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24 अगस्त 2026

NEP कॉन्क्लेव' में बोले PM मोदी- रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने वाली है राष्ट्रीय शिक्षा नीति

नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव' को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि,''आज देशभर में इसकी व्यापक चर्चा हो…

NEP कॉन्क्लेव' में बोले PM मोदी- रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने वाली है राष्ट्रीय शिक्षा नीति
NEP कॉन्क्लेव' में बोले PM मोदी- रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने वाली है राष्ट्रीय शिक्षा नीति | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव' को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि,''आज देशभर में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपनी राय दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को रिव्यु कर रहे हैं। ये एक हेल्दी डिबेट है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा|




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,'आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इम्प्लिमेंटेशन से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है। जहां तक  राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात है, मैं पूरी तरह कमिटेड हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं| राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का Bias है, या किसी एक ओर झुकी हुई है




उन्होंने कहा कि हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी नेशनल वैल्यूज़ के साथ जोड़ते हुए, अपने नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को फ्यूचर रेडी रखे, फ्यूचर रेडी करे| मोदी ने कहा कि,'भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है|बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे।परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना की वैल्यूज़ प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था|




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,'आज गुरुवर रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे - "उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।" निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है|इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, पांचवी तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है|




उन्होंने कहा कि अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें 'व्हाट टू थिंक' पर फोकस रहा है जबकि इस शिक्षा नीति में 'हाऊ टू थिंक' पर बल दिया जा रहा है। ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि आज जिस दौर में हम हैं, वहां इन्फोर्मेशन और कंटेट की कोई कमी नहीं है|अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनका पार्टिसिपेशन भी बढ़ेगा|






उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट, क्रडिट बैंक के पीछे यही सोच है। हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे निरंतर खुद को रि-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा|जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्र शिक्षा और श्रम की गरिमा पर बहुत काम किया गया है|




पीएम ने कहा कि जब संस्थान और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी ये रिफॉर्म्स रिफ्लेक्ट होंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। अच्छी क्वालिटी की शिक्षा का रास्ता इन दोनों मतों के बीच में है। इससे क्वालिटी को प्रोत्साहन मिलेगा|राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है। यहां से विश्विद्यालय, कॉलेज, स्कूल शिक्षा बोर्ड, अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद और समन्वय का नया दौर शुरु होने वाला है|





पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी। इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है|






हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है,  जब तक हमारी शिक्षा में passion न हो, philosophy of education, purpose of education न हो| इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। School Curriculum के 10+2 structure से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 curriculum का structure देना, इसी दिशा में एक कदम है|











tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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