नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जयपुर में पत्रिका गेट का लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद रहे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्रिका अखबार समूह के अध्यक्ष द्वारा लिखी दो पुस्तकों का भी विमोचन किया। PM ने कहा, "आज मुझे राजस्थान की संस्कृति को प्रतिबिंबित करने वाले पत्रिका गेट को समर्पित करने का अवसर मिला। ये(पत्रिका गेट) स्थानीय निवासियों के साथ ही वहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा|
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग से जयपुर में पत्रिका गेट का लोकार्पण करते हुए कहा,''आज जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं, जब लोकल के लिए वोकल होने की बात कर रहे हैं, तब हमारा मीडिया इस संकल्प को एक बड़े अभियान की शक्ल दे रहा है। हमें आत्मनिर्भर भारत के विजन को और व्यापक करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि,'', भारत के लोकल प्रोडक्ट्स ग्लोबल हो रहे हैं। भारत की आवाज भी अब ज्यादा ग्लोबल हो रही है। दुनिया भारत को अब और ज्यादा ध्यान से सुनती है।
भारत के उत्पाद तो ग्लोबल हो ही रहे हैं, भारत की आवाज भी ग्लोबल हो रही है। दुनिया भारत को अब और ज्यादा ध्यान से सुनती है। आज लगभग हर अंतरराष्ट्रीय मंच में भारत की मजबूत उपस्थिति है। ऐसे में भारतीय मीडिया को भी ग्लोबल होने की जरूरत है| न केवल भारतीय उत्पादों बल्कि भारत की आवाज भी वैश्विक हो गई है, भारतीय मीडिया को भी वैश्विक होने की जरूरत है|विश्व अब भारत पर अधिक ध्यान दे रहा है, अधिकांश वैश्विक निकायों में हमारी मजबूत उपस्थिति है|मीडिया ने कोरोनोवायरस महामारी पर जागरूकता फैलाकर 'अभूतपूर्व तरीके' से लोगों की सेवा की:PM
प्रधानमंत्री ने इस दौरान लेखन और साहित्य पर चर्चा करते हुए कहा, हमारे देश में तो लेखन का निरंतर विकास भारतीयता और राष्ट्रीयता के साथ हुआ है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लगभग हर बड़ा नाम, कहीं न कहीं से लेखन से भी जुड़ा था।
हमारे उपनिषदों का ज्ञान, वेदों का चिंतन केवल आध्यात्मिक और दार्शनिक आकर्षण का ही क्षेत्र नहीं है। वेद और वेदांत में सृष्टि और विज्ञान का भी दर्शन है। आज विश्व जिन समस्याओं से जूझ रहा है उसकी चर्चा हज़ारों साल पहले हुई है| उपनिषद संवाद और अक्षर यात्रा भी उसी भारतीय चिंतन की एक कड़ी के रूप में लोगों तक पहुंचेगी, ऐसी मेरी अपेक्षा है। आज text और tweet के इस दौर में ये और ज्यादा जरूरी है कि हमारी नई पीढ़ी गंभीर ज्ञान से दूर न हो जाए| अक्षर हमारी भाषा की, हमारी अभिव्यक्ति की पहली इकाई होते हैं, संस्कृत में अक्षर का अर्थ है, जिसका क्षरण न हो, यानि जो हमेशा रहे। विचार की यही शक्ति है, सामर्थ्य है। हजारों साल पहले जो विचार, जो ज्ञान किसी ऋषि, वैज्ञानिक ने हमें दिया, वो आज भी संसार को आगे बढ़ा रहा है|