नई दिल्ली: 'दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज 39वां दिन है।कड़कती ठंड, शीतलहर और घटता तापमान भी किसानों का हौसला नहीं तोड़ सका है।
केंद्र के तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) कड़ाके की सर्दी और बारिश के बीच भी जारी है|किसान इन कानूनों का 'काला कानून' करार देते हुए एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि इन्हें रद्द करवाया जा सके|चार जनवरी (सोमवार) को किसान संगठनों और सरकार के बीच बैठक होनी है. इससे पहले, 30 दिसंबर को बातचीत हुई थी, जिसमें दो मुद्दों पर बात बनी है|
गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन में बैठे एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हम ऐसे खराब मौसम में अपने परिवार से दूर सड़कों पर बैठे हैं| हम उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार कल हमारी मांगों को स्वीकार करेगी|
किसान आंदोलन लाइव अपडेट:
भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान हरमीत सिंह ने कहा कि,'13 जनवरी को हम कृषि क़ानूनों की कॉपियां जलाकर लोहड़ी के त्योहार को मनाएंगे। 6-20 जनवरी के बीच देशभर में किसानों के पक्ष में धरना-प्रदर्शन, मार्च आदि आयोजित किए जाएंगे। 23 जनवरी को आज़ाद हिन्द किसान दिवस मनाया जाएगा|
दिल्ली में सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन करते हुए किसान नेता मंजीत सिंह राय ने कहा कि,''आज संगरूर में किसानों पर लाठीचार्ज किया गया। हम इसकी निंदा करते है। हम पंजाब सरकार को अवगत कराते हैं कि आपने अगर किसानों पर लाठीचार्ज बंद नहीं किए तो उनके खिलाफ पंजाब में मोर्चा खोला जाएगा|
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''एक और किसान की क़ुर्बानी। गंगाना, ज़िला सोनीपत के कुलबीर सिंह ने दम तोड़ा। शीतलहर-बारीश की मार सह रहा धरतीपुत्र है दिल्ली और चंडीगढ़ बैठे हुकमरानों के अहंकार का शिकार। जितनी जानें चाहिए ले लें मोदी जी, खट्टर साहेब और दुष्यंत चौटाला, पर काले क़ानून वापस लें।
-हरियाणा के रेवाड़ी में दिल्ली-जयपुर हाइवे पर स्थित खेड़ा बॉर्डर व संगवाड़ी से किसानों के कुछ जत्थों ने दिल्ली कूच किया लेकिन पुलिस ने धारूहेड़ा के पास सड़क पर कंटेनर लगाकर रोक दिया। इसके चलते किसानों ने कंटेनर हटाने के प्रयास किए तो वहीं पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। वहीं धारूहेड़ा में किसान व अर्धसैनिक बल आमने-सामने हैं।बारिश व कड़ाके की ठंड के बीच किसान दिल्ली जाने पर अड़े हैं। वहीं प्रशासन ने पुलिस बल बढ़ा दिया है। बता दें कि शनिवार को झज्जर से 500 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली में तीन हजार से ज्यादा किसान रेवाड़ी पहुंचे थे। रात को रुकने के बाद किसानों ने शाम करीब चार बजे दिल्ली की ओर कूच कर दिया। लेकिन पुलिस ने खेड़ा बॉर्डर से करीब 20 किमी दूर धारूहेड़ा के मसानी बैराज पर किसानों को कंटेनर लगाकर रोक दिया है।इसके चलते किसान डिवाइडर पार करते हुए दिल्ली से जयपुर की ओर जाने वाली लेन पर आ गए। इसके चलते ही पुलिस व किसानों में टकराव बढ़ गया। अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हैं। धारूहेड़ा के पास करीब एक हजार किसान व सैंकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क पर हैं।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि,''किसानों को MSP की लीगल गारंटी ना दे पाने वाली मोदी सरकार अपने उद्योगपति साथियों को अनाज के गोदाम चलाने के लिए निश्चित मूल्य दे रही है। सरकारी मंडियां या तो बंद हो रही हैं या अनाज खरीदा नहीं जा रहा। किसानों के प्रति बेपरवाही और सूट-बूट के साथियों के प्रति सहानुभूति क्यूँ?
