नई दिल्ली: कृषि कानूनों(Farm Laws) के हरियाणा के किसानों का आंदोलन रविवार को लगातार चौथे दिन जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आज बैठक के बाद केंद्र सरकार के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है। किसानों ने स्पष्ट कहा है कि वे बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि सिंघु बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की ओर से लिखित में बातचीत का न्योता मिलेगा तभी बात बनने की उम्मीद है।
कृषि कानूनों(Farm Laws) के विरोध में किसानों के प्रोटेस्ट पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि,'कल को अगर कोरोना की वजह से लोगों पर प्रभाव पड़ा तो इसकी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। खट्टर ने कहा कि,'पानी की बौछार मारने और आंसू गैस छोड़ने को मैं फोर्स नहीं मानता हूं, ये लोगों को रोकने के लिए अवरोधक के रूप में काम आते हैं|
केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में डटे किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्ताव खारिज कर दिया है|किसानों का कहना है कि शाह ने वार्ता के साथ शर्त लगाई है, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है| शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंदोलित किसानों को 3 दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया था| शाह ने कहा था कि अगर किसान उससे पहले वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर मोर्चेबंदी छोड़कर बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा|
इसके बाद किसान संगठनों ने रविवार को महत्वपूर्ण बैठक की और भावी रणनीति पर विचार किया| किसानों का कहना है कि वार्ता के लिए बुराड़ी ग्राउंड जाने की शर्त उन्हें स्वीकार नहीं है| किसान नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा,'हमने फैसला लिया कि सभी बॉर्डर और रोड ऐसे ही ब्लॉक रहेंगे। गृह मंत्री ने शर्त रखी थी कि अगर हम मैदान में धरना देते हैं तो वो तुरंत मीटिंग के लिए बुला लेंगे। हमने शर्त खारिज़ कर दी है। अगर वो बिना शर्त के मीटिंग के लिए बुलाएंगे तो ही हम जाएंगे|