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24 अगस्त 2026

फ्री स्पीच से निपटने के लिए मोदी सरकार का 'उत्तर कोरियाई' दृष्टिकोण सर्वविदित: IT नियमों में संसोधन पर कांग्रेस बोलीं - लोकतंत्र की ऑक्सीजन नली को काट रही सरकार

नई दिल्ली: कांग्रेस ने गुरुवार 19 जनवरी 2023 को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के मसौदे में नए संशोधन को “अभिव्यक्ति की आजादी पर चोरी- छिपे हमला” करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। इसमें सोशल मीड…

फ्री स्पीच से निपटने के लिए मोदी सरकार का 'उत्तर कोरियाई' दृष्टिकोण सर्वविदित: IT नियमों में संसोधन पर कांग्रेस बोलीं - लोकतंत्र की ऑक्सीजन नली को काट रही सरकार
फ्री स्पीच से निपटने के लिए मोदी सरकार का 'उत्तर कोरियाई' दृष्टिकोण सर्वविदित: IT नियमों में संसोधन पर कांग्रेस बोलीं - लोकतंत्र की ऑक्सीजन नली को काट रही सरकार | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:  कांग्रेस ने गुरुवार 19 जनवरी 2023 को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के मसौदे में नए संशोधन को “अभिव्यक्ति की आजादी पर चोरी- छिपे हमला” करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। इसमें सोशल मीडिया कंपनियों को उन समाचार लेखों को हटाने के लिए कहा गया है, जिन्हें पत्र सूचना कार्यालय द्वारा “फर्जी” माना गया है। कांग्रेस ने कहा कि संसद के आगामी सत्र में नियमों पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस ने कहा,“डिजिटल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार की बुरी नजर पड़ गयी है।  IT रूल में चालाकी से बदलाव लाए जा रहे हैं। किसी भी खबर को PIB द्वारा झूठा बताए जाने पर सरकार उसे डिजिटल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा सकती है। मतलब - मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है। कांग्रेस ने कहा,“सरकार खुद जज, खुद ज्यूरी और खुद ही पर फैसला सुनाएगी। यह सरकार लोकतंत्र की ऑक्सीजन नली को काट रही है और चाहती है कि जितनी जल्दी लोकतंत्र खत्म हो जाए उतना अच्छा।




भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरना-प्रदर्शन पर  AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) संचार विभाग के मीडिया एवं प्रचार चेयमैन पवन खेड़ा ने कहा,“आज पूरा भारत अपनी बेटियों को लेकर चिंतित है। पूरा भारत, माइनस (-) भारत के प्रधानमंत्री, वो चिंतित नहीं हैं, वो चुप हैं, जैसे कि अकसर ऐसे मौकों पर चुप हो जाते हैं और चुप ही रहना पसंद करते हैं। मोदी सरकार, भाजपा सरकार की चिंता कभी ये नहीं रहती कि कैसे समस्या को खत्म किया जाए, उसका निराकरण किया जाए। उनकी चिंता रहती है कि समस्या को कैसे खबर बनने से रोका जाए, खबरों में आने से रोका जाए। वो चीन का इनकर्सन ( Incursion) हो लद्दाख में, अरुणाचल में, वो जो हमारी बेटियों के साथ हो रहा है, रेसलिंग फेडरेशन (Wrestling Federation) वाला मसला अब आपके सामने है। पूरा विश्व देख रहा है, वो मसला हो, वो जोशीमठ का मसला, हो तो इसरो को आदेश कर दिया जाता है कि अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक मत कीजिए। मीडिया को कैसे दबाया जाए, कैसे पहले जैसे मीडिया जो मेन स्ट्रीम मीडिया हो, उसको दबाने की चेष्टा की जाती है, लगातार की जाती है, उनके मालिकों के साथ मिलकर की जाती है। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया इन सब पर भी सरकार की कु-दृष्टि पड़ गई है।



अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा,“ जो आईटी रुल्स का फुल फॉर्म मुझे लगता है अब बदल देना चाहिए, अब ये इमेज टेलरिंग रूल हो गया, जो संशोधन ये सरकार ला रही है आईटी रूल में, वो सिर्फ और सिर्फ अपनी छवि को कैसे बचाया जाए, सच से कैसे बचाया जाए इस सरकार को, देश के सामने कैसे सच छुपाया जाए, ये संशोधन इसलिए लाए जा रहे हैं। तो आईटी नियम 2021 में संशोधन का जो मसौदा है, उसके परामर्श की तारीख इन्होंने 25 जनवरी तो कर दी, लेकिन चालाकी से उसमें कुछ दो लाइनें जोड़ दी।  वो मैं लाइनें पढ़ता हूं।


- मोदी सरकार के लिए " IT Rules" का मतलब है “ Image Tailoring " Rules !”

