नई दिल्ली : नागालैंड जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को जोरहाट हवाई अड्डा, असम पर रोका गया, जिसके बाद उन्होंने वहां धरना दिया। उन्हें जोरहाट ज़िलाधिकारी द्वारा जारी किेए गए एक आदेश के अनुसार धारा 144 (1) सीआरपीसी के तहत रोका गया है। बता दें कि,'' शनिवार को, नगालैंड के मोन जिले में सेना की फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई थी|
आज नगालैंड के मोन जिले जाते समय कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को असम के जोरहाट हवाई अड्डे पर ही रोक लिया गया। इसके बाद कांग्रेस नेता यहीं पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को जोरहाट के जिलाधिकारी द्वारा धारा 144 लागू किए जाने के कारण रोका गया है। इस प्रतिनिधिमंडल में गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह जैसे कांग्रेस नेता शामिल हैं।
सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत
नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से यहां हालात तनावपूर्ण हैं। इस घटना में मरने वालों के लिए पांच दिनों के शोक का आह्वान किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि नगालैंड और मोन में स्थिति नियंत्रण में है। मगर अब लगभग सभी नगा जनजातियां सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफस्पा) को हटाने की मांग को लेकर एकजुट हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने भी अफस्पा हटाने की मांग की है।
केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में यह स्वीकार कर लिया कि नगालैंड में सेना की फायरिंग एक गलती थी। गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में इस घटना पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा- सेना ने नागरिकों को पहचानने में गलती की। इस घटना की जांच के लिए SIT बनाई जाएगी, जो एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी।
नागालैंड की घटना पर लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,''अभी स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। पुलिस महानिदेशक नागालैंड और आयुक्त नागालैंड ने 5 दिसंबर को घटनास्थल का दौरा किया। घटना की प्राथमिकी दर्ज़ की गई है| उन्होंने कहा,''मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इस मामले को राज्य अपराध पुलिस स्टेशन को जांच के लिए सौंप दिया गया है। इस संदर्भ में एक विशेष जांच टीम(SIT) का गठन किया गया है जिसे एक महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं|
शाह ने कहा,''ये निर्णय लिया गया है कि सभी एजेंसियों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाते समय भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। सरकार स्थिति पर सूक्ष्मता से नज़र रख रही है|
गौर हो कि शनिवार शाम MON जिले में नागरिकों पर गोलीबारी के सिलसिले में नगालैंड पुलिस ने भारतीय सेना के 21 पैरा विशेष बल की टुकड़ी के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की है, जिसमें अब तक कुल 14 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है| इस घटना के बाद ग्रामीणों के साथ झड़प में सेना के एक जवान की भी मौत हुई है| FIR में नगालैंड पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पैरा स्पेशल बलों ने स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं किया था, न ही कोई पुलिस गाइड लिया था, इसलिए सेना का कहना है कि यह 'गलत पहचान' थी| प्राथमिकी में पुलिस ने 'सुरक्षा बलों की मंशा नागरिकों की हत्या और घायल करना' बताया है|