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25 अगस्त 2026

हम आतंकवादी नहीं किसान हैं, जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं: आंदोलनरत किसान

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों (Farm Laws) की वापसी को लेकर किसानों और केंद्र सरकार (Centre Govt) के बीच गतिरोध बरकरार है|दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज…

हम आतंकवादी नहीं किसान हैं, जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं: आंदोलनरत किसान
हम आतंकवादी नहीं किसान हैं, जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं: आंदोलनरत किसान | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों (Farm Laws) की वापसी को लेकर किसानों और केंद्र सरकार (Centre Govt) के बीच गतिरोध बरकरार है|दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज 32वां दिन है। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं है।


सिंघु बॉर्डर से एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि,''मोदी सरकार से विनती है कि ये 3 काले कानूनों को रद्द करें। जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं.. जब हम हिंदुओं के लिए लड़ते हैं तब हम फरिश्ते और जब हम अपने लिए लड़ रहें तो हमें आतंकवादी बोल दिया जाता है..हम आतंकवादी नहीं किसान हैं|




कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर भी किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता तब तक हम यही बैठे रहेंगे..चाहें 1 साल या उससे अधिक समय लग जाएं।"



वही,'' गाज़ीपुर (दिल्ली-यूपी) बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर की तरह दूसरा टेंट सिटी तैयार किया गया।



 बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। भारतीय किसान यूनियन के बिंदर सिंह गोलेवाला ने बताया, "हमें यहां आज पूरा एक महीना हो गया है। सरकार इन कानूनों को रद्द कर दे और हम वापस चले जाएंगे।"



शुक्रवार को किसान नेता ने कहा, सरकार के पत्र में कोई प्रस्ताव नहीं है। हमें लगता है कि सरकार हमारी मांगों को समझ नहीं पाई है। इसलिए संभव है कि हम नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकते हैं ताकि सरकार अपनी मांगें ठीक से समझा दें। उन्होंने कहा, तीनों कानून रद्द करने की मांग से एमएसपी को अलग नहीं कर सकते। एक अन्य किसान नेता ने कहा, इन कानूनों में निजी मंडियों का जिक्र है। यह कौन सुनिश्चित करेगा कि हमारी फसलों को एमएसपी पर खरीदा जाएगा। शुक्रवार को कई किसान संगठनों ने चर्चा की लेकिन कोई फैसला नहीं लिया जा सका।



संगठनों में से कुछ ने संकेत दिया कि वे मौजूदा गतिरोध का हल खोजने के लिए केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला कर सकते हैं। यूनियनों ने कहा कि आज उनकी एक और बैठक होगी जिसमें ठहरी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए केंद्र के न्यौते पर कोई औपचारिक फैसला किया जाएगा।





tvlnews

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