-मोदी सरकार ऑनलाइन खबरों का 'फैक्ट चेक' करेगी तो केंद्र सरकार को 'फैक्ट चेक' कौन करेगा ?

इंटरनेट का गला घोंटना और पीआईबी के माध्यम से सेंसर करना मोदी सरकार की 'फैक्ट चेकिंग' की नई परिभाषा है !


मोदी सरकार अब सोशल मीडिया पर लगाम लगाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है

पवन खेड़ा ने कहा,“सत्ता के अहंकार में चूर मोदी सरकार अब सोशल मीडिया पर लगाम लगाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है! मोदी सरकार 'ऑनलाइन सामग्री विनियमन में 'न्यायाधीश, जूरी और निष्पादक' की भूमिका में खुद का अभिषेक किया है। ये एक अभूतपूर्व कदम है, जिसमें ऑरवेलियन 'बिग ब्रदर सिंड्रोम' की बू आती है!



उन्होंने कहा,“आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन के मसौदे के लिए परामर्श अवधि को 25 जनवरी 2023 तक बढ़ाते हुए, मोदी सरकार ने चालाकी से एक प्रावधान जोड़ा है। इसमें कहा गया है कि कोई भी समाचार रिपोर्ट जिसे पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के 'फैक्ट चेकिंग यूनिट' द्वारा ' झूठा', 'बेबुनियाद' या 'नकली' माना जाएगा, उसे सरकार द्वारा सोशल मीडिया / ऑनलाइन वेबसाइटों/ ओटीटी प्लेटफार्मों से हटाया जा सकता है।



सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के संशोधित संस्करण के नियम 3(1) (बी) (v) में कहा गया है कि platforms "shall make reasonable efforts to cause the user of its computer resource not to post content" that has been "identified as fake or false by the fact check unit at "Press Information Bureau of the Ministry of Information and Broadcasting or other agency authorised by the Central Government for fact checking or, in respect of any business of the Central Government (अनुलग्नक Annexure A 1) सरला भाषा में कहे तो - सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो को अगर कोई भी ऑनलाइन सामग्री ग़लत लगेगी, उसे अधिकृत ढंग से हटा सकती है।


मीडिया' के बाद अब इसे 'गोदी सोशल मीडिया' बनाना चाहती है मोदी सरकार

उन्होंने कहा,“इसका सीधा मतलब है कि PIB की फैक्ट चेकिंग यूनिट ऐसी सामग्री को हटाने में जज बन गई है जो शायद मोदी सरकार की छवि के अनुकूल नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि PIB की फैक्ट चेकिंग यूनिट ऐसी सामग्री को हटाने में जज बन गई है जो शायद मोदी सरकार की छवि के अनुकूल नहीं है। यहां तक कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी कल एक बयान जारी कर नियमों में इस कपटपूर्ण प्रविष्टि के बारे में "गहरी चिंता" व्यक्त की। 'केंद्र सरकार के किसी भी व्यवसाय के संबंध में' - इन शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि "इससे सरकार की वैध आलोचनापर पाबंदी लगेगी और सरकार को प्रेस के प्रति जवाबदेह ठहराने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा "।



मोदी सरकार के लिए प्रेस पर बुलडोजर चलाना कोई नई बात नहीं है। 'गोदी मीडिया' शब्द अब अधिकांश भारतीयों के मन में घर कर चुका है और अब यह सरकार इसे 'गोदी सोशल मीडिया' बनाना चाहती है !

पवन खेड़ा ने कहा,“कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 202 के बारे में कई सवाल उठाए हैं, जिसमें हमने कहा है कि ये नियम ऐतिहासिक श्रेया सिंघल मामले द्वारा सोशल मीडिया को दिए गए सभी सुरक्षा उपायों और सुरक्षा के खिलाफ हैं। ये नियम सरकार की बेईमानी, बेरहमी और बेदर्दी को बड़ा स्पष्ट दर्शाते हैं। विचारों की अभिव्यक्ति और निजता, Freedom of speech & expression and privacy - अगर ये दो मील पत्थर, जो एक नींव है किसी भी गणतंत्र के, उनके प्रति इस सरकार का रवैया कितना निर्दयी है, निष्ठुर है और निर्मम है, वो ये कानून या ये नियम दर्शाते हैं।



