नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यसभा 9 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित की गई। संसद के मानसून सत्र का आज यानी 8 अगस्त को 15वां दिन था। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर शाम 6 बजे तक चर्चा हुई। सबसे पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने अविश्वास प्रस्ताव पर 35 मिनट स्पीच दी। इस दौरान उन्होंने मणिपुर हिंसा से लेकर विदेश नीति तक के मुद्दे पर सरकार को घेरा। गोगोई ने कहा कि प्रस्ताव लाने का मकसद पीएम का मौन तोड़ना है।
इस दौरान राज्यसभा ने राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2023 और राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक, 2023 को ध्वनि मत से पारित किया। दोनों विधेयक पहले लोकसभा से पारित हो चुके हैं। राज्यसभा ने भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम, 2017 में संशोधन के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2023 पारित किया। इससे पहले विधेयक 4 अगस्त को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
राज्यसभा में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को मौजूदा संसद सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया गया। सदन के नेता पीयूष गोयल ने सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालने, सभापति की अवज्ञा करने और सदन में लगातार अशांति पैदा करने के लिए उनके निलंबन के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा, ''मुझे लगता है कि डेरेक ओ ब्रायन से कम से कम यही उम्मीद की जा सकती है कि वह आसन के सामने खेद व्यक्त करें।''
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, 'मेरे लिए यह इतना गंभीर मामला है कि इसे खारिज नहीं किया जा सकता... गहन, तत्काल विचार-विमर्श के बाद मैंने पहले सदन की भावना को नहीं समझा। अगर मैंने वास्तव में प्रक्रिया को सफल बनाया होता तो डेरेक ओ ब्रायन सदन से बाहर हो गए होते। अपनी बुद्धिमत्ता से मैंने सोचा कि उस समय मुझे इसे उस निष्कर्ष पर नहीं ले जाना चाहिए|
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा, "हम अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर हैं। यह कभी भी संख्या के बारे में नहीं था बल्कि मणिपुर के लिए न्याय के बारे में था। मैं प्रस्ताव पेश करता हूं कि यह सदन सरकार में अविश्वास व्यक्त करता है। I.N.D.I.A. मणिपुर के लिए यह प्रस्ताव लाया है। मणिपुर न्याय चाहता है।"
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा,प्रधानमंत्री ने संसद में न बोलने का मौन व्रत ले लिया है। इसलिए उनकी चुप्पी तोड़ने के लिए हमें अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा। हमारे पास उनके लिए तीन सवाल हैं - 1. वे आज तक मणिपुर क्यों नहीं गए?, 2. आख़िरकार मणिपुर पर बोलने में लगभग 80 दिन क्यों लग गए और जब वे बोले तो सिर्फ़ 30 सेकंड के लिए?, 3. प्रधानमंत्री ने अब तक मणिपुर के मुख्यमंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया?
गौरव गोगोई ने कहा,प्रधानमंत्री को यह स्वीकार करना होगा कि उनकी डबल इंजन सरकार, मणिपुर में उनकी सरकार विफल हो गई है। इसीलिए, मणिपुर में 150 लोगों की मृत्यु हुई, लगभग 5000 घर जला दिए गए, लगभग 60,000 लोग राहत शिविरों में हैं और लगभग 6500 FIR दर्ज की गई हैं। राज्य के CM, जिन्हें बातचीत का, शांति और सद्भाव का माहौल बनाना चाहिए था, उन्होंने पिछले 2-3 दिनों में भड़काऊ कदम उठाए हैं जिससे समाज में तनाव पैदा हो गया है|
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि,''जब भी उत्तर-पूर्व के किसी राज्य में जब सामाजिक उथल-पुथल होती है, जब वहां की अस्थिरता भंग होती है तो असर सिर्फ उस राज्य पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व पर पड़ता है|
कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि,''सदन के नेता का कार्य सदन को सुचारू रूप से चलने देने का होता है। लेकिन जो शब्द संसदीय कार्य मंत्री और सुधांशु (त्रिवेदी) द्वारा इस्तेमाल किए गए बल्कि कई भाजपा नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी I.N.D.I.A शब्द से डरते हैं और इसी वजह से वह हर रोज I.N.D.I.A पर निशाना साध रहे हैं
कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि,''विपक्षी नेताओं के खिलाफ जिस तरह के असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उसकी निंदा की जानी चाहिए। 13 या 14 से अधिक दलों ने गैर-विशेषाधिकार प्राप्त प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। एक विशेषाधिकार समिति द्वारा इसकी जांच की जरूरत है|
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि,''मणिपुर की घटना बेहद संवेदनशील है। सरकार इस मामले में बेहद असंवेदनशील रही है। यह अहंकारी सरकार है, यह पूरी तरह से मानवाधिकार का उल्लंघन था। हिंसा को अंजाम देने के लिए महिलाओं को साधन के रूप में इस्तेमाल करना संवैधानिक लोकतंत्र में अस्वीकार्य है...यह एक राज्य-प्रायोजित जातीय हिंसा थी|
NCP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि,''मेरी मांग है कि (मणिपुर के) मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए...दंगा, हत्या और बलात्कार के 10,000 मामले आए हैं। क्या हम इतने असंवेदनशील हो गए हैं? इस सरकार की यही समस्या है..|
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि,''यह सरकार निर्दयी लोगों की सरकार है। वे पश्चिम बंगाल में प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं लेकिन एक भी प्रतिनिधिमंडल मणिपुर नहीं गया जहां हमारे भाई-बहन मर रहे हैं...आपको कोई दया नहीं है और यही कारण है कि आप अन्य दलों की तरह मणिपुर नहीं गए |
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि,''मणिपुर के अल्पसंख्यकों (मैतेई आदिवासी) को बेरहमी से मारा गया है। 143 लोग मारे गए हैं। 65,000 लोग राज्य छोड़कर भाग गए हैं। मणिपुर की सड़कों पर दो महिलाओं को निर्वस्त्र किया गया, सामूहिक बलात्कार किया गया और नग्न घुमाया गया... मुख्यमंत्री असहाय हैं। पीएम संसद में नहीं आ रहे हैं और वह राज्य में नहीं गए हैं वहीं, I.N.D.I.A. पार्टियां वहां गईं और समझ गईं कि क्या हुआ है|