नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन किया है| सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कानूनों को उग्रवादी, खालिस्तानी बताये जाने पर की कड़ी निंदा की और उनके के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया|
SC के सीनियर एडवोकेट एच.एस. फुलका ने कहा,SC के वकील किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने कहा,'राइट टू प्रोटेस्ट" हर नागरिक का हक़ है, किसानों को ये मिलना चाहिए। CM खट्टर के बहुत ही बेहूदा बयान आए हैं। इनको उग्रवादी, खालिस्तानी कहा गया, इसकी हम कड़ी निंदा करते हैं|
वहीं, इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को अपने हरियाणा के समकक्ष मनोहर लाल खट्टर पर किसानों के साथ बर्बर व्यवहार करने का आरोप लगाया| सिंह ने खट्टर से उनके उस बयान पर माफी मांगने को कहा, जिसमें उन्होंने कहा है कि विरोध प्रदर्शन का प्रबंधन खालिस्तानी कर रहे हैं| सिंह ने खट्टर पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया|
बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा है कि किसान आंदोलन को पंजाब के किसानों ने खड़ा किया है और इस आंदोलन को किसानों की बजाय राजनीतिक दलों और संस्थाओं ने प्रायोजित किया है| हरियाणा के किसानों ने आंदोलन में भागीदारी नहीं की है| हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध राजनीतिक दलों द्वारा समर्थित है और इनका लिंक खालिस्तान से भी है|उन्होंने मीडिया को बताया, राज्य को राष्ट्रीय राजधानी में और आसपास चल रहे किसानों के विरोध में खालिस्तान समर्थक नारे लगाने वाले कुछ अवांछित तत्वों के इनपुट मिले हैं|
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इसकी 'ठोस' जानकारी मिलने के बाद पूरा विवरण शेयर करेंगे|मुख्यमंत्री ने कहा, हमारे पास इनपुट है कि कुछ अवांछित तत्व इस भीड़ के अंदर आए हुए हैं| हमारे पास इसकी रिपोर्ट है|अभी इसका खुलासा करना ठीक नहीं है| उन्होंने सीधे नारे लगाए हैं| जो ऑडियो और वीडियो सामने आए हैं, उनमें इंदिरा गांधी को लेकर साफ नारे लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि जब इंदिरा के साथ ये कर दिया तो मोदी क्या चीज है|
कृषि कानूनों(Farm Laws) के हरियाणा के किसानों का आंदोलन रविवार को लगातार चौथे दिन जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आज बैठक के बाद केंद्र सरकार के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है। किसानों ने स्पष्ट कहा है कि वे बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि सिंघु बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की ओर से लिखित में बातचीत का न्योता मिलेगा तभी बात बनने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में डटे किसान संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रस्ताव खारिज कर दिया है|किसानों का कहना है कि शाह ने वार्ता के साथ शर्त लगाई है, जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है| शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंदोलित किसानों को 3 दिसंबर को बातचीत का न्योता दिया था| शाह ने कहा था कि अगर किसान उससे पहले वार्ता करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर मोर्चेबंदी छोड़कर बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा|
इसके बाद किसान संगठनों ने रविवार को महत्वपूर्ण बैठक की और भावी रणनीति पर विचार किया| किसानों का कहना है कि वार्ता के लिए बुराड़ी ग्राउंड जाने की शर्त उन्हें स्वीकार नहीं है| किसान नेता हरमीत सिंह कादियां ने कहा,'हमने फैसला लिया कि सभी बॉर्डर और रोड ऐसे ही ब्लॉक रहेंगे। गृह मंत्री ने शर्त रखी थी कि अगर हम मैदान में धरना देते हैं तो वो तुरंत मीटिंग के लिए बुला लेंगे। हमने शर्त खारिज़ कर दी है। अगर वो बिना शर्त के मीटिंग के लिए बुलाएंगे तो ही हम जाएंगे|