नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला हैं| राहुल गांधी ने कहा,''2016 से सरकार दावा कर रही है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य में बदलाव करेंगे। लेकिन
न किसानों की आय दोगुनी हुई, न न्यूनतम समर्थन मूल्य मिला, न ही खेती संबंधित उपकरण और सामान का दाम कम हुआ। राहुल गांधी ने कहा,'''किसान और खेती इस देश की रीढ़ है जिसे तोड़ने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है|
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा,''''2016 से सरकार दावा कर रही है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। कहा तो ये भी था कि हम न्यूनतम समर्थन मूल्य में बदलाव करेंगे। एक नया फॉर्मूला होगा - उत्पादन की पूरी लागत और 50% लाभ। क्या हुआ उस वादे का?
एक किसान परिवार की औसत मासिक आय ₹10,218 है, और औसत क़र्ज़ ₹74,100 है।
आज, DAP fertiliser के दाम ₹1280 है।
डीज़ल ₹91 प्रति लीटर के पार हो चुका है।
राहुल गांधी ने कहा,'''न किसानों की आय दोगुनी हुई, न न्यूनतम समर्थन मूल्य मिला, न ही खेती संबंधित उपकरण और सामान का दाम कम हुआ। किसान और खेती इस देश की रीढ़ है जिसे तोड़ने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है-
इससे पहले बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला था| कल यानी सोमवार को राहुल गांधी ने कहा था,' महंगाई पर लगा 'Lockdown' हटते ही लूट का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो चुका है। खाने-पीने से लेकर रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ों में बेतहाशा वृद्धि जनता की कमर तोड़ रही है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को अपने आगे न देश दिखाई देता है, न रोती-बिलखती प्रजा। उन्हें सिर्फ़ अपने ख़ास मित्रों का फायदा दिखता है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा था,''चुनाव ख़त्म होते ही आम जनता के बुरे दिन फिर से लौट आये हैं। राहुल गांधी ने कहा,''गैस का सिलिंडर, डीज़ल-पेट्रोल यानी GDP (Gas-Diesel-Petrol) में गज़ब का उछाल आया है।
राहुल गांधी ने कहा,'''महंगाई पर लगा 'Lockdown' हटते ही लूट का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो चुका है। खाने-पीने से लेकर रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ों में बेतहाशा वृद्धि जनता की कमर तोड़ रही है। सिर्फ एक महीने में ही महंगाई इतनी बढ़ी है कि एक परिवार पर सालाना आठ हज़ार का बोझ आएगा।लेकिन प्रधानमंत्री जी को अपने आगे न देश दिखाई देता है, न रोती-बिलखती प्रजा। उन्हें सिर्फ़ अपने ख़ास मित्रों का फायदा दिखता है।