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26 अगस्त 2026

नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, गेस्ट ऑफ ऑनर अमित शाह: ...मोदी जी के नाम पर पिच होगी तो स्पिन अच्छा आएगा उसमें: स्टेडियम का नाम बदलने पर कांग्रेस का तंज

नई दिल्ली: सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम का नाम का बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम रखने को लेकर सियासी विवाद बढ़ता ही जा रहा है| कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक व्य…

नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, गेस्ट ऑफ ऑनर अमित शाह: ...मोदी जी के नाम पर पिच होगी तो स्पिन अच्छा आएगा उसमें: स्टेडियम का नाम बदलने पर कांग्रेस का तंज
नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, गेस्ट ऑफ ऑनर अमित शाह: ...मोदी जी के नाम पर पिच होगी तो स्पिन अच्छा आएगा उसमें: स्टेडियम का नाम बदलने पर कांग्रेस का तंज | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम का नाम का बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम रखने को लेकर सियासी विवाद बढ़ता ही जा रहा है|  कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक व्यक्ति बहुत मायूस होंगे, उनका नाम है - लालकृष्ण आडवाणी जी। वो सोच रहे होंगे काश कि, वह भी जब उप प्रधानमंत्री थे, तो वो भी अपने नाम पर कुछ करा देते। खैर, अब तो चूक गए। लेकिन मोदी जी बहुत समझदार हैं। आडवाणी जी की जिंदगी से वो यह सीखे हैं कि किसी और पर भरोसा नहीं होना चाहिए। जैसे जो हाल उन्होंने आडवाणी जी का बनाया, उन्हें भय रहता है कि जो है, मैं जब तक प्रधानमंत्री हूँ, अपने नाम पर भी कछ कर जाऊँ।




पवन खेड़ा ने कहा कि,''इतिहास आपको तब याद रखता है. जब आप कछ ऐतिहासिक काम करते हैं। इन्हें मालूम है, इन्होंने कोई ऐतिहासिक काम नहीं किया है। ऐसा भी नहीं कि कोई नया स्टेडियम बनाया हो। स्टेडियम भी वो स्टेडियम है, जो 1983 में जिसका उद्धघाटन हुआ था। पुराने स्टेडियम को नया किया, उसका नवीकरण किया, जैसा कि वह योजनाओं का भी नाम बदल देते हैं। जैसा कि कई-कई और या तो नाम बदले हैं, या उनका नवीनीकरण कर दिया और अपना नाम लगा दिया। मोटेरा स्टेडियम, सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर एक स्टेडियम है। गुजरात के दो सपूत हुए - मोहन दास करमचंद गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल। 2017 में खादी ग्रामोद्योग का कैलेंडर आपको याद होगा, जहाँ गांधी जी को वणक्कम कर दिया था और खुद आ गए थे नरेन्द्र मोदी जी बैठ गए थे। 




पवन खेड़ा ने कहा कि,आज सरदार पटेल जी को भी वणक्कम कर दिया। नफरत किससे है..? ये देश की धरोहर है। अब उन्होंने वो महात्मा गांधी हों, सरदार वल्लभ भाई पटेल हों, नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों, उन्होंने आरएसएस को ठुकराया, उस विचारधारा को ठुकराया तो उसमें पूरे देश का क्या कसूर था...? उन्होंने सही ठुकराया। आज आप बदला किस बात का ले रहे हो उनसे, सिर्फ इस बात का कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आरएसएस पर पाबंदी लगाई थी। 




पवन खेड़ा ने कहा कि,'आपमें से कुछ लोगों को मालूम होगा कि आरएसएस के हेडक्वार्टर पर एच. वी. शेषाद्री (HV Seshadri) द्वारा लिखित पुस्तक सरदार वल्लभ भाई पटेल की निंदा करते हुए, वो मुफ्त में बांटी जाती थी, अब 100 रुपए लिए जाते हैं। क्योंकि अब हर चीज को कॉमर्शियल कर दिया आरएसएस ने। मुफ्त में बांटी जाती थी आरएसएस के हेडक्वार्टर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल के खिलाफ पुस्तक। ' The tragic story of Partition' उस पुस्तक का नाम था। 




पवन खेड़ा ने कहा कि,''तो सरदार वल्लभ भाई पटेल के तो ये खिलाफ शुरु से रहे हैं और कारण स्पष्ट है। कारण ऐतिहासिक है। कारण वो इतिहास है, जिस इतिहास में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश की जनभावना का आदर करते हुए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। आज उस बात का बदला नरेन्द्र मोदी जी ने ले लिया है। जिस वजह से प्रधानमंत्री आरएसएस उन्हें बनाना चाहती थी, शायद आज वो मकसद हल हो गया है। आज वो उन्हें हासिल हो गया है। ठेस पहुंचती है देश की आत्मा को। 




