नई दिल्ली: 6 हजार करोड़ रुपए के कोयला घोटाले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि,'क्या इस कोयला घोटाले पर प्रधान ‘मित्र’ मंत्री जी कुछ कहेंगे?| बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा- 60 लाख टन कोयला “ग़ायब”! ...उन्होंने आगे कहा- क्या इस कोयला घोटाले पर प्रधान ‘मित्र’ मंत्री जी कुछ कहेंगे?
वहीं,''6 हजार करोड़ रुपए के कोयला घोटाले पर कांग्रेस ने कहा यह घोटाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के वक्त से हो रहा है। पार्टी ने इस मामले की उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की है। कांग्रेस ने कहा कि,''इस घोटाले की सीबीआई, ईडी और अन्य जांच एजेंसियों को भी स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।
कांग्रेस ने कहा कि यूपीए सरकार ने छोटे उद्योगों को किफायती दर पर अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला उपलब्ध कराने की नीति 2007 में शुरू की थी। इसके तहत राज्यों से कहा गया था कि कोल इंडिया की खदानों से उनके पास कोयला सीधे पहुंच जाएगा और वे छोटे उद्योगों को कोयला मुहैया करा दें। लेकिन गुजरात सरकार ने खुद यह काम करने के बजाय कुछ एजेंसियों को दे दिया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों के भीतर 60 लाख टन कोयला जो छोटे उद्योगों को मिलना चाहिए था, उसे राज्य के बाहर दूसरे उद्योगों को कई गुना भाव पर दे दिया गया। कांग्रेस ने दावा किया कि पिछले 14 साल में गुजरात के उद्योग विभाग ने ये एजेंसियों नहीं बदलीं। जबकि दूसरे राज्यों में उद्योग विभाग स्वयं यह काम कर रहा है।
पहले नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री होने के साथ राज्य के उद्योग मंत्री थे। इसके बाद विजय रूपाणी और भूपेंद्र पटेल भी मुख्यमंत्री होने के साथ उद्योग मंत्री रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में समयबद्ध जांच हो और 2007 से अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों की भूमिका भी जांची जाए। विपक्षी पार्टी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को मामला दर्ज करना चाहिए।
बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात से फिर एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। यह घोटाला कोल इंडिया की खदानों से गुजरात के व्यापारियों व छोटे उद्योगों के नाम पर लाखों टन कोयला गायब करने का है। एक जांच में सामने आया है कि, खदानों से निकला लगभग 60 लाख टन कोयला रास्ते में गायब किया गया और सरकार के अधिकारियों तथा व्यापारियों ने उसे बेचकर 6 हजार करोड़ रुपए कमाए।
कोल इंडिया की विभिन्न कोयला खदानों से निकाला गया कोयला उन उद्योगों तक पहुंचा ही नहीं, जिनके लिए उसे निकाला गया था। मिले दस्तावेज, 60 लाख टन कोयला भेजने की एंट्री है अब तक कोल इंडिया की खदानों से गुजरात के व्यापारियों, छोटे उद्योगों के नाम पर 60 लाख टन कोयला भेजा गया है।
इसकी औसत कीमत 3,000 रुपए प्रति टन के हिसाब से 1,800 करोड़ रुपए होती है, लेकिन इसे व्यापारियों और उद्योगों को बेचने के बजाय 8 से 10 हजार रुपए प्रति टन की कीमत पर अन्य राज्यों में बेचकर कालाबाजारी की गई है।