मामला इसलिए है क्योंकि ये मामला कहीं ना कहीं दिखाता है कि रिश्वत का ये फेर लंबा था। रिश्वत का ये फेर इसलिए लंबा था, क्योंकि इसमें रिश्वत दी गई है, कंपनी ने ये स्वीकारा है और सरकार ने अभी तक इस पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की ज्यूडिशियल जांच हो। एक अदना सा स्टेटमेंट किसी मंत्री के ऑफिस से स्वीकार्य नहीं है। ये पब्लिक लाइफ में प्रोबिटी, ये पब्लिक लाइफ में एकाउंटेबिलिटी, पब्लिक लाइफ में स्वच्छता का मामला है। ये आक्षेप सीधा-सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय तक जाता है और इस पर वो चुप्पी नहीं रख सकते हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि- ये रिपोर्ट जो है, ये स्कैनडिनवियन की प्रेस ने स्कैनडिनवियन गवर्मेंट के सामने प्रस्तुत की है। जो साक्ष्य भी हम बता रहे हैं, जो आपने बसों के नंबर दिए हैं, ये वहीं से आए हैं। मैं उस रिपोर्ट को क्यों कोट करूं, क्योंकि वो हमारी रिपोर्ट नहीं है, वो एक पर्टिकुलर रिपोर्ट है, वो सार्वजनिक रुप से अवेलेबल है।
जहाँ तक आपने नितिन गड़करी जी की बात है, हाँ, क्योंकि वो मुख्यत: मंत्री हैं सरफेस ट्रांसपोर्ट के, उनको तो जवाब देने की जरुरत है ही। लेकिन क्या इससे आप मोदी जी को बक्श देंगे? क्या रविशंकर प्रसाद जी, क्या उनके वेरियस मुख्यमंत्री चुप बैठेंगें? हां, नितिन गड़करी जी को जवाब देना पड़ेगा और उनके ऑफिस से एक अदना सा स्टेटमेंट जवाब नहीं हो सकता है। लेकिन हमने आपको साक्ष्य यहाँ पर प्रस्तुत किए हैं कि किस तरह से इंडियन गवर्मेंट के आला अधिकारी, आला मंत्री और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री महोदय जी भी इस पूरी संरचना का हिस्सा थे। और अगर ऐसे मामले में मोदी जी की तस्वीरें सामने आई हैं, स्कैनिया के सीईओ के साथ, तो वो एक्सप्लेन तो करें कि क्या बातचीत हो रही थी? क्योंकि जो रिपोर्ट है, वो कहती है कि केन्द्र सरकार को, राज्य सरकारों को घूस दी गई।
एक कंपनी एक्सेप्ट कर रही है कि उसने घूस दी, लेकिन विरोधाभास ये है कि जिसको घूस दी गई, वो चुप बैठा हुआ है, उसने मुँह पर पट्टी बांधी हुई है। तो मुझे ऐसा लगता है कि सार्वजनिक जीवन में होने के नाते हर व्यक्ति को ईमानदारी से आगे आकर साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए। इसके बारे में क्लेरिफिकेशन देना चाहिए और इसको फिर से जो कॉरपेट के नीचे ब्रश कर दिया जाता है। इसको हर तरह से हटा दिया जाता है मामला, धीमे से उसको गायब कर दिया जाता है। वो नहीं हो सकता है, क्योंकि ये पब्लिक लाइफ का मामला है, इसकी उंगली सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक उठी है।
बढ़ती महंगाई पर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुश्री श्रीनेत ने कहा कि मैं खुश हूं कि आपने मुद्दे की बात की। एडिबल ऑयल की कीमत 95 रुपए होती थी, अब 150 रुपए में मिल रहा है। लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है, इसके बारे में कोई मीडिया बात नहीं कर रहा है और मैं आज मीडिया में होने के नाते भी थोड़ा सा मीडिया को खरी-खोटी सुनाऊंगी और इसलिए सुनाऊंगी क्योंकि जब हम भी मीडिया में होते थे, तो हम बढ़ती कीमतों पर बड़ी हाय तौबा मचाते थे।
आज वही मीडिया के एडिटर न्यूज चैनल पर बैठकर या एडिटोरियल लिखकर ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई बात नहीं अगर महंगाई है। आप राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर रहे हैं। तो जब पहले महंगाई का आप विरोध करते थे और भाजपा भी करती थी, तो क्या आप तब देशद्रोह कर रहे थे, आप राष्ट्रद्रोह कर रहे थे? महंगाई सबसे बड़ा अभिशाप है, महंगाई सबसे बड़ा पाप है। आप एडिबल ऑयल की बात कर रहे हैं।
एक खबर आई है, एक समाचार पत्र में कि एफएमसीजी कंपनियाँ, जो कंपनियाँ साबुन, तेल, शैंपू, दांत का मंजन इत्यादि बनाती हैं, उन कंपनियों ने भी दाम बढ़ाने शुरु कर दिए हैं, क्योंकि रॉमैटेरियल के प्राईस बढ़ गए हैं और एफएमसीजी का दाम तब बढ़ता है जब महंगाई सर के ऊपर से गुजरने लगती है और एफएमसीजी ने, क्योंकि उनका रॉमैटिरियल का कोस्ट इतना बढ़ गया है, वो कहते हैं, विवश है दाम बढ़ाने के लिए और एफएमसीजी का बढ़ता दाम हर उस व्यक्ति को प्रभावित करेगा, जो मंजन करता है इस देश में। वो देश का सबसे अमीर आदमी है और उस पंक्ति में, गरीबों की पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा गरीब व्यक्ति है।लेकिन उसके बारे में कोई बात नहीं होगी।
100 रुपए पर पेट्रोल बिक रहा है, उसके बारे में कोई बात नहीं होगी। चुनाव आएंगे तो दाम बढ़ने बंद हो जाएंगे। चुनाव चले जाएंगे तो आपकी कमर फिर तोड़ी जाएगी। एलपीजी का सिलेंडर 225 रुपए बढ़ जाता है, 6 बार दाम बढाए गए हैं तीन महीने में। किस चीज का बदला आप देशवासियों से ले रहे हैं...? ये देशवासी आपके कुप्रबंधन के बावजूद कोरोना में आपके साथ खड़े रहे।
2 लाख के करीब लोगों की मौत हो गई, फिर भी आपका इस देश ने साथ दिया, आपका हाथ पकड़ा। आप देश से किस चीज का बदला ले रहे हैं? अगर वाकई में आप देश का भला चाहते हैं तो पेट्रोल,डीजल और एलपीजी की कीमतों को घटाइए, जब ये कीमतें घटेंगी, अपने आप एफएमसीजी खाद्य पदार्थों की कीमतें भी घटेगी। आप रीडिंग ले लीजिए, जो लोग यहाँ पर अर्थशास्त्र ट्रेक करते हैं या जो नहीं भी करते हैं, फूड एंड फ्यूल इन्फ्ले शन तो जबरदस्त बढ़ ही रहा है, लेकिन जो कोर इन्फ्लेशन होता है, जो फूड एंड फ्यूल को छोड़कर होता है, वो साढ़े 6 प्रतिशत आया जनवरी में और वो निरंतर बढ़ता जा रहा है। ये बहुत बड़ी भयावह सिचुएशन होने वाली है।
आरबीआई ने दबी जुबान में इसका उल्लेख भी किया है। तो मुझे लगता है कि महंगाई एक बहुत बड़ा मुद्दा है। महंगाई वही डायन है, लेकिन ऐसा लगता है कि मोदी सरकार में वो डार्लिंग बन चुकी है, डायन नहीं है।