नई दिल्ली: कृषि कानूनों के महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र सरकार औऱ किसान नेताओं के बीच शुक्रवार को हुई बातचीत भी बेनतीजा रही| पिछले 44 दिनों से जारी किसान आंदोलन को खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की बातचीत भी रही बेनतीजा| अब केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच अगली बातचीत 15 जनवरी को होगी|
किसान नेताओं से बातचीत के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,'किसान यूनियन के साथ कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही, परंतु कोई समाधान नहीं निकला; हमारी यही अपील रही कि क़ानून वापस लेने के अलावा कोई प्रस्ताव हो तो बताएं; देश में बहुत से लोग इन क़ानूनों के पक्ष में हैं| तोमर ने कहा,'अगली बैठक 15 जनवरी को होगी; मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा|
किसान नेताओं से बातचीत के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,'आज किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से कहा गया कि क़ानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, परन्तु कोई विकल्प नहीं मिला| तोमर ने कहा,''किसान यूनियन और सरकार दोनों ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है। मुझे आशा है कि 15 जनवरी को कोई समाधान निकलेगा |
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा,'''सरकार ने बार-बार कहा है कि किसान यूनियन अगर क़ानून वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी तो हम बात करने को तैयार हैं। आंदोलन कर रहे लोगों का मानना है कि इन क़ानूनों को वापिस लिया जाए। परन्तु देश में बहुत से लोग इन क़ानूनों के पक्ष में हैं|
तोमर ने कहा,'लखा सिंह (नानकसर गुरुद्वारा, कलेरन के प्रमुख) इस बात से व्यथित थे कि किसान सर्दियों में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने हमें किसानों के दृष्टिकोण से अवगत कराया और मैंने सरकार के सामने प्रस्तुत किया। मैंने उनसे किसान यूनियनों के नेताओं से बात करने का आग्रह किया। हमने उनसे संपर्क नहीं किया, बल्कि उन्होंने किसानों के दर्द के बारे में हमसे बात की
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसान प्रतिनिधियों के साथ खुले मन से चर्चा करके समाधान करने का हरसंभव प्रयास कर रही है। यदि विकल्पों के आधार पर चर्चा होगी तो सरकार तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार द्वारा तीनों कृषि सुधार कानूनों पर बिन्दुवार चर्चा करने का अनुरोध किया गया, जिस पर किसान संगठनों ने अपनी असहमति जताई और कानून को रिपील करने की मांग की। इस पर कृषि मंत्री जी ने पुन: अनुरोध किया कि संबंधित प्रावधान या बिन्दु, जिन पर किसान संगठन असहमत हों या उन्हें कोई आपत्ति हो तो उसे सरकार के संज्ञान में लाया जा सकता है, तब उन पर यथोचित विचार करके संशोधन किया जा सकता है। लगातार लंबी चर्चा करने के बावजूद आज कोई विकल्प नहीं निकल पाया तत्पश्चात सरकार व किसान संगठनों ने 15 जनवरी, 2021 को दोपहर 12 बजे अगली बैठक में आगे की चर्चा करने पर अपनी सहमति प्रदान की। अगली बैठक के पूर्व कृषि सुधार कानूनों से संबंधित मुद्दों पर विकल्पों की दृष्टि से विचार-विमर्श किया जाएगा।
उधर, भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि जब तक नए कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक आंदोलन जारी रहेगा और किसान पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, 'हम कहीं नहीं जा रहे हैं। सरकार संशोधनों के बारे में बात करना चाहती थी। हम कानूनों के हिस्सों पर चर्चा नहीं करना चाहते। हम केवल यह चाहते हैं कि नए कानून निरस्त किए जाएं।'