नई दिल्ली: केंद्र द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों (Farm Law) के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने सोमवार को कहा कि वे ‘‘निर्णायक'' लड़ाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा| गौरतलब है कि,''केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों(Farm Laws) के विरोध में किसानों का आंदोलन सोमवार को लगातार पांचवें दिन जारी है। दिल्ली चलो मार्च के आह्वान पर सिंघु, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार चौथे दिन जमे किसानों ने रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशर्त वार्ता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और सोमवार को भी यहीं जमे हुए हैं।
गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती के बीच गुरु नानक जयंती के अवसर पर किसानों ने मोमबत्तियां जलाकर विरोध जताया।टिकरी बॉर्डर पर भी किसानों ने मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन किया। किसानों ने सुरक्षाबलों द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स पर भी मोमबत्तियां लगाई।
कृषि कानूनों को लेकर किसानों का प्रदर्शन सिंघु बॉर्डर पर जारी है। गुरु नानक जयंती के मौके पर किसानों ने मोमबत्ती जलाकर प्रर्दशन किया। एक किसान ने कहा कि केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने कैंडल मार्च निकाला है।
भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि संविधान के अनुसार, शासन लोगों के द्वारा, लोगों के लिए, लोगों का होता है। लेकिन अब शासन कॉरपोरेट्स द्वारा, कॉरपोरेट्स के लिए और कॉरपोरेट्स का हो गया है। कॉरपोरेट्स के लिए कानून बनाए जा रहे हैं और लोगों का शोषण किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि पर्याप्त पुलिस बल मौजूद है। हम किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों से बुराड़ी मैदान में पहुंचने का अनुरोध किया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव ने कहा कि,''उन्हें (प्रदर्शन कर रहे किसान) प्रस्ताव दिया गया था कि सड़क पर रहने की बजाय बुराड़ी ग्राउंड में जाएं। जहां बेहतर इंतजाम किए गए हैं.... पुलिस ने अच्छा इंतजाम किया है, हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं|
दिल्ली-गुडगांव बॉर्डर पर किसान प्रदर्शनकारियों की भीड़ आने की संभावना को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने पैरामिलिट्री फोर्स के साथ कई जगहों पर नाकेबंदी की है, जिससे सडकों पर ट्रैफिक जाम लग गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमने यह सिर्फ एहतियात के तौर पर किया है।
सिंघु बॉर्डर पर अपने बैठे भारती किसान यूनियन (दकौंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम सभी राज्यों के किसान संगठनों के साथ बैठक नहीं कर सकते। हम केवल पंजाब के 30 संगठनों के साथ ही बैठक कर सकते हैं। हमने पीएम मोदी के सशर्त निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है।
केंद्र सरकार ने जब से कृषि से जुड़े तीन कानून पास किए हैं तब से लगातार किसान इस कानून का विरोध कर रहे हैं। हालांकि अब यह आंदोलन और दिल्ली की सीमाओं तक पहुंच गया है और किसानों ने दिल्ली को लगभग ???ारों ओर से घेर रखा है। इसी के बाद से इस आंदोलन को लेकर कई बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। इन्हीं को लेकर आज किसानों द्वारा बनाए गए संयुक्त मोर्चा के सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि इस आंदोलन के बारे में जो पांच झूठ फैलाए जा रहे हैं वह किस तरह से गलत हैं। योगेंद्र यादव ने ही इन पांच झूठों का खुलासा किया।
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने पहला झूठ बताया। उन्होंने कहा कि देश में पहला झूठ फैलाया गया है कि यह बिचौलियों का आंदोलन है किसानों का नहीं। योगेंद्र यादव ने कहा कि आप साफ देख सकते हैं जहां तक नजर जाती है यहां कितने किसान और कितने बिचौलिए हैं। यह झूठ इसलिए फैलाया जा रहा है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके।
दूसरा झूठ: देश में दूसरा झूठ ये फैलाया जा रहा है कि बेचारे किसानों को तो कुछ पता ही नहीं है उन्हें बरगलाया जा रहा है। अब पंजाब के बच्चे-बच्चे को पता है कि कृषि कानूनों की क्या सच्चाई है।योगेंद्र यादव ने कहा कि अब इस तरह की बातें बंद होनी चाहिए।
यूपी गेट पर भी उत्तराखंड और यूपी के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं: योगेंद्र यादव
तीसरा झूठ: योगेंद्र यादव बोले कि तीसरा झूठ फैलाया जा रहा है कि सिर्फ पंजाब के किसानों का आंदोलन है। लेकिन ये पूरे देश का आंदोलन है। पूरे हरियाणा में पंचायतें हो रही हैं। पंजाब के किसान इस लड़ाई में अगुवा हैं लेकिन सब जुटे हुए हैं। यूपी गेट पर भी उत्तराखंड और यूपी के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।
देश के तमाम किसान संगठन इससे जुड़े हैं: योगेंद्र यादव:
चौथा झूठ:योगेंद्र यादव ने कहा कि चौथा झूठ फैलाया गया कि इनके नेता का पता नहीं है, कौन नेतृत्व कर रहा कुछ पता ही नहीं है। कहां से आ गई ये भीड़ किसी को पता नहीं। कोई लीडरशिप नहीं है ये बात गलत है। राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त किसान मोर्चा एक महीने पहले बना जिसकी लीडरशिप में ये आंदोलन चल रहा है, जिसमें अनेकों संगठन जुड़े हैं। लीडरशिप है, कोई ये न कहे कि अराजक आंदोलन है। देश के तमाम किसान संगठन इससे जुड़े हैं।
ये किसी राजनीतिक पार्टी का आंदोलन नहीं है: योगेंद्र यादव
पांचवां झूठ: योगेंद्र यादव ने ये भी बोला कि पांचवां झूठ फैला रहे हैं कि राजनीतिक पार्टियों की तरफ से आंदोलन हो रहा है। ये गलत है। इन्हीं किसानों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ भी मोर्चा खोला था और अब ये मोदी सरकार के खिलाफ हैं। इसलिए ये कहना कि ये किसी राजनीतिक पार्टी का आंदोलन है गलत है।
भारतीय किसान यूनियन संगठन के किसानों के यूपी गेट पर चल रहे धरने पर लगातार समर्थन मिल रहा है। धरने में सैकड़ों लोग शामिल हो रहे हैं। धरने में शामिल होने जा रहे सरदार मंजीत सिंह ने कहा जब तक तीनों अध्यादेश वापस नहीं होते या सरकार एमएस पी प्राइस पर कानून नहीं बनाती तब तक धरना प्रदर्शन चलता रहेगा। किसान नेता पवन खटाना, हरेंद्र भाटी, सरदार गुरुचरण सिंह, सुनील प्रधान, गजेंद्र नागर, सुंदर खटाना, अनिल खटाना, संदीप खटाना, धर्मपाल स्वामी, सचिन नागर, इंदरजीत कसाना, पवन नागर आदि सैकड़ों लोग धरने प्रदर्शन में शामिल हुए।
कृषि कानून के विरोध में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से यूपी गेट पर करीब 70 से 80 किसान पहुंचे हैं, वह सभी अपने साथ करीब 6 महीने का राशन भी साथ लेकर यहां आए हैं। इन सभी किसानों ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान अपने गुस्से को भी जाहिर किया।