नई दिल्ली: देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को (31 अगस्त, 2020 को) नई दिल्ली आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में 84 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। प्रणब मुखर्जी के निधन पर भारत सरकार ने 31 अगस्त से छह सितंबर तक सात दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। भारत सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरे दुख के साथ सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
दिवंगत गणमान्य शख्सियत के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में पूरे भारत में सात दिन का राजकीय शोक 31.08.2020 से 06.09.2020 तक लागू रहेगा, जिसमें दोनों दिन शामिल रहेंगे। इस अवधि के दौरान भारत में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जहां इसे नियमित रूप से फहराया जाता है और किसी प्रकार का आधिकारिक मनोरंजन नहीं होगा।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को निधन हो गया। पूर्व राष्ट्रपति के निधन की जानकारी उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर दी है। बता दें कि वह दिल्ली स्थित सेना के अस्पताल में भर्ती थे, उनके फेफड़ों में संक्रमण की वजह से सेप्टिक शॉक की स्थिति पैदा हो गई थी। प्रणब मुखर्जी की इस महीने ब्रेन सर्जरी हुई थी, जिसके बाद वह गहरे कोमा में चले गए थे। प्रणब मुखर्जी बीते करीब 20 दिन से दिल्ली कैंट के आर्मी अस्पताल (R&R) में भर्ती थे, उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, डॉक्टरों के प्रयास और देश की दुआओं के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
बता दें कि देश के 13वें राष्ट्रपति रहे प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुआ था। 84 साल की उम्र में प्रणब मुखर्जी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। लंबे वक्त तक कांग्रेस से जुड़े रहे प्रणब दा वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रपति पद पर काबिज रह चुके हैं। प्रणब मुखर्जी के पिता किंकर मुखर्जी भी देश के स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल रहे। उनका संसदीय कैरियर करीब पांच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये।