नई दिल्ली:किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं| कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी है। केंद्र सरकार ने आज दोपहर तीन बजे किसानों को बातचीत के लिए विज्ञान भवन बुलाया है। कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर(दिल्ली-हरियाणा) पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है।..दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बैरिकेडिंग को हटाने के लिए ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं को कोविड-19 महामारी एवं सर्दी का हवाला देते हुये तीन दिसंबर की जगह मंगलवार यानी कि आज बातचीत के लिये आमंत्रित किया|
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि आज 3 बजे किसानों को बुलाया है, सरकार चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, आएंगे तो जरूर उनका स्वागत है। मांग पर सड़क पर बात नहीं होती है(किसानों की MSP की मांग पर)
किसानों का कहना है,''सरकार ने केवल 32 समूहों को बातचीत के लिए पत्र भेजा है और बाकी लोगों को नहीं बुलाया है जबकि देश के 500 से ज़्यादा किसानों के समूह यहां मैदान में लड़ रहे हैं।जब तक सभी समूहों को नहीं बुलाया जाएगा तब तक हम बातचीत नहीं करने जाएंगे|
पंजाब किसान संघर्ष कमेटी के संयुक्त सचिव सुखविंदर एस सभरन ने कहा कि देश में किसान संगठनों की संख्या 500 से भी अधिक है, लेकिन सरकार ने बातचीत के लिए केवल 32 संगठनों को न्योता दिया है। अन्य संगठनों को सरकार ने नहीं बुलाया। जबतक सभी संगठनों को न्योता नहीं दिया जाता, तबतक हम बातचीत के लिए नहीं जाएंगे।
किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के महासचिव ने कहा कि,''कल देर रात सरकार से चिट्ठी आई जिसमें पंजाब के 32 किसान संगठनों को बातचीत का न्योता दिया गया। देश के सभी संगठनों को बुलावा नहीं भेजा गया,ये देश के किसानों में फूट डालने वाली बात है। हमने बैठक में नहीं जाने का फैसला किया है|बातचीत से पहले प्रधानमंत्री जी ने फैसला सुना दिया है कि हमारे कृषि कानून बहुत बढ़िया हैं तो इस तरह के माहौल में बातचीत का अंदाजा हमें लग गया है|