नई दिल्ली: देश में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहली लहर के मुकाबले देश में दूसरी कोरोना लहर ज्यादा खतरनाक दिख रही है| कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कुछ राज्यों ने वैक्सीन की कमी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र से सप्लाई बढ़ाने की मांग की है| अब तक देश में कुल 8.7 करोड़ डोज वैक्सीन लगाई जा चुकी है| लेकिन दूसरी तरफ कुछ राज्यों ने वैक्सीन की कमी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र से सप्लाई बढ़ाने की मांग की है|
वैक्सीन की कमी के चलते यूपी के वाराणसी में भी 66 सरकारी टीकाकरण केंद्रों में से बुधवार को सिर्फ 25 पर ही वैक्सीनेशन हुआ| जनपदीय वैक्सीन भण्डार केंद्र पर भी ताला लटका दिखा| वैक्सीन की कमी कब तक पूरी होगी, यह स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं मालूम है| शहर के चौकाघाट स्थित जनपद वैक्सीन भंडार केंद्र पर भी ताला लटक गया त?? वहीं पास के चौकाघाट राजकीय राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल और ढेलवरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी वैक्सीनेशन का काम बंद हो गया|
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन की कमी मामले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा,,''उत्तर प्रदेश में नोएडा व गाजियाबाद में कई जगहों पर कोविड वैक्सीन न होने के चलते लोगों को वापस लौटना पड़ा। वाराणसी में अगले 3 दिन तक कई सारे वैक्सीन केंद्र बंद रहेंगे।
प्रभारी प्रियंका गांधी ने कहा,,;तमाम राज्यों से वैक्सीन की किल्लत की खबर आ रही है। कोविड से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र ने वैक्सीन की कमी को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार से समुचित मात्रा में वैक्सीन देने की बात कही। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी इसी तरह की मांग की गई।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा,''पूरा देश कोविड की दूसरी वेव से जूझ रहा है। सभी राज्यों के नागरिकों तक वैक्सीन की आसान पहुंच इस पूरे माहौल में संक्रमण पर नियंत्रण की तरफ एक कारगर कदम होगा। इस पूरी आपदा के समय में केंद्र सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट करने वाली संस्था नहीं है बल्कि सूचनाओं की सही उपलब्धता, राज्य व केंद्र के बीच आपसी तालमेल, कोविड के मद्देनजर आने वाले समय के लिए आवश्यक रणनीति व कोविड से जुड़ी मेडिकल सहायता की समावेशी व प्रचुर उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां केंद्र सरकार पर हैं।
,''विभिन्न राज्यों द्वारा वैक्सीन की मांग पर केंद्र सरकार ने ओछी राजनीति करने का जो रवैया अपनाया है वह इतिहास के पन्नों में एक बुरे अध्याय की तरह अंकित किया जाएगा।क्या इस नाजुक समय में आरोपों की राजनीति होनी चाहिए?क्या आंकड़ों व तथ्यों को दरकिनार कर सरकार को पार्टी प्रोपगंडा के लिए काम करना चाहिए? क्या सभी नागरिकों के स्वस्थ भविष्य के अधिकार को सरकार अनदेखा कर सकती है?