● संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि क़ानूनों पर सरकार का प्रस्ताव नामंज़ूर किया
● सरकार ने दिया था डेढ़ साल तक कानूनों को निलम्बित करने का प्रस्ताव
● किसान संगठन तीनों कृषि क़ानून पूरी तरह से रद्द करने की माँग पर क़ायम
नई दिल्ली:संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार द्वारा कल रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार की तरफ से कहा गया था कि 1.5 साल तक क़ानून के क्रियान्वयन को स्थगित किया जा सकता है। किसान यूनियन और सरकार बात करके समाधान ढूंढ सकते हैं।
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा,''सरकार जब तक कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लेती, सरकार का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कल हम सरकार को कहेंगे कि इन क़ानूनों को वापस कराना, MSP पर क़ानूनी अधिकार लेना यही हमारा लक्ष्य है।हमने सर्वसम्मति से ये निर्णय लिया है|
मोदी सरकार के कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक होल्ड पर रखने के प्रस्ताव को ठुकराये जाने के बाद तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) पर सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच गतिरोध खत्म होता नजर आ रहा है|
सरकार और किसानों के बीच बुधवार को 10 वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। अब केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच अगली बातचीत 22 जनवरी को होगी|बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि वह एक से डेढ़ साल तक भी क़ानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए तैयार है। इस दौरान किसान यूनियन और सरकार बात करें और समाधान ढूंढे। इस पर किसान संगठनों ने कहा था कि वे इस प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं|
बुधवार को सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर आज यानी गुरुवार को किसानों ने चर्चा की हैं। बैठक बाद किसानों ने सरकार के कृषि कानूनों को एक से-डेढ़ साल तक होल्ड पर रखने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया हैं| उम्मीद जताई जा रही थी कानून को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने के प्रस्ताव पर अगर किसान लोग राजी हुए तो आंदोलन आने वाले कुछ दिनों में खत्म भी हो सकता है।लेकिन अब, मोदी सरकार के प्रस्ताव को ठुकराये जाने के बाद तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) पर सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच गतिरोध खत्म होता नजर आ रहा है|
इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 जनवरी को रिंग रोड पर ट्रैक्टर मार्च निकालने की घोषण भी की है। बैठक में फैसला लिया गया कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस न ले ले और एमएसपी पर कानूनी गारंटी नहीं दे देती उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उधर 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने को लेकर दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच आज फिर बैठक हुई जो बेनतीजा रही। पुलिस उन्हें केएमपी एक्सप्रेसवे पर परेड करने के लिए मनाती रही लेकिन किसान दिल्ली के अंदर आउटर रिंग रोड पर ही परेड निकालने के लिए अड़े हैं। आज यानी गुरुवार को दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच तीसरी दौर की बातचीत हुई| कल फिर होगी बैठक|
बैठक में दिल्ली पुलिस ने कहा कि आउटर रिंग रोड पर अनुमति देना मुश्किल है और सरकार भी इसके लिए तैयार नहीं है। लेकिन ने साफ किया है कि वो हर हाल में दिल्ली के रिंग रोड पर ही रैली करेंगे। जिस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि ठीक है हम देखते है। कल हमारी पुलिस के साथ फिर बैठक होगी|
किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि,बैठक में दिल्ली पुलिस ने कहा कि आउटर रिंग रोड पर अनुमति देना मुश्किल है और सरकार भी इसके लिए तैयार नहीं है। लेकिन हमने कह दिया है कि हम रिंग रोड पर ही रैली करेंगे। फिर उन्होंने (पुलिस) कहा कि ठीक है हम देखते है। कल हमारी पुलिस के साथ फिर बैठक होगी| फिलहाल,''दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने को लेकर आज फिर बैठक हुई जो बेनतीजा रही। पुलिस उन्हें केएमपी एक्सप्रेसवे पर परेड करने के लिए मनाती रही लेकिन किसान दिल्ली के अंदर आउटर रिंग रोड पर ही परेड निकालने के लिए अड़े हैं।
दिल्ली की तमाम सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन का आज 57वां दिन है। अब तक 100 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है| वही पंजाब सरकार ने किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवार को 5-5 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए हैं।
वहीँ 26 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित किसानों के ट्रैक्टर परेड से पहले पंजाब में हजारों किसानों ने कई जिलों में पूर्वाभ्यास किया। पंजाब के कई जिलों में किसानों का काफिला ट्रैक्टरों पर निकला। ऐसा ही काफिला पठानकोट की सड़कों पर ही दिखाई दिया। 500 ट्रैक्टर, लगभग 150 कारें और सैकड़ों मोटरसाइकिल पहली बार रैली का हिस्सा बने।