नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 400 वस्तुओं और 80 सेवाओं पर लगने वाली जीएसटी (माल एवं सेवा कर) दरों को संसोधित किया है| इससे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें सस्ती हो गई| वित्त मंत्रालय ने बताया कि देशभर में जीएसटी के लागू होने के बाद से कुल मिलाकर 400 वस्तुओं और 80 सेवाओं पर जीएसटी दरों में कमी की गई है|
जीएसटी के चार साल पूरे होने के अवसर पर मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने कहा कि,''कुल मिलाकर, 400 वस्तुओं और 80 सेवाओं पर जीएसटी की दरों में कमी की गई है। यह देखते हुए कि जीएसटी से पहले की प्रणाली में अधिकांश वस्तुओं पर संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों की दरें 31 प्रतिशत से अधिक थीं; यह कमी करदाताओं के लिए एक बड़ी राहत है।
बालों का तेल, टूथपेस्ट और साबुन जैसी रोजमर्रा की आम चीजों पर कर दरें जीएसटी से पहले के समय के 29.3% से घटकर जीएसटी के तहत अब महज 18% रह गई हैं।
फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, फूड ग्राइंडर्स और मिक्सर, वेजिटेबल जूस एक्सट्रैक्टर, शेवर, हेयर क्लिपर्स, वॉटर हीटर, हेयर ड्रायर, इलेक्ट्रिक स्मूदिंग आयरन, टीवी (32 इंच तक) जैसे उपकरणों पर टैक्स की दरें जीएसटी के कारण 31.3 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गई हैं।
सिनेमा के टिकटों पर लगने वाला टैक्स, जोकि पहले 35% से लेकर 110% के बीच होता था, को घटाकर 12% कर दिया गया है (जहां टिकट का मूल्य 100 रुपये तक है) और जीएसटी व्यवस्था में यह 18% कर दिया गया है।
दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं शून्य या 5% वाले स्लैब में हैं। आवासीय परिसरों के निर्माण के लिए दरों में सामान्य रूप से 5% और सस्ते घरों के लिए 1% की भारी कमी आई। रेस्तराओं के लिए भी दर को घटाकर 5% कर दिया गया।
जीएसटी के अंतर्गत कृषि क्षेत्र को पर्याप्त रियायतें दी गई हैं। उर्वरकों पर, जीएसटी में शुद्ध कर को आधा कर दिया गया। कृषि से जुड़े उपकरणों पर, कर उल्लेखनीय रूप से 15% / 18% से 12%, और कुछ खास वस्तुओं पर लगभग 8% से लेकर 5% तक कम कर दिया गया है।
जीएसटी – पूर्व काल में रासायनिक उर्वरकों पर कर की दर 10% से अधिक (1% उत्पाद शुल्क, 2.44% एम्बेडेड उत्पाद शुल्क, लगभग 4% भारित औसत वैट और 2.5% सीएसटी, चुंगी, आदि) थी। जबकि जीएसटी व्यवस्था में सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों पर केवल 5% कर की दर लागू है।
जीएसटी के अंतर्गत पशु चारा, जलीय चारा और पोल्ट्री चारा, इन सभी को सभी प्रकार के बीजों के समान ही शून्य दर पर रखा गया है। दूसरे शब्दों में, कृषि प्रक्रिया से जुड़ी इन महत्वपूर्ण सामग्रियों पर जीएसटी प्रणाली के तहत किसी भी प्रकार का कर नहीं लगता है।
इन 4 वर्षों में जीएसटी ने टैक्स कैस्केडिंग, दोहरा (बहुविध) कराधान और जीएसटी के तहत कर के बोझ को कम करके बेहतर कर अनुपालन हासिल किया है और छिपे एवं एम्बेडेड करों को हटाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया है।
कुल मिलाकर, 400 वस्तुओं और 80 सेवाओं पर जीएसटी की दरों में कमी की गई है। यह देखते हुए कि जीएसटी से पहले की प्रणाली में अधिकांश वस्तुओं पर संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों की दरें 31 प्रतिशत से अधिक थीं; यह कमी करदाताओं के लिए एक बड़ी राहत है।

जीएसटी के चार साल पूरे होने के अवसर पर मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने कहा कि यह कानून कंज्यूमर और टैक्सपेयर्स दोनों के लिए काफी फ्रेंडली है| वर्तमान में अगर किसी बिजनेस का टर्नओवर 40 लाख (गुड्स के लिए)है तो वह जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है| पहले इसकी लिमिट 20 लाख थी| जिनका टर्नओवर 1.5 करोड़ सालाना है वो कंपोजिट स्कीम का फायदा उठा सकते हैं और उन्हें केवल 1 फीसदी का टैक्स (गुड्स पर) लगेगा| सर्विस आधारित बिजनेस टर्नओवर 20 लाख तक जीएसटी के दायरे से बाहर है| सर्विस बिजनेस में 50 लाख तक टर्नओवर होने पर कंपोजिट स्कीम के तहत केवल 6 फीसदी का टैक्स जमा किया जा सकता है|
QRMP स्कीम की शुरुआत 1 जनवरी 2021 से: 5 करोड़ रुपए तक के कुल टर्नओवर वाले छोटे करदाताओं के लिए तिमाही रिटर्न और मासिक भुगतान (QRMP) योजना 1 जनवरी 2021 से शुरू की गई, जिसमें करदाता हर महीने के बजाय तिमाही अपना जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, जबकि उन्हें हर महीने कर का भुगतान करना होता है| छोटे करदाताओं के समक्ष आने वाली कठिनाइयों का निराकरण करते हुए जीएसटी परिषद ने वार्षिक रिटर्न को सरल बनाया और इसे दाखिल करना छोटे करदाताओं के लिए वैकल्पिक कर दिया गया, जिनका टर्नओवर वित्त वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 में 2 करोड़ रूपये तक था|