मुंबई: शिवसेना के सांसद संजय राउत ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है|संजय राउत ने किसानों के साथ पुलिस बर्बरता की निंदा करते हुए कहा कि जिस तरह से किसानों को दिल्ली में आने से रोका गया है ऐसा लगता है कि वे देश के किसान नहीं बल्कि बाहर के किसान हैं। उनके साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया है।उन्हें खालिस्तानी बताया जा रहा है, ये किसानों का अपमान है।
रविवार को शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि,''जिस तरह से किसानों को दिल्ली में आने से रोका गया है ऐसा लगता है कि वे देश के किसान नहीं बल्कि बाहर के किसान है। उनके साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया है। इस तरह का बर्ताव करना देश के किसानों का अपमान करना है|
शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद ने आगे कहा कि,'' चूंकि वे (किसान) सिख हैं और पंजाब और हरियाणा से विरोध प्रदर्शन करने दिल्ली आए हैं, इसलिए उन्हें खालिस्तानी कहा जा रहा है। यह देश के किसानों का अपमान है।
कृषि कानूनों(Farm Laws) के विरोध में पश्चिमी यूपी, पंजाब-हरियाणा के किसानों का आंदोलन रविवार को लगातार चौथे दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आज बैठक के बाद केंद्र सरकार के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है।किसानों ने स्पष्ट कहा है कि वे बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि सिंघु बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की ओर से लिखित में बातचीत का न्योता मिलेगा तभी बात बनने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में डटे किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्ताव खारिज कर दिया है|किसानों का कहना है कि शाह ने वार्ता के साथ शर्त लगाई है, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है| शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंदोलित किसानों को 3 दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया था| शाह ने कहा था कि अगर किसान उससे पहले वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर मोर्चेबंदी छोड़कर बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा|
इसके बाद किसान संगठनों ने रविवार को महत्वपूर्ण बैठक की और भावी रणनीति पर विचार किया| किसानों का कहना है कि वार्ता के लिए बुराड़ी ग्राउंड जाने की शर्त उन्हें स्वीकार नहीं है| किसान नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा,'हमने फैसला लिया कि सभी बॉर्डर और रोड ऐसे ही ब्लॉक रहेंगे। गृह मंत्री ने शर्त रखी थी कि अगर हम मैदान में धरना देते हैं तो वो तुरंत मीटिंग के लिए बुला लेंगे। हमने शर्त खारिज़ कर दी है। अगर वो बिना शर्त के मीटिंग के लिए बुलाएंगे तो ही हम जाएंगे|
दिल्ली सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता ने कहा,'सरकार द्वारा बातचीत के लिए जो कंडीशन थी हम उसे किसान संगठनों का अपमान मानते हैं। अब हम बुराड़ी पार्क में बिलकुल नहीं जाएंगे। हमें पता चला है कि वो पार्क नहीं ओपन ज़ेल है। हम ओपन ज़ेल में जाने की बजाय 5 मेन मार्ग जाम कर दिल्ली की घेराबंदी करेंगे|