नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''देश के पूर्व सैनिकों व तीनों सेना के जवानों व अधिकारियों को 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) न देना सीधे-सीधे देश के 30 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों तथा देश की सेनाओं के साथ विश्वासघात है। सुरजेवाला ने कहा कि,''भाजपा व मोदी सरकार सैनिकों की वीरता और बलिदान के नाम पर वोट तो बटोरती है, पर उन्हें 'वन रैंक, वन पेंशन' दिए जाने का विरोध करती है। यही नहीं OROP के इस अधिकार को अब सुप्रीम कोर्ट से भी मोदी सरकार ने यह कहकर खारिज करवा दिया कि यह नीतिगत निर्णय है, कानूनी अधिकार नहीं।
'वन रैंक, वन पेंशन' के तथ्य
1. साल 2004 से 2012 के बीच, यूपीए-कांग्रेस की केंद्र सरकार ने तीन बार सेनाओं की पेंशन बढ़ाई और 7,000 करोड़ का अतिरिक्त फायदा किया।
2. 17 फरवरी, 2014 को देश की संसद में बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्तमंत्री, श्री पी. चिदंबरम ने 'कोशियारी कमिटी' के अनुरूप 01 अप्रैल, 2014 से 'वन रैंक, वन पेंशन' देने के निर्णय की घोषणा की।
3. 26 फरवरी, 2014 को कांग्रेस के तत्कालीन रक्षामंत्री, श्री ए. के. एंटनी ने एक बैठक कर निर्णय किया कि सेनाओं में एक समान समय तक सेवा करने के बाद एक ही रैंक से रिटायर होने वाले सभी सैनिकों को एक समान पेंशन दी जाएगी, फिर चाहे उनकी रिटायरमेंट की तारीख अलग-अलग क्यों न हो और भविष्य में पेंशन वृद्धि का लाभ भी सभी पुराने पेंशनधारकों को मिलेगा।
4. 24 अप्रैल, 2014 को यूपीए-कांग्रेस सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा OROP के आदेश को दोहराते हुए इसे लागू करने के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन कर दिया गया। यही नहीं, OROP लागू करने की सारी व्याख्या का भी निर्णय कर दिया गया और इस बारे एक व्यापक निर्देश जारी किया गया|
5 23 अक्टूबर, 2014 को सियाचिन ग्लेशियर पर दीवाली के मौके पर प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने व 10 जुलाई, 2014 की बजट स्पीच में तत्कालीन वित्तमंत्री, श्री अरुण जेटली ने भी 'वन रैंक, वन पेंशन' लागू करने की बात को दोहराया। पर 7 नवंबर, 2015 को एक नया आदेश जारी कर मोदी सरकार ने 'वन रैंक, वन पेंशन' को 'वन रैंक, पाँच पेंशन' बना दिया तथा सभी 'प्रिमैच्योर रिटायर होने वाले सैनिकों को 'वन रैंक, वन पेंशन' से वंचित कर दिया।
ज्ञात रहे कि 46 प्रतिशत सैनिक प्रिमैच्योर रिटायरमेंट ले लेते हैं। कोशियारी कमिटी के मुताबिक केवल थल सेना के 13 लाख सैनिकों में मात्र 1000 ही 60 साल की रिटायरमेंट आयु तक पहुंचते हैं। ज्यादातर जवान व जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (जेसीओ) 40 साल की आयु तक रिटायर हो जाते हैं। सेनाओं में 85 प्रतिशत सैनिक 38 से 40 साल की आयु तक रिटायर हो जाते हैं और 10 प्रतिशत 46 साल की आयु तक रिटायर हो जाते हैं। स्वाभाविक तौर से ये सब OROP से वंचित हो जाएंगे।
6. इंडियन एक्स सर्विस मूवमेंट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर असली 'वन रैंक, वन पेंशन' की मांग की। मोदी सरकार ने इसका सुप्रीम कोर्ट में कड़ा विरोध किया। वन रैंक, वन पेंशन' को सैनिकों का अधिकार न बताकर इसे सरकार की मर्जी से होने वाला नीतिगत निर्णय बताया। यही नहीं मोदी सरकार ने दलील दी कि अदालत आर्थिक बोझ पड़ने वाले नीतिगत निर्णय पर निर्देश नहीं दे सकती। 16 मार्च, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने 'वन रैंक, वन पेंशन' की इस याचिका को खारिज कर दिया।
मोदी सरकार व भाजपा से सीधे सवाल
1. क्या 30 लाख से अधिक पूर्व सैनिकों को 'वन रैंक, वन पेंशन' से वंचित करना देश की सेना के साथ विश्वासघात नहीं?
2. क्या कारण है कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में OROP का विरोध किया?
3. क्या कारण है कि मोदी सरकार OROP पर यूपीए-कांग्रेस के 26 फरवरी, 2014 व 24 अप्रैल, 2014 को लागू करने से इंकार कर रही है?
4. क्या कारण है कि मोदी सरकार ने तत्कालीन वित्तमंत्री, श्री पी. चिदंबरम द्वारा 17 फरवरी, 2014 को संसद में OROP लागू करने के सरकार के वादे का सुप्रीम कोर्ट में विरोध कर खारिज कर दिया?
5. क्या कारण है कि मोदी सरकार ने तत्कालीन रक्षामंत्री, श्री ए. के. एंटनी व रक्षा मंत्रालय के OROP लागू करने के 26 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह कहकर नकार दिया कि यह सरकार का निर्णय ही नहीं है?
6. क्या कारण है कि यूपीए-कांग्रेस द्वारा OROP लागू करने के स्पष्ट निर्णयों के बावजूद मोदी सरकार इन्हें सरकार द्वारा किया गया निर्णय मानने से इंकार कर रही है।
7. क्या पाँच चुनावी राज्यों में छाती ठोंककर OROP लागू करने के निर्णय के बदले वोट बटोरना महज एक चुनावी जुमला था?
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''हम प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री व मोदी सरकार से अनुरोध करते हैं कि 'वन रैंक, वन पेंशन' पर यूपीए-कांग्रेस सरकार के 26 फरवरी, 2014 व 24 अप्रैल, 2014 (संलग्नक A1, A2 व A3) को बगैर देरी के लागू करने का निर्णय करें। प्रजातंत्र में चुनावी जीत वादे पूरे करने के लिए होती हैं, न कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों का विश्वास तोड़ने के लिए।