पीआईबी की फैक्ट चेकिंग यूनिट (एफसीयू) मोदी सरकार की छवि को बचाने के लिए 'सच' को 'फर्जी' में बदलने की आदतन अपराधी रही है। कुछ बड़े उदाहरण हैं :-

1) 13 नवंबर, 2022 को - पीआईबी ने एक झूठा ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें श्री राहुल गांधी के वीडियो - 'रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है', उसको 'नकली' कहकर चिह्नित किया गया है।


भारत जोड़ो यात्रा के संलग्न वीडियो में, श्री राहुल गांधी को 'दक्षिण मध्य रेलवे कर्मचारी संघ' के सदस्य श्री भरणी भानु प्रसाद द्वारा बताया जा रहा था कि "रेलवे स्टेशनों, कार्यशालाओं, चिकित्सा केंद्रों और प्रतिष्ठानों का निजीकरण किया जाएगा । "। यह श्री गांधी की "भारतीय रेलवे के किस हिस्से का निजीकरण किया जा रहा है?" द्वारा प्रश्न का जवाब था। पीआईबी ने आम लोगों और रेलवे कर्मचारियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में एक स्वतंत्र चर्चा को "फेक न्यूज" के रूप में बदल दिया। कल अगर इन आईटी नियमों को लागू किया जाता है, तो प्रमुख विपक्षी दल के एक नेता के इस ट्वीट को हटा दिया जाएगा, जो लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है।


2) पीआईबी ने उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स के बारे में अपने कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा कारणों से अपने मोबाइल से 52 चीनी ऐप हटाने के निर्देश देने वाली खबर को "फर्जी खबर" करार दिया। पर सच ये निकला की ये खबर सही थी और एसटीएफ के आईजी श्री अमिताभ यश ने इसकी पुष्टि की थी। केंद्र सरकार ने 10 दिनों के भीतर ऐसे ही कारणों से 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया।


3) इसी तरह, 2 जून, 2020 को - पीआईबी के एफसीयू ने एलएसी सीमा के भारतीय पक्ष में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बारे में उसे 'झुठलाते' हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ था। दो महीने बाद, रक्षा मंत्रालय के एक दस्तावेज़ में कहा गया कि चीनी पक्ष ने मई 2020 में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी। तब से, चीन ने पूर्वी लद्दाख में अवैध रूप से कब्जा करना जारी रखा है, और हमने कई मौकों पर इसे उजागर किया है। 




पवन खेड़ा ने कहा,“फ्री स्पीच से निपटने के लिए मोदी सरकार का 'उत्तर कोरियाई' दृष्टिकोण सर्वविदित है.

> वास्तविक फैक्ट चेकर्स को दुर्भावनापूर्ण मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किया गया है, जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसे रिहा किया गया, तब देश को सच्चाई का ज्ञात हुआ ।

> हम सभी को याद है कि किसान आंदोलन के दौरान कितने ट्विटर यूजर्स को निशाना बनाया गया था।

> राष्ट्र यह नहीं भूला है कि एक समाचार पत्रिका 'कारवां इंडिया' पर किस तरह से हमला किया गया था।

> कोई भी नहीं भूला है कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन के साथ रोगियों की मदद करने वाले युवाओं के खिलाफ देशद्रोह के आरोप सहित कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी, जब COVID-19 लहर अपने चरम पर थी।

> 2021 में, दिल्ली पुलिस ने 17 प्राथमिकी दर्ज की और पीएम मोदी की आलोचना करने वाले पोस्टर के लिए 15 लोगों को गिरफ्तार किया।

> ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले 50 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था या उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई थी या उनकी कोविड- 19 रिपोर्ट के लिए उन पर शारीरिक तौर से हमला किया गया था।



पवन खेड़ा ने कहा,“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सेंसरशिप पर इस हमले की कड़ी निंदा करती है। हम मांग करते हैं कि ड्राफ्ट आईटी नियमों में नए संशोधन को तुरंत वापस लिया जाए और संसद के आगामी सत्र में इन नियमों पर विस्तार से चर्चा की जाए।



हम लोग चिंतित हैं, प्रधानमंत्री चुप हैं: बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों पर पवन खेड़ा