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'टिकरी बार्डर पर लगभग शून्य डिग्री तापमान, मुसलाधार बारिश एवं शीतलहर के बीच किसानों ने आज मजबूर होकर अर्धनग्न प्रदर्शन किया। सत्ता में बैठे लोगों को कब शर्म आएगी, जो किसानों के इस आन्दोलन को अब भी 'इवेंट' बताकर निरंकुशता की सीमाएँ लांघ चुके हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'किसान आंदोलन में शहादतों की दर्दनाक दास्ताँ! टिकरी बॉर्डर- ईंटल कलां, जींद के 62 वर्षीय किसान जगबीर सिंह ने दी कुर्बानी। कितनी जानें लेंगे मोदी-खट्टर-दुष्यंत? क्या भाजपाईयों का दिल नही दहलता? क्या अन्नदाता की जान की कोई क़ीमत नही? कब वापस होंगे काले क़ानून?
-टीकरी बॉर्डर पर एक 60 वर्षीय किसान आंदोलनकारी की मौत हो गई। किसानों के टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ पड़ाव में अब तक 14 आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''किसान आन्दोलन दौरान टिकरी बॉर्डर पर एक और शहीद। भटिंडा(पंजाब) के 18 वर्षीय युवा किसान जश्नप्रीत की दिल का दौरा पड़ने से मौत आए दिन किसान की क़ुर्बानी लेकिन मोदी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही मोदीजी रहम कीजिये और 3 काले किसान विरोधी कानून निरस्त कीजिए
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'एग्रो कंपनी ने किसान के साथ तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल एग्रीमेंट कर क्वालिटी के नाम पर फसल खरीदने से किया इनकार और फिर सस्ते में खरीद की। मोदी जी आप तीन कृषि कानून को लाभदायक बताते हैं, पर सच्चाई इसके विपरीत है। कब वापस लेंगे काले क़ानून?
-आज सुबह हुई बारिश से बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में जलभराव हुआ, यहां कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "बारिश से लंगर, टेंट में पानी चला गया और कपड़े भीग गए। लेकिन फिर भी किसानों के हौसले बुलंद हैं।"
- आज (रविवार) सुबह हुई बारिश से गाज़ीपुर बॉर्डर के प्रदर्शन स्थल पर हुए जलभराव को प्रदर्शनकारी साफ करते दिखे।
-गाज़ीपुर (दिल्ली-यूपी) बॉर्डर पर ठंड और बारिश के बीच भी कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। रविवार को किसानों को यहां प्रदर्शन करते हुए आज 37 दिन हो गए हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "तिरपाल और जो कुछ भी हम लेकर आए हैं उसी से ठंड और बारिश से अपना बचाव कर रहे हैं।"
शनिवार को रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था कि,करनाल(हरियाणा) से संत बाबा राम सिंह व फाजिल्का(पंजाब) से अमरजीत सिंह के बाद बिलासपुर(उत्तराखण्ड) के किसान कश्मीर सिंह द्वारा #किसान_आंदोलन में प्राणों की आहुति के समाचार से मन बेहद व्यथित है। निष्ठुर सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ते हुए 3 काले कानूनों को तुरंत वापिस लेना चाहिए।
शनिवार को आत्महत्या करने वाले किसान कश्मीर सिंह ने सुसाइड नोट में लिखा : "कब तक हम सर्दी में बैठेंगे, यह सरकार सुन नहीं रही, इसलिए जान दे रहा हूं ताकि कोई हल निकल सके। मेरा अंतिम संस्कार यहीं कर देना"
बता दें कि दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की धमकी दी है| किसानों ने कहा है कि 23 जनवरी को, यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर सभी राज्यपालों के आवास पर विरोध प्रदर्शन करेंगे| किसान आंदोलन का समन्वय कर रही 7 सदस्यीय समन्वय समिति ने शनिवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को यह अल्टीमेटम दिया|
सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को हुई छठे दौर की वार्ता में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने को लेकर सहमति बनी थी|