पवन खेड़ा ने कहा कि,''जब आप इतने बड़े नेता के नाम को हटाकर अपना नाम लाना चाहते हैं। क्या आपको भरोसा नहीं है कि कल को कोई और प्रधानमंत्री होंगे, किसी भी पार्टी के हों वो, तो वो आपका नाम नहीं कहीं आएगा। ये भरोसा तब नहीं होता, जब आपको अपनी असलियत का पता होता है। अभी मैं देख रहा था, फिर नक्शा भी देखा, उस स्टेडियम का। नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम। गेस्ट ऑफ ऑनर अमित शाह। 



एक एंड अडाणी एंड, दूसरा एंड रिलायंस एंड। पिच के नाम पर भी कुछ सोचना चाहिए। वैसे तो मोदी जी के नाम पर पिच होगी तो स्पिन अच्छा आएगा उसमें। स्पिन अच्छी आएगी उसमें। तो इस स्टेडियम का नाम, इस स्टेडियम का जो आज हमने एंड, इसके नाम और वो सब देखे हैं इसमें, आज के भारत की कहानी इस एक स्टेडियम में दिख रही है। 




'कैसे जो देश की धरोहर है, उससे खिलवाड़ किया गया है। कैसे हमारे जो महापुरुष हैं, जिनको पूरे अंतरहृदय, International icons माना जाता है. उनको दरकिनार किया जा रहा है। उनकी शिक्षा को, उनकी संस्कृति को दरकिनार किया जा रहा है और एक नई संस्कृति को थोपा जा रहा है इस देश पर। वो संस्कृति आज वो सिर्फ आप नक्शा देखेंगे स्टेडियम का और फिर नाम देखेंगे, तो आपको समझ में आ जाएगा, कि इस देश पर क्या थोपा जा रहा है...? क्यों बार-बार राहुल गांधी जी क्रोनी कैपिटलिस्ट की बात करते हैं, क्यों बार-बार राहुल गांधी मोदी जी, जिस तरह की संस्कृति इस देश में ला रहे हैं, उसके बारे में बात करते हैं। आज उसका उत्तर आपको मिलेगा। 




एक प्रश्न के उत्तर में श्री पवन खेड़ा ने कहा कि इंतजार करते हैं, अगली सरकार आपके नाम पर भी कुछ करती, अगर आपने कुछ किया होता तो। आपको मालूम है कि आपने कुछ किया ही नहीं है, इसलिए आप जो भी पुरानी चीजें हैं, उनको लिपाई-पुताई करके अपना नाम डालना चाहते हैं। आपको भरोसा है अपनी विफलताओं पर और आपको यह भी भरोसा है कि आने वाली सरकार किसी भी पार्टी की हो, वो जनता तय करती है। उसको ढूंढना पड़ जाएगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नाम पर रखें, तो क्या रखें।




केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा  श्री राहुल गांधी पर दिए विवादित बयान के संदर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री पवन खेड़ा ने कहा कि स्मति ईरानी जी की समझ पर मझे तो कभी कोई शंका थी ही नहीं, आपको रह गई हो तो वो भी दूर हो जाएगी जल्दी। उनको ये समझ ही नहीं आता कि टिप्पणी उत्तर भारत पर नहीं है। टिप्पणी जिस तरह की राजनीतिक संस्कृति स्मृति ईरानी जी की पार्टी लाई है, जो उत्तर भारत में क्योंकि इनकी सीटें ज्यादा है, ज्यादा दिखती हैं, जिस तरह की चर्चा, जिस तरह के मुद्दे, जिस तरह के विवाद ये पैदा करती हैं, ये और इनकी पार्टी, ये टिप्पणी उस विवाद पर है, उस चर्चा पर है, उन टिप्पणियों पर है। 




पवन खेड़ा ने कहा,''अगर उन्हें (ईरानी) ये बात नहीं समझ में आती कि उनकी राजनीतिक संस्कृति के ऊपर ये प्रश्न चिन्ह राहुल गांधी जी ने लगाया है तो स्मृति ईरानी जी को मैं सिर्फ इतनी सलाह दूंगा कि कुछ दिन अवकाश ले लें, थोड़ा अपना ज्ञान बढ़ाएं और फिर आएं, तो शायद कुछ समझ की बात कर पाएंगी। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री पवन खेड़ा ने कहा कि अगर स्मृति ईरानी जी ये कोशिश करेंगी कि उत्तर भारतीयों पर ये टिप्पणी है, तो वो उसमें नाकामयाब रहेंगी। ये टिप्पणी स्मृति ईरानी जी पर हैं, ये टिप्पणी उस राजनीतिक संस्कृति पर है, जिसको स्मृति ईरानी जी जिसका वो उदाहरण हैं। स्वयं अपना एक जीता-जागता उदाहरण है। ये टिप्पणी उस राजनीतिक संस्कृति पर है।







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यह रिपोर्ट 24 फ़रवरी 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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