रेसलिंग फेडरेशन के संदर्भ में पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि कोई और संजीदा संवेदनशील सरकार होती तो कल रात को इस्तीफे हो चुके होते और प्रधानमंत्री जी का ट्वीट तो आ ही चुका होता। जो ब्राजील तक पर ट्वीट कर देते हैं, ब्राजील में पहले दंगा नहीं होता, पहले प्रधानमंत्री का ट्वीट आ जाता है कि दंगों से बड़ी चिंता है उन्हें और इस्तीफे होते, प्रधानमंत्री का खेल मंत्री का स्टेटमेंट आता। हम सब साधारण परिवारों से निकल कर संघर्ष करके हमारे बच्चों को भेजते हैं मेडल जीतने, ट्रेनिंग लेने, वो विश्वास टूट रहा है और प्रधानमंत्री को इसकी बहुत बड़ी चिंता होनी चाहिए, क्योंकि पूरा 'विश्व देख रहा है कि इस देश में बच्चों के साथ क्या रहा है। हम तो हैरान हैं कि ये चुप कैसे हैं 24 घंटे में। अब तक चुप क्यों बैठे हैं, बेटियां बैठी हैं जंतर-मंतर पर । आप लोग चिंतित हैं, हम लोग चिंतित हैं, प्रधानमंत्री चुप हैं, क्यों नहीं हो रहे हैं इस्तीफे?



एक अन्य प्रश्न पर कि बबीता फोगाट को भेजा है सरकार की तरफ से खिलाड़ियों से मिलने के लिए अभी जंतर-मंतर पर, क्या कहेंगे, श्री खेड़ा ने कहा कि वो सब करिए आप, करना चाहिए । इस्तीफा क्यों नहीं हो रहा? विश्वास कैसे स्थापित होगा लोगों का? जब इतने स्पोर्टस पर्सनस, इतनी स्पोर्टस वुमेन खुलकर आरोप लगा रहीं हैं, तो आपकी हिचक क्या है, उस व्यक्ति का इस्तीफा लेने में? और आपकी क्या हिचक है आप क्यों नहीं खुलकर सामने बोलते हो? 4 साल आपका असली चेहरा दिखता है, चुनाव के साल में आप मुखौटा पहन लेते हो, ये आपकी असलियत है। तो अब तो चुनाव का साल आ ही रहा है, मुखौटा अब पहन लीजिए न । न आपने टेनी जी का इस्तीफा लिया। आपको इस्तीफा लेने में क्या दिक्कत आती है। कुलदीप सिंह सेंगर हो, चिन्मयानंद हो, विनोद आर्य, पुलकित आर्य हो, एक उदाहरण थोड़े ही है, अनेक उदाहरण हैं जहाँ बेटियों पर अत्याचार करने वाले को प्रश्रय आप देते हैं, आपकी शरण में है वो और आप कोई कदम नहीं उठाते, उनका इस्तीफा नहीं लेते और उल्टा उनको बचा रहे हो।




'..भाजपा का टूलकिट': त्रिपुरा में कांग्रेस की बाइक रैली पर हुए जानलेवा हमला मामले पर पवन खेड़ा

त्रिपुरा में कांग्रेस प्रभारी डॉ अजय कुमार पर आक्रमण के संदर्भ में पूछे अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री खेड़ा ने कहा कि ये दर्शाता है भाजपा का टूलकिट । मैं अभी अपनी प्रेस वार्ता में इन्हीं के टूल किट का हिस्सा बता रहा था कि कैसे आवाजों को दबाया जाता है और जब वो नहीं दबा सकते, क्योंकि त्रिपुरा की हालत हमारे डॉ. अजय कुमार, ज़रिता जी, ये सब लोग लगातार एक्सपोज कर रहे हैं वहाँ सरकार को। तो जब वो उनको चुप नहीं करा पाते, तो हिंसा का सहारा लेते हैं। चुनाव आयोग क्यों मौन है, ये अभी आपको जानना होगा, आपको भी पूछना चाहिए कि चुनाव आयोग मौन क्यों है? हमारी एक डेलिगेशन आज त्रिपुरा में चुनाव आयोग से वहाँ मिल रही है और यहाँ भी हम लोगों ने समय मांगा है, शायद आज या कल में जब हम चुनाव आयोग के पास जाएंगे, उनके दरवाजे पर दस्तक देंगे और हमारी बात वहाँ रखेंगे और आपसे भी साझा करेंगे। लेकिन ये चिंता का विषय है कि चुनाव घोषित होने के दिन लोकतंत्र पर पहला हमला किया जाता है। एक तरह से ये मैसेज दिया जा रहा है, संदेश दिया जा रहा है वोटर्स को कि जिसकी लाठी, उसकी भैंस। जिसकी लाठी, उसकी भैंस तो लोकतंत्र में चलता नहीं है, ना हम चलने देंगे, ना आप लोग चलने देंगे, ना चुनाव आयोग को चलने देना चाहिए।




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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 19 जनवरी 2023 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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